भारतीय शोधकर्ताओं ने डिसओबइंड (Disobind) नामक एक ओपन-सोर्स AI टूल विकसित किया है। यह टूल प्रोटीन लैंग्वेज मॉडल्स की मदद से आंतरिक रूप से अव्यवस्थित प्रोटीन (Intrinsically Disordered Proteins: IDPs) के पारस्परिक संपर्क का पूर्वानुमान करता है।
IDPs के बारे में
- IDPs ऐसे लचीले और आकार बदलने वाले प्रोटीन हिस्से होते हैं, जिनकी कोई एक स्थिर संरचना नहीं होती।
- IDPs के कार्य:
- ये स्वस्थ रहने और बीमार करने, दोनों में अहम भूमिका निभाते हैं।
- जैसे कि कोशिकाओं द्वारा एक-दूसरे को संकेत देने और जीन सक्रियता का नियंत्रण में; कैंसर के प्रसार और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों में।
- ये तय करते हैं कि किस जीन को सक्रिय या निष्क्रिय करना है;
- ये प्रोटीन फोल्डिंग और गुणवत्ता नियंत्रण में मदद करते हैं;
- ये प्रोटीनों को कोशिका के अंदर आसानी से कार्य करने में सहायक होते हैं;
- ये आणविक गोंद (Molecular Glue) की तरह कार्य करते हैं, जिससे कोशिका के भीतर अस्थायी लेकिन सटीक संपर्क बन पाते हैं।
- ये स्वस्थ रहने और बीमार करने, दोनों में अहम भूमिका निभाते हैं।
सरकार ने सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार (Sukhatme National Award in Statistics) के लिए नामांकन आमंत्रित किए हैं।
सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार के बारे में
- मंत्रालय: यह पुरस्कार केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा स्थापित किया गया है।
- उद्देश्य: आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली में सुधार करने के लिए बेहतर शोध कार्य और व्यक्तियों द्वारा किए गए योगदान को पुरस्कृत करना।
- पुरस्कार-स्वरूप: प्रशस्ति पत्र, शॉल और स्मृति चिन्ह।
- प्रत्येक दूसरे वर्ष पर: वर्ष 2000 से यह पुरस्कार प्रत्येक दूसरे वर्ष (एक साल छोड़कर) दिया जाता है।
- पात्रता: 45 वर्ष या उससे अधिक आयु के भारतीय सांख्यिकीविद् को सांख्यिकी के क्षेत्र में आजीवन योगदान और उपलब्धियों के लिए।
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1 sourceराज्यसभा की विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) एक सांसद के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।
विशेषाधिकार समिति के बारे में
- प्रकार: यह एक स्थायी संसदीय समिति है।
- संरचना: संसद के प्रत्येक सदन की अपनी अलग-अलग विशेषाधिकार समिति होती है।
- राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति : इसमें 10 सदस्य होते हैं, जिन्हें सभापति द्वारा नामित किया जाता है।
- लोकसभा की विशेषाधिकार समिति : इसमें 15 सदस्य होते हैं, जिन्हें लोकसभाध्यक्ष द्वारा नामित किया जाता है।
- कार्य: यह अर्ध-न्यायिक शक्ति वाली समिति है। यह सदन और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों के हनन के मामलों की जांच करती है।
हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ये दो रिपोर्ट्स जारी की है।
रिपोर्टों के मुख्य बिंदु
- स्वास्थ्य करों का प्रभाव: स्वास्थ्य कर हानिकारक उत्पादों जैसे की मीठे पेय (शुगर ड्रिंक्स) और शराब की खपत को कम कर सकते हैं। इससे मोटापा, मधुमेह, कैंसर, हृदय रोग, मानसिक रोग जैसे गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम में मदद मिलती है।
- सरकार इन कर-राजस्वों का उपयोग स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा में निवेश के लिए कर सकती है।
- केस स्टडी: 2018 में यूनाइटेड किंगडम द्वारा सॉफ्ट ड्रिंक्स पर लगाए गए कर के परिणामस्वरूप चीनी के सेवन में भारी गिरावट दर्ज की गई, मोटापे की दर कम हुई और सरकारी राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई।
- शराब अधिक वहनीय होना: रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि शराब अब पहले की तुलना में अधिक सस्ती और आसानी से उपलब्ध होती जा रही है। ऐसा इसलिए कि ये कर मुद्रास्फीति और आय में वृद्धि के अनुसार बढ़ाए नहीं जाते।
