केंद्र सरकार ने देश में जनसांख्यिकीय बदलाव पर उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

यह समिति अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करेगी और इनसे निपटने के उपाय सुझाएगी।

  • इस समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर होंगे। इसके सदस्यों में शामिल हैं; जनगणना आयुक्त और तीन प्रतिष्ठित विशेषज्ञ

समिति को सौंपे गए मुख्य कार्य  

  • सीमा-पार कारकों आदि के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों और चुनौतियों पर विचार एवं अध्ययन करना; 
  • धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या की संरचनात्मक बदलावों का विश्लेषण करना;
  • सीमा प्रबंधन; अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए संस्थागत एवं कार्यात्मक तंत्र की सिफारिश करना

भारत में अवैध प्रवासन के मुख्य कारण

  • उत्पीड़न से बचकर आने वाले लोगों के लिए गंतव्य: उदाहरण के लिए म्यांमार से आए रोहिंग्या। 
  • आर्थिक कारण: इसमें पड़ोसी देशों में गरीबी, रोजगार के अवसरों की कमी, आय में कमी आदि शामिल हैं। 
  • पर्यावरणीय कारण: उदाहरण के लिए - बांग्लादेश में बार-बार आने वाली बाढ़, चक्रवात और नदी के कटाव के कारण लोगों का विस्थापन।

मुख्य प्रभाव और चुनौतियां

  • राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष खतरा: अवैध प्रवासियों के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने या सीमा-पार से होने वाली तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल होने का खतरा रहता है।
  • सामाजिक-आर्थिक बोझ: अवैध प्रवासियों से सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ता है, श्रम बाजार प्रभावित होता है और ये प्रवासी भूमि अतिक्रमण का कारण बन सकते हैं।
  • सामाजिक तनाव: जैसे असम में बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के कारण असम में नृजातीय और धार्मिक तनाव उत्पन्न होते रहे हैं।

निष्कर्ष

वास्तव में, भारत को अवैध प्रवासन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इसमें सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करनास्पष्ट शरणार्थी नीति बनाना और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना शामिल हैं।

Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

क्षेत्रीय सहयोग (Regional Cooperation)

क्षेत्र के देशों के बीच साझा समस्याओं के समाधान और सामान्य हितों को बढ़ावा देने के लिए किया जाने वाला सहयोग, जैसे कि सीमा सुरक्षा, आर्थिक विकास या पर्यावरण संरक्षण।

शरणार्थी नीति (Refugee Policy)

किसी देश द्वारा अपने क्षेत्र में आने वाले शरणार्थियों के प्रति अपनाई जाने वाली नीतियाँ, जिसमें उनके प्रवेश, आश्रय, सुरक्षा और पुनर्वास से संबंधित नियम शामिल होते हैं।

संस्थागत एवं कार्यात्मक तंत्र (Institutional and Functional Mechanism)

किसी कार्य को करने के लिए स्थापित की गई व्यवस्था, जिसमें संगठन, नियम, प्रक्रियाएँ और जिम्मेदारियाँ शामिल होती हैं, ताकि प्रभावी ढंग से कार्य किया जा सके।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet