विश्व बैंक समूह द्वारा “स्टेट एंड ट्रेंड्स ऑफ कार्बन प्राइसिंग, 2025” रिपोर्ट जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS
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रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशनल कार्बन प्राइसिंग (CP) साधनों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। यह संख्या 2005 में 5 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 80 हो गई है। भारत, ब्राजील और तुर्की इन्हें सक्रिय रूप से विकसित कर रहे हैं।

रिपोर्ट में प्रकाशित मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • कवरेज: कार्बन प्राइसिंग वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन का लगभग 28% कवर करता है। इसमें 43 कार्बन टैक्स और 37 उत्सर्जन व्यापार प्रणालियां (ETSs) शामिल हैं।
  • राजस्व सृजन: वैश्विक स्तर पर, 2024 में उत्सर्जन व्यापार प्रणालियों और कार्बन टैक्स से सार्वजनिक बजट के लिए 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई थी।
  • क्षेत्रकवार कवरेज: विद्युत क्षेत्रक के बाद उद्योग क्षेत्रक में सबसे अधिक कवरेज है।
    • कृषि और अपशिष्ट पर अभी भी काफी हद तक ध्यान नहीं दिया गया है।
  • कार्बन क्रेडिट की आपूर्ति बनाम मांग: वर्ष 2024 में वैश्विक स्तर पर कार्बन क्रेडिट की आपूर्ति मांग से ज़्यादा रही, जिसमें लगभग 1 अरब टन अप्रयुक्त क्रेडिट (unretired credits) मौजूद थे।

कार्बन प्राइसिंग (CP) के संबंध में प्रमुख प्रावधान

वैश्विक

  • पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 (COP-21, UNFCCC): यह अनुच्छेद सहयोगात्मक कार्बन मूल्य निर्धारण पद्धतियों की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को सुविधाजनक बनाने के लिए आधार प्रदान करता है।
    • जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) ने COP-29 में अनुच्छेद 6.2 और अनुच्छेद 6.4 के लिए अंतिम नियमों को अपनाया था। 
      • COP-29 अजरबैजान के बाकू में आयोजित किया गया था। 
      • अनुच्छेद 6.2: सहयोगात्मक उपाय तथा 
      • अनुच्छेद 6.4: पेरिस समझौते का क्रेडिट तंत्र। 
  • कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM): यह आयातित उत्पादों से होने वाले उत्सर्जन पर सीमा पर कार्बन मूल्य लागू करता है। जैसे– यूरोपीय संघ (EU) का CBAM. 

भारत

  • कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (2023): यह योजना दो तरह के तंत्रों का प्रावधान करती है। 
    • अनुपालन तंत्र: यह उन बाध्य संस्थाओं के लिए है, जो GHG उत्सर्जन तीव्रता में कमी संबंधी निर्धारित मानदंडों का पालन करके कार्बन क्रेडिट प्रमाण-पत्र (CCSs) अर्जित करती हैं।
    • ऑफसेट तंत्र: यह उन गैर-बाध्य संस्थाओं के लिए है, जो ऐसी परियोजनाओं को पंजीकृत करवा सकती हैं, जो उत्सर्जन में कमी या उसे समाप्त कर सकती हैं तथा जिनके बदले में वे CCCs अर्जित कर सकती हैं।
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