सुर्ख़ियों में क्यों?
हाल ही में, ऊर्जा संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भारत द्वारा स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में तेजी लाने के लिए सौर-ऊर्जा परियोजनाओं से संबंधित कई उपायों की सिफारिश की है।
भारत का सौर ऊर्जा परिदृश्य
- वर्तमान क्षमता: लगभग 129 GW (2025)। लक्ष्य: 2030 तक 292 GW।
- गैर-जीवाश्म आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता, 259 GW को पार कर गई है, जो कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50% से अधिक है (अक्टूबर 2025 तक)।
- वैश्विक स्थिति: सौर ऊर्जा उत्पादन के मामले में भारत विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है (IRENA नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2025 के अनुसार)।
संसदीय समिति के अनुसार सौर ऊर्जा को अपनाने में आने वाली मुख्य चुनौतियां और सिफारिशें
मुख्य चुनौतियां | समिति की प्रमुख सिफारिशें |
क्षेत्रीय असंतुलन | सहायक नीतियों, समय पर केंद्रीय वित्तीय सहायता जारी करने, नियमित निगरानी आदि के माध्यम से कम सौर-ऊर्जा उत्पादन क्षमता एवं कम उत्पादकता वाले राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों की मदद करनी चाहिए। |
भूमि अधिग्रहण से संबंधित चुनौतियां | केंद्र और राज्य स्तर के सभी हितधारकों को शामिल करते हुए 'सिंगल विंडो मंजूरी तंत्र' की स्थापना करना। |
सौर-ऊर्जा योजनाओं के क्रियान्वयन में धीमी प्रगति | समस्याओं की समय पर पहचान करने और उनका समाधान करने के लिए राज्यों और सौर-ऊर्जा परियोजना विकास करने वालों के मध्य बेहतर समन्वय होना चाहिए। |
पारेषण परियोजनाओं में 'राइट ऑफ वे' (RoW) प्रतिपूर्ति का मुद्दा | समिति ने राज्यों से केंद्र के हालिया RoW दिशा-निर्देशों को अपनाने का आग्रह किया। इसमें विवादों को कम करने के लिए बाजार दरों पर प्रतिपूर्ति देने का प्रावधान है—विशेष रूप से टावर-बेस भूमि के लिए 200% और कॉरिडोर क्षेत्रों के लिए 30%। |
वन और वन्य जीव क्षेत्रों में परियोजनाओं की मंजूरी में देरी | विद्युत पारेषण से संबंधित सभी मामलों के लिए एक विशेष पोर्टल बनाना चाहिए। इसमें वन और वन्यजीव क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं की मंजूरी में शामिल सभी संस्थाओं को जोड़ा जाए। |
ऊर्जा भंडारण क्षमता की कमी (भंडारण प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण के संबंध में) | प्रमुख अनुसंधान संस्थानों को विशेष पूंजी अनुदान का प्रावधान करके भंडारण से संबंधित अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना चाहिए। |
सौर ऊर्जा क्षेत्रक में घरेलू स्तर पर विनिर्माण | घरेलू विनिर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए पॉलीसिलिकॉन, इंगोट्स और वेफर्स तथा सोलर ग्लास के लिए एक समर्पित योजना/ कार्यक्रम तैयार करना चाहिए। |
HVDC (हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट) में घरेलू क्षमता का अभाव | विस्तृत योजना तैयार करना चाहिए और HVDC से संबंधित अनुसंधान और विकास के साथ-साथ HVDC तकनीकी से संबंधित जनशक्ति के प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त पूंजी प्रदान उपलब्ध करानी चाहिए। |
कुशल जनशक्ति की आवश्यकता | प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाना, प्रशिक्षण के लिए सार्वजनिक-निजी मॉडल विकसित करना, उद्योग की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण जैसी उपाय करने की आवश्यकता है। |
सौर ऊर्जा अपनाने की दिशा में उठाए गए प्रमुख कदम

- पीएम सूर्य घर: 2024 में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर (छत पर सौर ऊर्जा पैनल की स्थापना) प्रदान करना है।
- दिसंबर 2025 तक लगभग 24 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर को अपनाया है।
- राष्ट्रीय सौर मिशन: बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए भारत की प्रमुख पहल के रूप में 2010 में इसकी शुरुआत की गई।
- सौर पीवी (Solar PV) के लिए उत्पादन-से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना: इसका क्रियान्वयन केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा 'उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम' के तहत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सौर पीवी मॉड्यूल में गीगा वाट (GW) स्तर की विनिर्माण क्षमता हासिल करना है।
- प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना: इसमें तीन घटक शामिल हैं। इसमें सीमित ग्रिड पहुंच वाले क्षेत्रों में स्टैंडअलोन (स्वतंत्र) सौर पंपों की स्थापना शामिल है।
- सोलर पार्क और अल्ट्रा-मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाएं: 31 अक्टूबर 2025 तक, 13 राज्यों में लगभग 40,000 मेगावाट की कुल स्वीकृत क्षमता वाले 55 सोलर पार्कों को मंजूरी दी गई है।
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): इसकी स्थापना भारत और फ्रांस ने की है। यह सौर ऊर्जा में वैश्विक निवेश जुटाने के लिए एक विशेष अंतर-सरकारी संगठन है।
- एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड (OSOWOG): यह विभिन्न देशों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिडों को आपस में जोड़ने पर केंद्रित योजना है।
निष्कर्ष
प्रौद्योगिकी में निरंतर नवाचार, सहायक नीतियों और ग्रिड अवसंरचना में निवेश के साथ, भारत सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी चुनौतियों को दूर कर सकता है। इसके साथ, भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी देश के रूप में उभर सकता है।