समुद्री खाद्य क्षेत्रक विशाल और विविधतापूर्ण है। यह खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन, निर्यात आय और लोगों की सतत आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- अब तक का सर्वाधिक निर्यात (मात्रा और मूल्य, दोनों में): भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8.46 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 19,72,018 मीट्रिक टन (MT) समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात किया।
- निर्यात में अग्रणी समुद्री खाद्य उत्पाद: फ्रोजन श्रिम्प प्रमुख निर्यात उत्पाद बने रहे, जिनकी कुल निर्यात मात्रा में 40.19% और अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में कुल निर्यात आय में 66.52% हिस्सेदारी रही।
- इसके बाद फ्रोजन फिश और ड्राइड सीफूड का स्थान रहा।
- शीर्ष निर्यात गंतव्य: संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन।
समुद्री खाद्य क्षेत्रक को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए मुख्य नीतिगत सुझाव:
- स्वदेशी ब्रूडस्टॉक (प्रजनक/बीज) के विकास के लिए केंद्रीय योजना: इसका उद्देश्य महंगे और बीमारियों के खतरे वाले आयातित ब्रूडस्टॉक पर निर्भरता को कम करना होना चाहिए।
- समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने की केंद्रीय योजना: इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि भारतीय समुद्री खाद्य उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरे।
- निर्यात को सुलभ बनाना: इसका उद्देश्य देश-विशेष द्वारा लगाए जाने वाले निर्यात प्रतिबंधों से निपटना और माल ढुलाई की लागत को कम करना होना चाहिए।
- समुद्री खाद्य क्षेत्रक के लिए एक मुख्य संस्था की स्थापना: जैसे कि आपसी सहयोग, अवसंरचना के रूप में सहायता और विकास आदि के लिए 'समुद्री खाद्य क्षेत्रक शासकीय परिषद' (SSGC) का गठन किया जा सकता है।

उठाए गए मुख्य कदम
- समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) का गठन: यह समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने और निर्यात सुलभ बनाने के लिए लिए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत गठित विशेष संस्था है।
- प्रमुख योजनाएं: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY); मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF), आदि।
- अन्य कदम: समुद्री खाद्य प्रसंस्करण में उपयोग की जाने वाली कुछ विशिष्ट पदार्थों पर शुल्क-मुक्त आयात सीमा को बढ़ाया गया; शफरी (SHAPHARI) प्रमाणन की शुरुआत, आदि।