प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के बारे में
- प्रारंभ: वर्ष 2016 में;
- क्रियान्वयन: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ' राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन' के माध्यम से;
- उद्देश्य: गर्भवती महिलाओं को प्रसव-पूर्व उच्च गुणवत्ता वाली निःशुल्क स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना, ताकि जोखिमों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार हो सके।
- लक्षित लाभार्थी और प्रदत्त सेवा:
- लाभार्थी: गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही वाली महिलाएं, जिनमें विशेषकर 'उच्च जोखिम' वाले मामलों और नियमित जांच से छूट गई महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
- समय और स्थान: प्रत्येक महीने की 9 तारीख को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
- डॉक्टर स्वयंसेवी प्रणाली: निजी डॉक्टर प्रत्येक महीने की 9 तारीख को स्वेच्छा से सेवाएं देते हैं। उन्हें 'IPledgeFor9' अचीवर्स पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
- समग्र देखभाल: इसमें प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी द्वारा नैदानिक जाँच, प्रयोगशाला परीक्षण (रक्त और मूत्र जाँच), अल्ट्रासोनोग्राफी, दवाइयां तथा पोषण और प्रसव योजना संबंधी आवश्यक परामर्श शामिल हैं।
- विस्तारित PMSMA रणनीति: वर्ष 2022 में अनुवर्ती देखभाल (फॉलो-अप केयर) को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई।
- इसके तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव तक लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाती है। इसके लिए लाभार्थी महिलाओं और आशा कार्यकर्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है तथा एसएमएस अलर्ट प्रणाली का भी उपयोग किया जाता है।
प्रभाव और उपलब्धियां
- अब तक 7.50 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव-पूर्व देखभाल सेवाएं प्रदान की गई हैं।
- मातृ मृत्यु दर (MMR) 2014–16 की 130 प्रति लाख जीवित जन्म से कम होकर 2022–24 में 87 प्रति लाख जीवित जन्म रह गई है।
व्यापक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकरण प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) अन्य प्रमुख सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर मातृत्व स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत प्रणाली बनाता है। अन्य योजनाओं में शामिल हैं:
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