लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (भूमि पत्तन प्रबंधन प्रणाली) को स्मार्ट बॉर्डर्स पहल के तहत शुरू किया गया है।
- इसका उद्देश्य भारत के भूमि पत्तनों (Land Ports) के लिए डिजिटल, एकीकृत और रियल-टाइम प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है।
- भूमि पत्तन यानी लैंड पोर्ट्स भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सड़क या रेल मार्ग में स्थित एक निर्दिष्ट क्षेत्र होता है, जिसे सीमा शुल्क तथा आव्रजन जांच चौकी के रूप में अधिसूचित किया जाता है।
लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (विनिमय):
- LPMS, भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI) द्वारा विकसित एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य कार्गो प्रबंधन और यात्रियों की आवाजाही के संचालन को व्यवस्थित और एकीकृत करना है।
- भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
- LPAI का उद्देश्य भारत की स्थलीय सीमाओं पर एकीकृत जांच चौकियों (ICPs) तथा सीमा अवसंरचना का विकास, प्रबंधन और आधुनिकीकरण करना है।
- प्रमुख विशेषताएं:
- एकल इलेक्ट्रॉनिक विंडो और रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, BSF और अन्य एजेंसियों के साथ एकीकरण)।
पर्यावरण (संरक्षण) द्वितीय संशोधन नियम, 2025 के अनुसार, झिल्ली कोशिका प्रौद्योगिकी (मेंब्रेन सेल टेक्नोलॉजी) का उपयोग करने वाले कास्टिक सोडा संयंत्रों के लिए नए मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
- इन नियमों के तहत, अपशिष्ट जल की विषाक्तता का आकलन करने हेतु प्रयोगशाला-आधारित जैव-परीक्षण (Bioassay Testing) अनिवार्य किया गया है।
- इस परीक्षण के दौरान संयंत्रों को मछली-जीवितता परीक्षण (Fish Survival Test) सफलतापूर्वक पास करना होगा।
- बायोएसे परीक्षण का उद्देश्य अपशिष्ट जल की संयुक्त विषाक्तता को मापना है।
मेंब्रेन सेल टेक्नोलॉजी (MCT) के बारे में:
- MCT में रासायनिक प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष झिल्ली का उपयोग किया जाता है और इसे पुरानी पारा-आधारित प्रक्रियाओं की तुलना में कम प्रदूषणकारी माना जाता है।
कास्टिक सोडा के बारे में:
- कास्टिक सोडा, जिसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड भी कहा जाता है, भारत में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले औद्योगिक रसायनों में से एक है।
- इसका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट, कागज, वस्त्र, एल्यूमीनियम, पेट्रोकेमिकल्स और जल शोधन जैसे उद्योगों में किया जाता है।
उच्चतम न्यायालय ने माना कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (IBC) और उच्चतम न्यायालय की नियमावली (SCR) के बीच टकराव की स्थिति में, IBC के प्रावधान मान्य होंगे।
दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के बारे में:
- इसे व्यक्तियों, कॉर्पोरेट व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के मामलों के पुनर्गठन और दिवाला-समाधान से संबंधित कानूनों को समेकित करने और समयबद्ध दिवाला समाधान हेतु लागू की गई थी।
- IBC संहिता के चार स्तंभ:
- भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (विनियामक)
- दिवाला-समाधान पेशेवर (समाधान प्रक्रिया का प्रबंधन)
- सूचना उपयोगिताएं (वित्तीय डेटा का भंडारण और प्रमाणीकरण)
- न्याय-निर्णय प्राधिकरण -
- राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT): कंपनियों/सीमित देयता भागीदारी (LLP) के लिए और
- ऋण वसूली अधिकरण (DRT): व्यक्तियों/साझेदारी से संबंधित मामलों के लिए)
Article Sources
1 sourceरक्षा मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश में खाली रक्षा भूमि पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) सहित अपनी पहली 250 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी दी है।
BESS के बारे में:
- यह एक विद्युत-रासायनिक प्रणाली है, जो अतिरिक्त विद्युत ऊर्जा को भंडारित करती है और आवश्यकता पड़ने पर बाद में उपयोग के लिए उपलब्ध कराती है।
- BESS के प्रकार:
- सॉलिड रिचार्जेबल बैटरी: यह ठोस इलेक्ट्रोड (जैसे- लिथियम-आयन, लेड-एसिड, जिंक-एयर) में ऊर्जा भंडारित करती हैं।
- फ्लो बैटरी: ये ऊर्जा को तरल इलेक्ट्रोलाइट के रूप में अलग-अलग टैंकों में भंडारित करती हैं, जिन्हें बैटरी प्रणाली के माध्यम से प्रवाहित किया जाता है।
- उदाहरण के लिए: वैनेडियम रेडॉक्स बैटरी, जिंक-आयरन बैटरी तथा जिंक-ब्रोमीन बैटरी।
- इसे वितरित ऊर्जा संसाधनों (Distributed Energy Resources) में से एक माना जाता है।
- ‘वितरित ऊर्जा संसाधन’ लघु, मॉड्यूलर, विकेंद्रीकृत विद्युत-उत्पादक प्रणालियां हैं जो ऊर्जा उपयोग स्थल के निकट स्थित होती हैं।
