कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य | Current Affairs | Vision IAS
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केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को ‘पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र’ यानी इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) घोषित किया है। 

इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) क्या है? 

  • ESZ को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाता है। यह पूरी तरह संरक्षित क्षेत्र से कम संरक्षण वाले क्षेत्र के बीच का परिवर्तन वाला क्षेत्र (ट्रांजीशन जोन) होता है।  
  • आमतौर पर यह अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर लगभग 10 किलोमीटर तक होता है। लेकिन हर स्थान पर इसका विस्तार अलग-अलग हो सकता है। 

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • इसे 1971 में अभ्यारण्य घोषित किया गया था।  
  • यह राजस्थान में कुंभलगढ़ किले के आसपास फैला हुआ है। यह क्षेत्र राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों में फैला है।  
    • कुंभलगढ़ किला यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है। 
  • इसका कुल क्षेत्रफल 610.5 वर्ग किलोमीटर है। इसमें अरावली पर्वतमाला की चार पहाड़ी श्रेणियां शामिल हैं। ये श्रेणियां हैं; कुंभलगढ़, सादड़ी, देसूरी और बोखड़ा। 
  • वन्यजीव:  तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय, चिंकारा, आदि।
  • वनस्पतियां: मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन;  धोक, सालर, खैर और चुरेल जैसे पेड़।  

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राज्य की जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत  भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकती हैं। इन एजेंसियों में राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो और राज्य पुलिस शामिल हैं। 

  • यह नियम तब भी लागू होगा जब आरोपी केंद्र सरकार का कर्मचारी हो। 
  • न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य पुलिस को केस दर्ज करने से पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के बारे में

  • यह कानून रिश्वतखोरी, गबन, आय से अधिक संपत्ति रखने को अपराध मानता है। 
  • इस कानून का उद्देश्य सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में भ्रष्टाचार की रोकथाम है। 

परमाणु ऊर्जा विभाग भारतीय लाइट वाटर रिएक्टर (LWR) के निर्माण को प्राथमिकता बना रहा है। इसे देश की परमाणु ऊर्जा व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।

लाइट वाटर रिएक्टर (LWR) क्या है? 

  • लाइट वाटर रिएक्टर एक प्रकार का परमाणु रिएक्टर है। इसमें साधारण जल (H₂O) का उपयोग शीतलक (Coolant) और न्यूट्रॉन मंदक (Moderator), दोनों में किया जाता है। 
  • विश्व की 85% से अधिक नागरिक परमाणु रिएक्टर क्षमता LWR पर आधारित है। 
  • कार्यप्रणाली: यूरेनियम ईंधन का विखंडन होता है। इससे ऊष्मा पैदा होती है। यह ऊष्मा जल के जरिये भाप बनाती है। भाप टरबाइन घुमाती है। टरबाइन से बिजली बनती है।
  • LWR में निम्न संवर्धित यूरेनियम का उपयोग होता है। इसमें 3–5% U-235 होता है। 
  • भारत का संदर्भ: भारत ने अब तक दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) विकसित किए हैं। लेकिन अब तेज़ी से क्षमता बढ़ाने के लिए लाइट वाटर रिएक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है। 

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संधारणीय तरीके से सड़क निर्माण के लिए स्टील स्लैग आधारित तकनीक के उपयोग की सिफारिश की है। यह तकनीक खास तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में उपयोगी मानी गई है। 

  • मंत्रालय के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने ECOFIX के व्यावसायिक उपयोग के लिए एक समझौता भी किया है। 
    • ECOFIX सड़कों में गड्ढों को भरने वाला मिश्रण है। इसका विकास CSIR–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) ने किया है। 

स्टील स्लैग क्या है?  

  • स्टील स्लैग वास्तव में इस्पात बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाला ठोस अपशिष्ट है। यह मुख्य रूप से कैल्शियम, आयरन, सिलिकॉन और मैग्नीशियम के ऑक्साइड से बना होता है। 
  • गुण: इसमें अच्छी मजबूती होती है। यह टिकाऊ होता है। यह जंग से बचाव करता है। 
  • उपयोग: इसे निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग किया जा सकता है। कंक्रीट और सीमेंट में भी इसका उपयोग होता है। सड़क निर्माण में यह बहुत उपयोगी है। 

भारतीय रेलवे की एक स्टेशन एक उत्पाद (OSOP) योजना अब 2,000 से अधिक रेलवे स्टेशनों तक फैल चुकी है। 

  • जनवरी 2026 तक इस योजना से 1.32 लाख कारीगरों को लाभ मिला है। 

OSOP योजना के बारे में

  • यह योजना 2022 में शुरू की गई थी। 
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य भारत के स्थानीय और विशेष उत्पादों को बढ़ावा देना है। रेलवे स्टेशनों पर उत्पादों को दिखाने और बेचने की जगह उपलब्ध कराई जाती है। 
  • नोडल मंत्रालय: रेल मंत्रालय। 
  • शामिल उत्पाद: आदिवासी समुदायों के बनाए हस्तशिल्प, स्थानीय बुनकरों के हथकरघा उत्पाद, लकड़ी की नक्काशी जैसे हस्तशिल्प, चिकनकारी और ज़री-ज़रदोज़ी का काम, प्रसंस्कृत और अर्ध-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ। 
  • यह योजना “वोकल फॉर लोकल” अभियान का हिस्सा है। यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करती है।  

भारत में सरसों की फसल गंभीर खतरे का सामना कर रही है। यह खतरा ओरोबैंकी एजिप्टियाका (Orobanche aegyptiaca) नाम की घास से है। 

ओरोबैंकी एजिप्टियाका क्या है? 

