भारत ने भगोड़े अपराधियों (Fugitive Criminals) के खिलाफ कार्रवाई को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए खुफिया-आधारित, प्रौद्योगिकी-संचालित और मिशन मोड की रणनीति अपनाई है।
- भगोड़ा अपराधी कौन होता है? ऐसा व्यक्ति, जिस पर किसी अन्य देश में प्रत्यर्पण योग्य अपराध का आरोप हो या जिसे उस अपराध में दोषी ठहराया गया हो। इसमें वह व्यक्ति भी शामिल है जो भारत में रहते हुए किसी अन्य देश में होने वाले ऐसे अपराध की साजिश रचे, अपराध करने का प्रयास करे, अपराध के लिए उकसाए या सह-अपराधी के रूप में भाग ले।
- 2019 से 2026 के बीच भारत 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में सफल रहा है।
भगोड़े अपराधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में भारत के कदम

- विधिक उपाय:
- भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018: आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वाले अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान करता है।
- विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम [UAPA] एवं NIA (संशोधन) अधिनियम, 2019: इन कानूनों के द्वारा व्यक्तिगत आतंकवादियों, उनके संचालकों, विदेशी फंडिंग नेटवर्क तथा विदेश स्थित सहयोग तंत्र के विरुद्ध कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023: धारा 355 और 356 के तहत विदेश में छिपे भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध अनुपस्थिति में अभियोजन चलाने का प्रावधान किया गया है।
- धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) को सख्ती से लागू करना: धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और अपराध से अर्जित संपत्तियों के विरुद्ध अधिक प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
प्रौद्योगिकी और आधुनिक संचालन
- भारतपोल/BHARATPOL (2025): यह CBI, राज्य पुलिस, जिला पुलिस और इंटरपोल को एक ही डिजिटल मंच पर जोड़ता है। इससे सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान संभव हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया का समय घटकर 3–10 दिन रह गया है।
- ऑपरेशन त्रिशूल: भगोड़े अपराधियों का पता लगाने के लिए उपग्रह से प्राप्त जानकारी, निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण और प्रोफाइल मैपिंग का उपयोग किया जाता है। यह अभियान फर्जी पहचान का उपयोग कर छिपे अपराधियों का पता लगाने में मदद करता है।