केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने राज्य वित्त आयोगों (SFCs) को सशक्त बनाने के लिए एक सुदृढ़ 'सूचना संरचना' बनाने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य डेटा-आधारित वित्तीय विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देना और जमीनी स्तर पर शासन-संरचना को प्रभावी बनाना है।
राज्य वित्त आयोगों (SFCs) के बारे में
- संवैधानिक प्रावधान: राज्य वित्त आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत गठित संवैधानिक निकाय हैं।
- मुख्य कार्य: इनका मुख्य कार्य राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच राज्य के राजस्वों के वितरण की सिफारिश करना है।
राज्य वित्त आयोगों के समक्ष प्रमुख चुनौतियां
- अलग-अलग डेटा संग्रह: डेटा अलग-अलग संगठनों के पास होने और इन संगठनों में समन्वय न होने के कारण स्थानीय निकायों के प्रदर्शन की समग्र जानकारी नहीं मिल पाती।
- क्षेत्रकवार डेटा का अभाव: पंचायत स्तर और क्षेत्रक-वार व्ययों के सटीक डेटा की कमी के कारण स्थानीय निकायों के प्रदर्शन-आधारित वित्तीय विश्लेषण करना मुश्किल होता है।
- गैर-मानक लेखा: राज्यों में अलग-अलग लेखा प्रणालियां होने और समेकित वित्तीय विवरणों की कमी के कारण राज्यों के बीच तुलना करना कठिन हो जाता है।
- क्षमता की कमी: जमीनी स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी के कारण डिजिटल रूप में डेटा का रखरखाव और प्रबंधन ठीक से नहीं हो पाते।
- अन्य: राज्य वित्त आयोगों के गठन में देरी की जाती है और वित्तीय अधिकारों के हस्तांतरण में भी कोताही बरती जाती है।
प्रमुख सिफारिशें
- प्रदर्शन का लेखा-परीक्षण (ऑडिट): राज्यों में 73वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा लेखा-परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय निकायों को वास्तविक रूप से दिए गए अधिकारों और संसाधनों का आकलन किया जा सके।
- स्थायी राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठ: राज्यों को वित्तीय डेटा को लगातार अद्यतन रखने के लिए विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने चाहिए।
- मानकीकृत लेखा: स्थानीय निकायों को होने वाले हस्तांतरण के लिए एक समान लेखा प्रणाली लागू की जाएं और एक साझा रिपोर्टिंग प्रारूप अपनाया जाए, ताकि राज्यों के बीच एकरूपता स्थापित हो सके और उनके डेटा की आपस में तुलना की जा सके।
- व्यवस्थित प्रदर्शन संकेतक: 'पंचायत उन्नति सूचकांक' (Panchayat Advancement Index) के मानकों को "आवश्यकता (Needs)", "प्रदर्शन (Performance)" और "समानता (Equity)" श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाए, ताकि वित्तीय आवंटन के फार्मूले को और अधिक सटीक बनाया जा सके।