क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड/ QUAD) ने पारस्परिक सहयोग के 20 वर्ष पूरे किए | Current Affairs | Vision IAS
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क्वाड के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने मानवीय सहायता और आपदा राहत के प्रति अपनी मूलभूत प्रतिबद्धता दोहराई। 

  • साथ ही, उन्होंने मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत; प्रशांत क्षेत्र के देशों के नेतृत्व वाली क्षेत्रीय व्यवस्था को समर्थन; हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आसियान की केंद्रीयता और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।
    • आसियान यानी ‘दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन’ की केंद्रीयता दर्शाती है कि क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने एवं क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने में इसकी अहम भूमिका है। 

क्वाड के बारे में

  • परिचय: यह ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक प्रकार की रणनीतिक-कूटनीतिक साझेदारी है। क्वाड का उद्देश्य एक ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाना है जो न केवल खुला और स्थिर हो, बल्कि सभी के लिए समावेशी और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
  • उत्पत्ति: क्वाड का इतिहास दिसंबर, 2004 से जुड़ा है, जब इन चारों देशों ने मिलकर हिंद महासागर में आई सुनामी से प्रभावित देशों को सहायता प्रदान की थी।
    • इस समूह के देशों की पहली अनौपचारिक बैठक 2007 में फिलीपींस के मनीला में आसियान क्षेत्रीय फोरम के दौरान आयोजित की गई थी। हालांकि, इसके बाद यह समूह कई वर्षों तक निष्क्रिय रहा।
  • पुनः शुरुआत: क्वाड के चारों देशों की पहली आधिकारिक वार्ता 2017 में फिलीपींस में हुई थी। 

भारत के लिए क्वाड का महत्त्व

  • समान विचारधारा वाले देशों के साथ साझेदारी: यह समूह भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की व्यवस्था को अपने हितों के अनुसार आकार देने में सहायता करता है। यह भारत को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर स्वतंत्र निर्णय लेने और इस क्षेत्र के अन्य हितधारक देशों व संगठनों के साथ साझेदारी बनाए रखने की स्वायत्तता भी प्रदान करता है।
  • क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करना: यह समूह भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में एक अग्रणी शक्ति और पब्लिक गुड्स उपलब्ध कराने वाले देश के रूप में स्थापित करने में सहायता करता है।
  • आर्थिक लाभ: यह समूह भारत को निवेशकों के लिए पसंदीदा देश बनने के साथ-साथ आसियान देशों के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने में मदद करता है।चीन के बढ़ते प्रभाव से रणनीतिक रूप से निपटना: इस मामले में भारत को क्वाड देशों से नौसैनिक सहायता सहित कई अन्य प्रकार की मदद मिल रही है।
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