16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के बाद, केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से हीटवेव (लू) और आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) को अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल कर दिया है।
प्राकृतिक आपदाओं की सूची के बारे में
- सांविधिक रूपरेखा: प्राकृतिक आपदाओं की सूची आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत बनाई जाती है। इसी के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) और राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से राहत सहायता दी जाती है।
- अधिसूचित प्रविष्टियां: इस सूची में अब कुल 14 आपदाएं अधिसूचित हैं। इनमें चक्रवात, सूखा, भूकंप, बाढ़, सुनामी, हिमस्खलन, बादल फटना, भूस्खलन, ओलावृष्टि, आगजनी, पाला/शीतलहर, कीट हमले का प्रकोप, लू (हीटवेव) और आकाशीय बिजली शामिल हैं।
सूची में शामिल नई आपदाओं के बारे में
- हीटवेव या लू: भारत मौसम-विज्ञान विभाग (IMD) हीटवेव या लू की घोषणा तब करता है जब मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40°C या उससे अधिक हो, या पहाड़ी क्षेत्रों में 30°C या उससे अधिक हो, तथा तापमान में सामान्य से 4.5°C या अधिक की वृद्धि हो जाए।
- मार्च 2026 से अब तक देशभर में 4,853 लू के मामले दर्ज किए गए हैं।
- आकाशीय बिजली: यह वायुमंडल में अचानक होने वाला तेज विद्युत निर्वहन (बिजली का चमकना) है, जो भारत में मौसम से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है।
नई आपदाओं को शामिल करने का महत्व:
- राहत कार्यों के लिए अधिक फंड उपलब्ध होगा: अब राज्य सरकारें SDRF के मुख्य 80% फंड का उपयोग लू और बिजली गिरने से प्रभावित लोगों को राहत देने में कर सकेंगी। पहले इन्हें सूचीबद्ध आपदाएँ नहीं माना जाता था, इसलिए राहत कार्यों पर केवल सीमित (10%) राशि ही खर्च की जा सकती थी।
- रोकथाम के उपायों को बढ़ावा: अब राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के 20% फंड का उपयोग जलवायु अनुकूल अवसंरचना विकसित करने के लिए किया जा सकेगा।
- पूरे देश में एक समान व्यवस्था: अब सभी राज्यों में राहत, सहायता और केंद्र सरकार के सहयोग के लिए एक समान नीति लागू होगी।
लू और बिजली गिरने से जैसी आपदाओं से निपटने के प्रमुख तंत्र
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