विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने "अनुसंधान और विकास सांख्यिकी 2025-26" रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • वैज्ञानिक प्रकाशनों में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर और निवासी पेटेंट दाखिल करने में छठे स्थान पर है, और 2023-24 में जीईआरडी जीडीपी का 0.84% ​​तक पहुंच जाएगा।
  • निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास निवेश में 45.2% की वृद्धि हुई है, जिसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियां व्यावसायिक अनुसंधान एवं विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं; अनुसंधान एवं विकास कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 29% है।
  • सिफारिशों में जीडीपी के 2% तक जीईआरडी को बढ़ाना, निजी अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना, लैंगिक समावेशन को बढ़ावा देना और मानव पूंजी को मजबूत करना शामिल है।

In Summary

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • वैश्विक अनुसंधान में भारत की स्थिति:
    • वर्ष 2022 में वैज्ञानिक शोध प्रकाशनों के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर था, जबकि चीन प्रथम और अमेरिका दूसरे स्थान पर था।
  • वर्ष 2024-25 में भारत में 1.10 लाख पेटेंट आवेदन दायर किए गए, जिनमें से 62% भारतीय निवासियों द्वारा दायर किए गए।
  • भारतीय पेटेंट कार्यालय, निवासियों द्वारा दायर पेटेंट आवेदनों के आधार पर विश्व में छठे स्थान पर है।
  • सकल अनुसंधान एवं विकास पर व्यय (GERD) में वृद्धि: 
    • अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय 2020-21 में GDP का 0.64% था, जो बढ़कर वर्ष 2023-24 में GDP का 0.84% हो गया।
    • कुल R&D व्यय 2013-14 के ₹79,356 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹2.45 लाख करोड़ हो गया, अर्थात् यह तीन गुना से अधिक बढ़ा है।
  • निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी: 
    • R&D में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 2020-21 में 32.2% थी, जो बढ़कर 2023-24 में 45.2% हो गई।
    • परिवहन, औषध, जैव प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्रक R&D में सबसे अधिक निवेश करने वाले क्षेत्रक बनकर उभरे हैं।
    • बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का व्यवसायिक R&D में योगदान 2023-24 में 71.3% रहा, जो 2020-21 में 49.9% था। 
  • मानव पूंजी/संसाधन:
    • भारत में लगभग 5 लाख पूर्णकालिक शोधकर्ता हैं।
    • प्रति 10 लाख (1 मिलियन) जनसंख्या पर 354 शोधकर्ता उपलब्ध हैं।
    • R&D कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 2020-21 की 18.6% से बढ़कर 2023-24 में 29% हो गई। 

आगे की राह

  • R&D पर व्यय बढ़ाने की जरुरत है: GERD को निकट अवधि में बढाकर GDP के 1% से अधिक करने तथा लंबे समय में बढ़ाकर 2% करने का लक्ष्य होना चाहिए।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ानी चाहिए: MSME तथा अन्य कंपनियों को R&D में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी चाहिए: उद्योग आधारित अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष नीतियाँ बनाई जाएँ।
  • मानव संसाधन को दक्ष और कुशल बनाना चाहिए:  STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा को बेहतर बनाया जाए। साथ ही, शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए डॉक्टोरल फेलोशिप की संख्या बढ़ाई जाए।
  • बाह्य वित्तपोषण बढ़ाना चाहिए: प्रतिस्पर्धी अनुसंधान अनुदान बढ़ाया जाए। साथ ही, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढाकर शोध को नवाचार और व्यावसायीकरण में उपयोग किया जाए।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • वैश्विक अनुसंधान में भारत की स्थिति:
    • वर्ष 2022 में वैज्ञानिक शोध प्रकाशनों के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर था, जबकि चीन प्रथम और अमेरिका दूसरे स्थान पर था।
    • वर्ष 2024-25 में भारत में 1.10 लाख पेटेंट आवेदन दायर किए गए, जिनमें से 62% भारतीय निवासियों द्वारा दायर किए गए।
    • भारतीय पेटेंट कार्यालय, निवासियों द्वारा दायर पेटेंट आवेदनों के आधार पर विश्व में छठे स्थान पर है।
  • सकल अनुसंधान एवं विकास पर व्यय (GERD) में वृद्धि: 
    • अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय 2020-21 में GDP का 0.64% था, जो बढ़कर वर्ष 2023-24 में GDP का 0.84% हो गया।
    • कुल R&D व्यय 2013-14 के ₹79,356 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹2.45 लाख करोड़ हो गया, अर्थात् यह तीन गुना से अधिक बढ़ा है।
  • निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी: 
    • R&D में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 2020-21 में 32.2% थी, जो बढ़कर 2023-24 में 45.2% हो गई।
    • परिवहन, औषध, जैव प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्रक R&D में सबसे अधिक निवेश करने वाले क्षेत्रक बनकर उभरे हैं।
    • बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का व्यवसायिक R&D में योगदान 2023-24 में 71.3% रहा, जो 2020-21 में 49.9% था। 
  • मानव पूंजी/संसाधन:
    • भारत में लगभग 5 लाख पूर्णकालिक शोधकर्ता हैं।
    • प्रति 10 लाख (1 मिलियन) जनसंख्या पर 354 शोधकर्ता उपलब्ध हैं।
    • R&D कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 2020-21 की 18.6% से बढ़कर 2023-24 में 29% हो गई। 

आगे की राह

  • R&D पर व्यय बढ़ाने की जरुरत है: GERD को निकट अवधि में बढाकर GDP के 1% से अधिक करने तथा लंबे समय में बढ़ाकर 2% करने का लक्ष्य होना चाहिए।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ानी चाहिए: MSME तथा अन्य कंपनियों को R&D में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी चाहिए: उद्योग आधारित अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष नीतियाँ बनाई जाएँ।
  • मानव संसाधन को दक्ष और कुशल बनाना चाहिए:  STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा को बेहतर बनाया जाए। साथ ही, शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए डॉक्टोरल फेलोशिप की संख्या बढ़ाई जाए।
  • बाह्य वित्तपोषण बढ़ाना चाहिए: प्रतिस्पर्धी अनुसंधान अनुदान बढ़ाया जाए। साथ ही, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढाकर शोध को नवाचार और व्यावसायीकरण में उपयोग किया जाए।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

Doctoral Fellowship

A doctoral fellowship is financial support provided to students pursuing doctoral degrees (Ph.D.). Increasing the number of these fellowships can encourage more individuals to engage in advanced research and contribute to the pool of researchers.

STEM

Acronym for Science, Technology, Engineering, and Mathematics. These fields are crucial for innovation and economic development.

MSME

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (Micro, Small and Medium Enterprises) भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। निर्यात संवर्धन में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भाग लेने और प्रक्रियाओं को समझने में सहायता की आवश्यकता होती है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet