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वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CONVENTION ON INTERNATIONAL TRADE IN ENDANGERED SPECIES OF WILD FLORA AND FAUNA - CITES)

28 Jan 2026
1 min

In Summary

  • समरकंद में आयोजित सीआईटीईएस की 20वीं सह-अनुभागिता में शार्क और रे सहित 77 प्रजातियों को इसके परिशिष्टों में जोड़ा गया।
  • भारत ने गुग्गुल को परिशिष्ट II में सूचीबद्ध करने का विरोध किया और अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ अपने संवैधानिक, कानूनी और संस्थागत उपायों पर प्रकाश डाला।
  • लागत और परिचालन संबंधी चिंताओं के कारण सम्मेलन ने मानवीय आयामों (पीएलएफएफ) को शामिल करने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया, लेकिन सीआईटीईएस के लिए बजट में वृद्धि को मंजूरी दे दी।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, CITES के पक्षकारों का 20वां सम्मेलन (CoP-20) उज्बेकिस्तान के समरकंद में संपन्न हुआ। यह मध्य एशिया में आयोजित होने वाला पहला CITES -CoP था।

CoP-20 के प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर

  • नई शामिल की गई प्रजातियां: कुल मिलाकर, 77 प्रजातियों को CITES के परिशिष्टों में शामिल किया गया है।
    • शामिल महत्वपूर्ण प्रजातियां: परिशिष्ट I में ओशनिक व्हाइटटिप शार्क, व्हेल शार्क, मंटा और डेविल रे की सभी उप-प्रजातियां, गैलापागोस लैंड इगुआना की तीनों उप-प्रजातियां, गैलापागोस समुद्री इगुआना और होम के हिंज-बैक कछुए को शामिल किया गया है।
  • भारत की भूमिका: भारत ने 'गुग्गुल' (कमिफोरा विटाई) को परिशिष्ट II में सूचीबद्ध करने के यूरोपीय संघ के प्रस्ताव का सफलतापूर्वक विरोध किया, और तर्क दिया कि पहले इसकी समष्टि (संख्या) का व्यापक रूप से आकलन किया जाना चाहिए।
  • वनस्पतियों और जीवों के पारितंत्र में रहने वाले लोग (PLFF): अभिसमय में PLFF सहित मानवीय आयामों को शामिल करने के प्रयासों को लागत संबंधी चिंताओं, परिचालन संबंधी प्रभावों और कार्यों के दोहराव के कारण खारिज कर दिया गया।
  • CITES के बजट में वृद्धि: 2026-2028 के लिए CITES के बजट में 6.98% की वृद्धि करने के ब्राजील, सेनेगल और मैक्सिको के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया।

CITES के बारे में

  • शुरुआत: इस अभिसमय के मसौदे पर 1973 में वाशिंगटन, डी.सी. (अमेरिका) में पूर्ण अधिकार प्राप्त सम्मेलन में सहमति बनी थी, और इसे 3 मार्च, 1973 से हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया गया था। अब इस तिथि को 'संयुक्त राष्ट्र विश्व वन्यजीव दिवस' के रूप में मनाया जाता है)।
    • 1 जुलाई, 1975 को CITES लागू हुआ।
  • उद्देश्य: सरकारों के बीच एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जंगली जानवरों और वनस्पतियों के नमूनों (प्रजातियों) के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से उनके अस्तित्व को खतरा न हो।
  • स्वरूप: CITES एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसमें देश और प्रादेशिक क्षेत्र समूह स्वेच्छा से शामिल हो सकते हैं।
    • एक बार जब कोई देश इसका पक्षकार बन जाता है, तो उसके लिए CITES के नियमों का पालन करना कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है।
    • CITES एक रूपरेखा प्रदान करता है जिसका प्रत्येक पक्षकार को पालन करना होता है, और इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के लिए अपना घरेलू कानून बनाना होता है।
  • सचिवालय: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का कार्यकारी निदेशक इसके सचिवालय के रूप में कार्य करता है।
  • सदस्य: 185 पक्षकार (भारत इसका पक्षकार है)।
  • CITES परिशिष्ट: प्रजातियों को उनके संरक्षण के स्तर के आधार पर तीन परिशिष्टों में सूचीबद्ध किया गया है।

वन्यजीव के अवैध व्यापार को रोकने की दिशा में भारत की पहलें

  • संवैधानिक प्रावधान: भारत के संविधान के अनुच्छेद 51(A)(g) भारत के नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने और सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया रखने का मूल कर्तव्य निर्धारित करता है। अनुच्छेद 48A राज्य (सरकार) को राज्य को पर्यावरण के संरक्षण, सुधार और देश के वनों तथा वन्यजीवों की सुरक्षा का निर्देश देता है।
  • विधिक ढांचा: वन्यजीवों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में संशोधन किए जाते हैं।
    • अधिनियम में CITES के प्रावधानों को शामिल किया गया है।
  • संस्थागत: वन्यजीवों और उनके उत्पादों के अवैध व्यापार पर नियंत्रण के लिए वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB); राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई है।
    • WCCB, संवेदीकरण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता है और इंटरपोल (INTERPOL) के समन्वय में आयोजित वैश्विक अभियानों में भाग लेता है।
  • योजना: 'वन्यजीव पर्यावासों का एकीकृत विकास' के लिए केंद्र प्रायोजित योजना, वन्यजीवों और उनके पर्यावासों के संरक्षण के लिए राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

 

 

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A statutory body under the Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India, which was established in 2006 for strengthening tiger conservation.

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