  • इसे इजिप्शियन ब्रूमरेप भी कहते हैं। यह फसल की जड़ पर पलने वाली परजीवी घास है। इसमें पर्णहरित (क्लोरोफिल) नहीं होता। यह खुद खाना नहीं बना सकती। यह पूरी तरह सरसों जैसी फसलों पर निर्भर रहती है। 
  • यह पौधों की जड़ों से पोषक तत्व, पानी और कार्बन चूस लेती है। 
  • इससे पौधे मुरझाने लगते हैं। पत्तियां पीली हो जाती हैं। पौधों की वृद्धि रुक जाती है। इससे सरसों के दानों का उत्पादन कम हो जाता है। 

सरसों के बारे में 

  • सरसों भारत में सबसे अधिक पैदावार वाली खाद्य-तेल की फसल है। 
  • इसे आमतौर पर अक्टूबर के मध्य से अंत तक बोया जाता है। 
  • राजस्थान सबसे अधिक सरसों उत्पादन वाला राज्य है। 
  • अन्य खतरे: 
    • सरसों पर कीटों का भी हमला होता है। खासकर माहू (एफिड) का। 
    • इसमें कई फफूंद रोग भी लगते हैं। जैसे-सफेद रतुआ (White rust), पत्ती झुलसा रोग (Leaf blight), तना सड़न और पाउडरी मिल्ड्यू। 

वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल की नीतियों को ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’ (Donroe doctrine) कहा जा रहा है। 

  • ये नीतियां लगभग 200 साल पुराने मुनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine) से मिलती-जुलती हैं। 

मुनरो सिद्धांत क्या है? 

  • मुनरो सिद्धांत की घोषणा 1823 में की गई थी। इसे अमेरिका के राष्ट्रपति जेम्स मुनरो ने पेश किया था। यह अमेरिका की नई विदेश नीति का आधार बना। 
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका के आसपास के क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना था। 
  • मुनरो सिद्धांत की तीन मुख्य नीतियां:
    • उपनिवेश न बनाना: यूरोपीय देश अमेरिकी महाद्वीपों में नए उपनिवेश नहीं बनाएंगे। 
    • हस्तक्षेप न करना: यूरोप स्वतंत्र अमेरिकी देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। 
    • अमेरिका का गैर-हस्तक्षेप: अमेरिका यूरोप के युद्धों या उसके उपनिवेशों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया को लेकर चिंता जताई है। यह मामला यूनाइटेड किंगडम द्वारा डिएगो गार्सिया को मॉरीशस को लौटाने से जुड़ा है। 

  • डिएगो गार्सिया पर अमेरिका का एक बहुत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है। 

डिएगो गार्सिया के बारे में 

  • अवस्थिति: डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के मध्य भाग में स्थित है। यह एक प्रवाल द्वीप (कोरल एटोल) है। यह चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है। 
  • इतिहास: 1965 से चागोस द्वीपसमूह यूनाइटेड किंगडम के नियंत्रण में था। इसे ब्रिटिश  हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT) कहा जाता था। 
    • मई 2025 में यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ। इसके तहत पूरा चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस की संप्रभुता में माना गया। हालांकि, डिएगो गार्सिया को यूनाइटेड किंगडम ने 99 साल की लीज़ पर ले रखा है। 
    • सैन्य महत्व: डिएगो गार्सिया पर यूनाइटेड किंगडम  और संयुक्त राज्य अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है।   

प्रधान मंत्री ने हाल ही में काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना का उद्देश्य काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में वन्य-जीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। 

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में 

  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम में स्थित है। यह ब्रह्मपुत्र नदी और कार्बी (मिकिर) पहाड़ियों के बीच फैला है। 
  • मान्यता: यह एक राष्ट्रीय उद्यानटाइगर रिजर्व और महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (IBA) है। 1985 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला। 
    • यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह ऑस्ट्रेलेशिया और इंडो-एशियन फ्लाईवे के मिलन स्थल पर स्थित है। 
  • जैव विविधता: बाघ, हाथी, स्वैम्प डियर, जंगली भैंस, आदि। 
    • यहाँ भारतीय एक-सींग वाले गैंडे की सबसे अधिक संख्या पाई जाती है। 
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शुष्क पर्णपाती वन

ये ऐसे वन हैं जो उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा कम होती है और जहाँ पेड़ों की पत्तियाँ शुष्क मौसम में झड़ जाती हैं। भारत में, ये वन विशेष रूप से 'धोक' और 'सालर' जैसे पेड़ों के लिए जाने जाते हैं।

अरावली पर्वतमाला

यह भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो गुजरात से दिल्ली तक फैली हुई है। कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में अरावली पर्वतमाला की चार पहाड़ी श्रेणियां शामिल हैं।

यूनेस्को विश्व विरासत स्थल

यह एक ऐसा स्थल है जिसे संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा अपने असाधारण सार्वभौमिक मूल्य के कारण संरक्षित किया जाता है। कुंभलगढ़ किला एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है।

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