गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए मंत्रियों को पद से हटाने से जुड़ा विधेयक संसद की संयुक्त समिति के पास विचार हेतु भेजा गया | Current Affairs | Vision IAS
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हाल ही में, केंद्र सरकार ने गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यकाल के संबंध में मौजूदा कानूनी ढांचे में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए तीन विधेयक पेश किए। इन विधेयकों में शामिल हैं:

  • संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025
  • केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025
  • जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

विधेयक के मुख्य बिंदु और विशेषताएं

  • उद्देश्य: मंत्रियों को हटाने के लिए कानूनी प्रावधान तैयार करना, ताकि संवैधानिक नैतिकता, सुशासन के सिद्धांत और जनता के संवैधानिक भरोसे की रक्षा की जा सके।
  • 130वाँ संशोधन विधेयक: इसमें संविधान के अनुच्छेद 75 (केंद्रीय मंत्रिपरिषद से संबंधित प्रावधान), अनुच्छेद 164 (राज्य मंत्रिपरिषद से संबंधित प्रावधान), और अनुच्छेद 239AA (दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान) में संशोधन का प्रस्ताव है।
  • हटाने का आधार: यदि किसी मंत्री को किसी कानून के तहत अपराध के आरोप में गिरफ्तार कर लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, और वह अपराध पाँच वर्ष या उससे अधिक की सजा योग्य है, तो हटाने की प्रक्रिया लागू होगी।
  • समय सीमा: मंत्री को हटाने या इस्तीफा देने की प्रक्रिया हिरासत में लिए जाने के 31वें दिन से शुरू की जानी चाहिए।
  • हटाने की प्रक्रिया: मंत्रियों को पद से हटाने का अधिकार राष्ट्रपति/राज्यपाल/उपराज्यपाल के पास होगा, लेकिन यह काम प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री की सलाह पर किया जाएगा। यदि मामला प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का है, तो उन्हें गिरफ्तारी या हिरासत के 31वें दिन इस्तीफा देना होगा।
  • हटाने की प्रक्रिया: केंद्रीय मंत्रियों के मामले में, पद से हटाने की सिफारिश प्रधान मंत्री द्वारा राष्ट्रपति को दी जाएगी; राज्य मंत्रियों के मामले में, यह सिफारिश मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल को दी जाएगी; विधान सभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों के मामले में, सिफारिश मुख्यमंत्री द्वारा उप-राज्यपाल को दी जाएगी।
    • प्रधान मंत्री/ मुख्यमंत्री के मामले में किसी सिफारिश की आवश्यकता नहीं होगी। वे स्वयं इस्तीफ़ा दे सकते हैं या फिर हिरासत/ गिरफ्तारी की स्थिति में 31वें दिन के बाद स्वतः पदमुक्त माने जाएंगे।
  • स्वतः पद समाप्ति: अगर 31वें दिन तक आवश्यक कार्रवाई (हटाने की सलाह या स्वयं इस्तीफ़ा) नहीं होती है, तो संबंधित व्यक्ति अगले दिन से मंत्री/ प्रधान मंत्री/ मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रहेगा।
  • पुनर्नियुक्ति: प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को हिरासत से रिहा होने के बाद राष्ट्रपति/ राज्यपाल/ उपराज्यपाल द्वारा दोबारा प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

मंत्रियों को पद से हटाने हेतु मौजूदा प्रावधान

  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 8: यदि किसी विधायक/ सांसद को कुछ आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया जाता है और कम-से-कम दो साल की सजा सुनाई जाती है, तो वह चुनाव लड़ने या पद पर बने रहने के लिए अयोग्य हो जाता है।
  • विधि आयोग (170वीं रिपोर्ट): इसमें सिफारिश की गई थी कि जिन अपराधों में पाँच साल तक की सज़ा हो सकती है, उनमें केवल आरोप तय होना ही अयोग्यता का आधार माना जाना चाहिए।
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