यह चीन के बाहर एक ही स्थान पर स्थित विश्व की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना है। इसकी ऊर्जा भंडारण क्षमता 3.37 गीगावाट प्रति घंटा (GWh) है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) क्या है?
- BESS एक विद्युत-रासायनिक प्रणाली है, जो अतिरिक्त विद्युत ऊर्जा को भंडारित करके बाद में उपयोग के लिए सुरक्षित रखती है।
- यह प्रणाली ग्रिड कनेक्शन में लचीलापन प्रदान करती है और मुख्य ग्रिड में व्यवधान उत्पन्न होने पर स्थानीय स्तर पर स्वायत रूप से भी कार्य कर सकती है।
- महत्व: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा के मुख्य ग्रिड से विश्वसनीय रूप से जोड़ने के लिए 2029-30 तक लगभग 336 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी।
- BESS के प्रकार:
- पारंपरिक सॉलिड रिचार्जेबल बैटरी: इसमें ऊर्जा को ठोस धातु इलेक्ट्रोड में भंडारित किया जाता है। इसके उदाहरण हैं; लेड-एसिड बैटरी, लिथियम-आयन बैटरी, जिंक-एयर बैटरी आदि।
- फ्लो बैटरी: इसमें ऊर्जा को अलग-अलग टैंकों में रखे बहने वाले तरल इलेक्ट्रोलाइट्स में भंडारित किया जाता है। इसके उदाहरण हैं-वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरियां, जिंक-आयरन फ्लो बैटरियां, जिंक-ब्रोमीन बैटरियां आदि।
- चुनौतियां:
- भंडारण क्षमता सीमित होना,
- शुरुआती लागत बहुत अधिक होना,
- इनपुट पदार्थों (लिथियम, कोबाल्ट) के लिए आयात पर निर्भरता, और
- बैटरी अपशिष्ट के अनुचित तरीके से निपटान से पर्यावरण को खतरा पहुंचना।
भारत में BESS को बढ़ावा देने के लिए पहलें
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