तड़ितझंझा (Thunderstorm) कम अवधि के अत्यधिक तेज स्थानीय तूफान होते हैं, जो छोटे क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं, लेकिन अत्यंत विनाशकारी होकर जनजीवन और अवसंरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
तड़ितझंझा के बारे में
- तड़ितझंझा एक पूर्ण विकसित कपासी वर्षी मेघ (Cumulonimbus clouds) है जो गरज व बिजली उत्पन्न करता है। तड़ितझंझा उष्ण आर्द्र दिनों में प्रबल संवहन (कन्वेक्शन) के कारण उत्पन्न होते हैं।
- ये मेसो-गामा (Meso-gamma) मौसम प्रणालियों की श्रेणी में आते हैं, जिनका स्थानिक विस्तार लगभग 2 से 20 किलोमीटर तक होता है और लगभग कुछ घंटों तक सक्रिय रहते हैं।
- प्रकार: तड़ितझंझा की प्रबलता या तीव्रता को देखते हुए, इन्हें भारत में निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:
- सामान्य तड़ितझंझा: बिजली की चमक के साथ बादलों की तेज गड़गड़ाहट, सामान्य से भारी बारिश और 29 से 74 किलोमीटर प्रति घंटे का अधिकतम पवन वेग।
- भयानक तड़ितझंझा: निरंतर गर्जना और कभी-कभी ओलावृष्टि, और अधिकतम पवन वेग 74 किमी प्रति घंटा से अधिक।
- घटना: इनकी आवृत्ति और तीव्रता गर्मियों के महीनों (मार्च से जून) में सर्वाधिक होती है, क्योंकि इस समय सतह स्तर पर वायुमंडल अत्यधिक गर्म हो जाता है।
तड़ितझंझा का जीवन चक्र
- विकासशील चरण: तड़ितझंझा की विशेषता उष्ण वायु का प्रबल ऊर्ध्वप्रवाह (अपड्राफ्ट) है, जिसके कारण कपासी बादलों का आकार बढ़ता है और ये अधिक ऊँचाई तक पहुँचते हैं। ये शीघ्र टावर के समान दिखाई देने लगते हैं।
- इस अवस्था में वर्षा बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती, लेकिन कभी-कभी बिजली चमक सकती है।

- परिपक्व चरण: वायु का ऊर्ध्वप्रवाह (अपड्राफ्ट) तूफान को ऊर्जा प्रदान कर रहा होता है, साथ ही नीचे की तरफ वायु का प्रवाह (डाउनड्राफ्ट) पृथ्वी पर ठंडी वायु व वर्षा लाते हैं। भयानक तड़ितझंझा से कभी-कभी वायु आक्रामक रूप में हाथी की सूंड की तरह सर्पिल अवरोहण करती है। इसमें केंद्र पर अत्यंत कम वायुदाब होता है और यह व्यापक रूप से भयंकर विनाशकारी होता है।
- इसके कारण ओले गिरना, भारी बारिश होना, बार-बार बिजली गिरना, तेज हवाएं बहना और बवंडर आना आम विशेषताएं हैं।
- समाप्ति चरण: अंततः, भारी वर्षा होती है और नीचे की तरफ वायु का प्रवाह (डाउनड्राफ्ट), ऊर्ध्वप्रवाह (अपड्राफ्ट) पर हावी हो जाता है, जिससे समाप्ति का चरण शुरू होता है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के 'तड़ितझंझा की रोकथाम और प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश, 2018' के तहत जोखिम क्षेत्रों का मानचित्रण (Hazard Mapping), संरचनात्मक शमन उपाय आदि के माध्यम से इससे निपटने के व्यापक उपाय बताए गए हैं।