- ‘वितरित ऊर्जा संसाधन’ के अन्य उदाहरण: फिक्स्ड बायोमास जनरेटर, ईंधन सेल (फ्यूल सेल), और रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक इकाइयां।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधान मंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं।
- इस उपलब्धि के साथ उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
भारत के प्रधानमंत्री के बारे में:
- नियुक्ति और कार्य (अनुच्छेद 75): प्रधान मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। हालांकि, प्रधान मंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका है तथा वह सरकार का प्रमुख होता है।
- सलाहकारी कर्तव्य (अनुच्छेद 74): वे विभिन्न मामलों पर राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने वाले मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं।
- संवाद सेतु: प्रधान मंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच प्रमुख संवाद सेतु के रूप में कार्य करता है। वह महत्वपूर्ण नियुक्तियों, संसद के सत्र बुलाने तथा लोकसभा के विघटन जैसे महत्त्वपूर्ण मामलों पर राष्ट्रपति को सलाह देता है।
- अध्यक्षता: वे नीति आयोग, राष्ट्रीय एकता परिषद, अंतर-राज्य परिषद आदि के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
हाल ही में दिल्ली में प्रबल धूल भरी आंधी (Dust storms) दर्ज की गई।
धूल भरी आंधी के बारे में:
- धूल भरी आंधी धूल, मिट्टी और अन्य सूक्ष्म कणों की एक विशाल दीवार होती है, जो प्रायः तड़ितझंझा (Thunderstorms) से उत्पन्न प्रबल पवनों द्वारा किसी क्षेत्र में उड़ाकर लाई जाती है।
- धूल की यह दीवार मीलों लंबी और कई हजार फीट ऊंची हो सकती है।
- धूल भरी आंधियां, प्रायः शुष्क, रेगिस्तानी क्षेत्रों में शुरू होती हैं लेकिन इनका प्रभाव उनके स्रोत से बहुत दूर तक देखा जा सकता है।
- उत्तर-पश्चिम भारत में संवहनीय धूल भरी आंधियां आती हैं, जिन्हें स्थानीय रूप से "आंधी" कहा जाता है। ये मुख्य रूप से मानसून पूर्व मौसम (मार्च-मई) के दौरान आती हैं, जिनकी आवृत्ति मई में सबसे अधिक होती है।
- सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र: राजस्थान, इसके बाद हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।
- धूल भरी आंधी और वायुमंडल:
- धूल वायुमंडलीय एयरोसोल का एक प्रमुख घटक है।
- धूल के कण वायुमंडलीय गतिकी, बादलों के निर्माण तथा वर्षण से संबंधित प्रतिपुष्टि प्रक्रियाओं के माध्यम से मौसम को भी महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं।
केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने कोयला एक्सचेंज शुरू करने के लिए कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 को अधिसूचित किया। इसका उद्देश्य कोयला के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लाना और उचित मूल्य प्राप्त करना है।
- हाल ही में लागू खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 ने 'खनिज एक्सचेंज' की अवधारणा प्रस्तुत की है।
कोयला एक्सचेंज के बारे में:
- अर्थ: यह एक प्रकार का खनिज एक्सचेंज है, जहां कोयले के खरीदार और विक्रेता एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लेनदेन, व्यापार और अनुबंध करते हैं।
- कोयला एक्सचेंज के लिए पात्रता:
- कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत कंपनी होनी चाहिए।
- आवेदक डीम्युचुअलाइज्ड होना चाहिए (अर्थात, आवेदक का स्वामित्व और प्रबंधन उसके व्यापारिक अधिकारों से अलग हो)।
- निवल संपत्ति, 50 करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिए।
- महत्व: 'वन-टू-मेनी' (एक से अनेक) से 'मेनी-टू-मेनी' (अनेक से अनेक) तक कई बिक्री चैनलों को सक्रिय करके यह कोयला विपणन में एक बड़ा बदलाव लाएगा।
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार डार्क पैटर्न के कारण ऑनलाइन खरीदारी करने वाले भारतीयों को प्रतिवर्ष भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
डार्क पैटर्न्स के बारे में:
- अर्थ: डार्क पैटर्न्स ऐसे भ्रामक डिज़ाइन या तकनीकें हैं, जिनका उपयोग किसी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के यूजर इंटरफेस (UI) या यूजर एक्सपीरियंस (UX) में किया जाता है।
- इनका उद्देश्य उपयोग करने वालों को गुमराह करना या ऐसी कार्यवाही करने के लिए प्रेरित करना होता है, जिसे वे मूल रूप से करना नहीं चाहते थे या करने का इरादा नहीं रखते थे।
- डार्क पैटर्न्स के प्रमुख उदाहरण:
- बास्केट स्नीकिंग: चेकआउट के दौरान स्वतः दान आदि का जुड़ जाना।
- कन्फर्म शेमिंग: उपयोगकर्ताओं को दान या अतिरिक्त शुल्क की उपेक्षा करने से हतोत्साहित करने वाले भावनात्मक संदेश।
- फोर्स्ड एक्शन: उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत जानकारी साझा करने करके सब्सक्रिप्शन के लिए मजबूर करना।
- विनियमन: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत डार्क पैटर्न निवारण और विनियमन दिशा-निर्देश 2023 जारी किए।