हाल ही में भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के 'ई-जागृति' प्लेटफॉर्म ने 'राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026' जीता है।
- ई-जागृति एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो पूरे देश के उपभोक्ता आयोगों को कंप्यूटरीकृत करके आपस में जोड़ता है, ताकि उपभोक्ता विवादों का निस्तारण पारदर्शी व कुशल तरीके से और तेजी से हो सके।
ई-गवर्नेंस के बारे में
- ई-गवर्नेंस से आशय शासन और लोक प्रशासन में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग से है।
- इसका उद्देश्य शासन व्यवस्था में दक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही, उत्तरदायित्व/प्रतिक्रियाशीलता तथा नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
भारत में ई-गवर्नेंस की परिवर्तनकारी भूमिका
- सेवा-प्रदायगी में सुधार: सरकारी सेवाओं तक तेज, सुगम और किसी भी समय पहुँच सुनिश्चित करता है।
- उदाहरण के लिए: उमंग (UMANG) – विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल और ऑडिट योग्य प्रक्रियाओं के माध्यम से भ्रष्टाचार को कम करता है।
- उदाहरण के लिए: गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) – सरकारी खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला मंच।
- वित्तीय समावेशन: डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं तक व्यापक पहुंच प्रदान करता है।
- उदाहरण के लिए: UPI – त्वरित और कैशलेस डिजिटल लेन-देन की सुविधा प्रदान करने वाली प्रणाली।
- नागरिक सशक्तीकरण: शिकायत निवारण और उपभोक्ता संरक्षण को अधिक सरल एवं सुलभ बनाता है।
- उदाहरण के लिए: ई-जागृति– उपभोक्ता को शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करने और उन पर कार्रवाई की प्रगति पर नजर रखने की सुविधा प्रदान करता है।
- सभी व्यक्तियों तक पहुँच: दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं एवं योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करता है।
- उदाहरण के लिए: कॉमन सर्विस केंद्र (CSCs)।
- सरकारी अधिकारियों का क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता में सुधार करता है।
- उदाहरण के लिए: iGOT कर्मयोगी – सिविल सेवकों के प्रशिक्षण एवं कार्यकुशलता वृद्धि हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- नागरिकों की भागीदारी: नीति-निर्माण और शासन प्रक्रियाओं में जनता की सहभागिता को बढ़ावा देता है।
- उदाहरण के लिए: MyGov – नागरिकों को सुझाव, विचार और प्रतिक्रिया देने का मंच प्रदान करता है।