- मीठे पेयों पर टैक्स में कमी: कई देशों में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसे मीठे पेय पर टैक्स लगता है। लेकिन कुछ मीठे उत्पाद टैक्स से बच जाते हैं, जैसे: 100% फलों का रस, मीठा दूध, रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी और चाय।
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1 sourceकेंद्रीय गृह मंत्री ने गांधीनगर में देश की पहली सरकार-वित्तपोषित BSL-4 कंटेनमेंट सुविधा और प्रयोगशाला की आधारशिला रखी।
बायो-सेफ्टी लेवल (BSL) के बारे में
- BSL विशिष्ट सुरक्षा मानक और सुरक्षा उपाय हैं। इन्हें प्रयोगशाला के कर्मचारियों, आसपास के वातावरण और समुदाय की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है।
- BSL को जोखिम के आधार पर चार स्तरों में बांटा गया है:
- BSL-1 (कम जोखिम वाले कीटाणु से रक्षा हेतु): यह उन सूक्ष्मजीवों से बचाव के लिए है जो स्वस्थ वयस्कों में संक्रमण का बहुत कम या कोई खतरा पैदा नहीं करते।
- यहाँ प्रयोगशाला के बुनियादी नियमों और मानक पीपीई (PPE) का उपयोग किया जाता है।
- BSL-2 (मध्यम जोखिम वाले रोगाणुओं से रक्षा हेतु): यह उन सूक्ष्मजीवों से बचाव के लिए है जो मध्यम स्तर का खतरा पैदा करते हैं।
- यहाँ पहुंच सीमित होती है और बायोसेफ्टी कैबिनेट (BSC) के साथ बेहतर PPE का उपयोग अनिवार्य है।
- BSL-3 (हवा से फैलने वाले खतरनाक रोगाणुओं से रक्षा हेतु): इन प्रयोगशालाओं में नियंत्रित वायु प्रवाह, सीलबंद कमरे और अत्याधुनिक PPE की आवश्यकता होती है।
- BSL-1 (कम जोखिम वाले कीटाणु से रक्षा हेतु): यह उन सूक्ष्मजीवों से बचाव के लिए है जो स्वस्थ वयस्कों में संक्रमण का बहुत कम या कोई खतरा पैदा नहीं करते।
- BSL-4 (अत्यधिक खतरनाक और चरम वातावरण वाले सूक्ष्मजीवों से रक्षा हेतु): BSL-4 प्रयोगशालाओं में ऐसे सूक्ष्मजीवों पर शोध किया जाता है जो अत्यधिक प्राणघातक होते हैं। इनसे होने वाले संक्रमण का अक्सर कोई सटीक उपचार नहीं होता
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1 sourceनारियल की फसल पर वर्तमान में रूट विल्ट रोग का प्रकोप मंडरा रहा है।
रूट विल्ट रोग के बारे में
- यह नारियल के पेड़ों को कमजोर करने वाली धीमी गति से फैलने वाली बीमारी है।
- यह बीमारी फाइटोप्लाज्मा के कारण होती है।
- फाइटोप्लाज्मा पौधों में रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया होते हैं। ये पौधों के फ्लोएम (पोषण ले जाने वाले भाग) में रहते हैं। इनका प्रसार कीटों के माध्यम से होता है।
- लक्षण: पत्तियां ढीली होकर अंदर की ओर मुड़ना (रिबिंग), पत्तियों का पीला पड़ना, जड़ों का सड़ना। इससे नारियल की पैदावार कम हो जाती है।
नारियल की खेती के लिए आवश्यक दशाएं:
- जलवायु: मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों की आर्द्र और उष्णकटिबंधीय जलवायु आदर्श है।
- तापमान: 20°C से 32°C
- वर्षा: लगभग 1000 मिमी वार्षिक वर्षा पर्याप्त मानी जाती है।
- इसे प्रचुर मात्रा में धूप की आवश्यकता होती है।
- मृदा: लाल बलुई दोमट, लैटेराइट और जलोढ़ मृदा।
- भारत विश्व में नारियल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है (2021-22 के आंकड़ों के अनुसार)।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु।
अमेरिका द्वारा ईरान पर बनाए जा रहे दबाव के बीच, भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह में अपनी उपस्थिति बनाए रखने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
चाबहार बंदरगाह के बारे में
- यह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित है।
- यह ईरान का एकमात्र डीप-सी बंदरगाह है जो सीधे हिंद महासागर से जुड़ा हुआ है।
- चाबहार बंदरगाह परियोजना में दो मुख्य टर्मिनल हैं: शाहिद बेहिश्ती और शाहिद कलंतरी।
- यह बंदरगाह अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) का एक अभिन्न हिस्सा है।
- INSTC 7,200 किलोमीटर लंबा एक मल्टी-मॉडल गलियारा है। यह भारत को ईरान और कैस्पियन सागर के माध्यम से रूस और यूरोप से जोड़ता है।