केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने शासन-व्यवस्था में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला | Current Affairs | Vision IAS
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हाल ही में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप ने 'सुशासन के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी’ सम्मेलन आयोजित किया था। इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ने गवर्नेंस या शासन-व्यवस्था से संबंधित पद्धतियों को रूपांतरित करने में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्रक की भूमिका को उजागर किया।

शासन-व्यवस्था में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका

  • संसाधन प्रबंधन:
    • मानचित्रण: रिसोर्ससैट, कार्टोसैट जैसे उपग्रह भूमि, जल और खनिजों के मानचित्रण के लिए भू-स्थानिक डेटा प्रदान करते हैं।
    • कृषि: इसकी मदद से किसानों को फसल प्रबंधन और उत्पादकता में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराया जाता है। उदाहरण के लिए- कृषि-निर्णय सहायता प्रणाली।
    • वन: IRS उपग्रह वन क्षेत्र, वनाग्नि आदि के मानचित्रण में भारतीय वन सर्वेक्षण को  सहायता प्रदान करते हैं।
  • अवसंरचना: पीएम गति शक्ति योजना अंतरिक्ष आधारित स्थानिक नियोजन टूल्स (Spatial planning tools) और इसरो की इमेजरी सुविधा का उपयोग करके भारतमाला, सागरमाला आदि सहित विविध मंत्रालयों की अवसंरचना परियोजनाओं का एकीकरण करती है।
  • सामाजिक क्षेत्रक:
    • अंतरिक्ष तकनीक जैसे इसरो के हेल्थ-क्वेस्ट का उपयोग करके स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि की जा रही है।
    • एजुसेट के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में लाइव लेक्चर और इंटरैक्टिव लर्निंग जैसे टेली-शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • आपदा प्रबंधन: इसरो का राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन डेटाबेस पोर्टल आपातकालीन प्रबंधन में सहायता के लिए GIS आधारित आंकड़ों के राष्ट्रीय भंडार के रूप में कार्य करता है।
  • सुरक्षा: जीसैट-7 और रिसैट संचार एवं देश की सीमा की निगरानी को सुनिश्चित करते हैं। साथ ही, मिशन शक्ति (2019) भारत की अंतरिक्ष से संबंधित रक्षा क्षमताओं का एक बेहतरीन उदाहरण भी है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: वित्त वर्ष 2016-17 से मनरेगा परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्रक को उच्च स्तरीय अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए सीमित राष्ट्रीय संसाधनों को आवंटित करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, अंतरिक्ष क्षेत्रक आधारित तकनीक की मदद से सुशासन को सशक्त बनाकर सामाजिक-आर्थिक प्रगति को सुनिश्चित करने में काफी मदद मिल रही है।

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