यह समिति अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करेगी और इनसे निपटने के उपाय सुझाएगी।
- इस समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर होंगे। इसके सदस्यों में शामिल हैं; जनगणना आयुक्त और तीन प्रतिष्ठित विशेषज्ञ।
समिति को सौंपे गए मुख्य कार्य
- सीमा-पार कारकों आदि के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों और चुनौतियों पर विचार एवं अध्ययन करना;
- धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या की संरचनात्मक बदलावों का विश्लेषण करना;
- सीमा प्रबंधन; अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए संस्थागत एवं कार्यात्मक तंत्र की सिफारिश करना।
भारत में अवैध प्रवासन के मुख्य कारण
- उत्पीड़न से बचकर आने वाले लोगों के लिए गंतव्य: उदाहरण के लिए म्यांमार से आए रोहिंग्या।
- आर्थिक कारण: इसमें पड़ोसी देशों में गरीबी, रोजगार के अवसरों की कमी, आय में कमी आदि शामिल हैं।
- पर्यावरणीय कारण: उदाहरण के लिए - बांग्लादेश में बार-बार आने वाली बाढ़, चक्रवात और नदी के कटाव के कारण लोगों का विस्थापन।
मुख्य प्रभाव और चुनौतियां
- राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष खतरा: अवैध प्रवासियों के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने या सीमा-पार से होने वाली तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल होने का खतरा रहता है।
- सामाजिक-आर्थिक बोझ: अवैध प्रवासियों से सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ता है, श्रम बाजार प्रभावित होता है और ये प्रवासी भूमि अतिक्रमण का कारण बन सकते हैं।
- सामाजिक तनाव: जैसे असम में बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के कारण असम में नृजातीय और धार्मिक तनाव उत्पन्न होते रहे हैं।
निष्कर्ष
वास्तव में, भारत को अवैध प्रवासन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इसमें सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करना, स्पष्ट शरणार्थी नीति बनाना और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना शामिल हैं।