नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट "भारत में डिजिटल समावेशन का विकसित होता परिदृश्य" (Evolving Landscape of Digital Inclusion in India) इस तथ्य को रेखांकित करती है कि वर्ष 2025 तक भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 1 अरब से अधिक हो जाने के बावजूद, देश में कई प्रकार के परस्पर संबद्ध डिजिटल डिवाइड अब भी मौजूद हैं।
भारत में छिपे हुए डिजिटल डिवाइड के बारे में
- डिजिटल डिवाइस के स्तर पर अंतराल: रिपोर्ट के अनुसार 95% परिवारों के पास मोबाइल फोन तो है, लेकिन केवल 8% के पास कंप्यूटर या लैपटॉप है। इससे इंटरनेट का उपयोग केवल 'मोबाइल तक सीमित' रह जाता है, जो उत्पादकता को कम करता है।
- कनेक्टिविटी के स्तर पर अंतराल: इंटरनेट के व्यापक प्रसार के बावजूद, 27.5% भारतीय परिवार पूरी तरह से ऑफलाइन हैं। यह अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 32.2% और शहरी क्षेत्रों में 17.2% है।
- उपयोग में असंतुलन: इंटरनेट का उपयोग मुख्य रूप से मनोरंजन (66%) और सोशल मीडिया (53.8%) के लिए किया जाता है, जबकि शिक्षा (16.1%) और सरकारी सेवाओं (11.4%) के लिए इसका उपयोग अपेक्षाकृत कम है।
- उपयोग के लिए निर्भरता: 20.4% परिवारों को डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने के लिए दूसरों की सहायता की आवश्यकता पड़ती है।
- जनसांख्यिकीय स्तर पर डिजिटल डिवाइड:
- लैंगिक स्तर पर: कामकाजी उम्र की केवल 35.6% महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह अनुपात 57.6% है।
- आयु के स्तर पर: वृद्धजनों (60 वर्ष से अधिक उम्र) में से केवल 9.4% लोग ऑनलाइन सक्रिय हैं।
रिपोर्ट में की गईं नीतिगत सिफारिशें
- बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना: किफायती ब्रॉडबैंड और पब्लिक वाई-फाई का विस्तार करना चाहिए ताकि ऑफलाइन आबादी को इंटरनेट से जोड़ा जा सके तथा मोबाइल का उपयोग केवल मनोरंजन उद्देश्यों से नहीं बल्कि डिजिटल सेवाओं की प्राप्ति के लिए किया जा सके।
- अगली पीढ़ी में निवेश: डिजिटल असमानता के अगली पीढ़ी तक पहुँचने से रोकने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में डिजिटल साक्षरता को शामिल करना चाहिए और माता-पिता की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- बुजुर्गों के लिए डिजिटल सहायता: समुदाय-आधारित डिजिटल सेवा केंद्र खोलने चाहिए तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरल व स्थानीय भाषाओं में डिजिटल इंटरफेस विकसित किए जाएं, ताकि वे कल्याणकारी लाभों से वंचित न रहें।
- लैंगिक स्तर पर अंतराल को कम करना: केवल परिवार स्तर पर डिजिटल पहुँच को मापने के बजाय परिवार के भीतर मौजूद असमानताओं पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों की महिलाओं को डिजिटल संसाधनों तक स्वतंत्र पहुँच और उपयोग सुनिश्चित हो सके।