प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PRADHAN MANTRI AWAAS YOJANA GRAMEEN : PMAY-G) | Current Affairs | Vision IAS

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प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PRADHAN MANTRI AWAAS YOJANA GRAMEEN : PMAY-G)

22 May 2026
1 min

In Summary

  • प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), जिसे 2016 में शुरू किया गया था, का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में "सभी के लिए आवास" प्रदान करना है, जिसके तहत गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • इस योजना का लक्ष्य 2029 तक 4.95 करोड़ घरों का निर्माण करना है, जिसमें लाभार्थियों का चयन एसईसीसी 2011 के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • मैदानी इलाकों के लिए 1.2 लाख रुपये या पहाड़ी/कठिन इलाकों के लिए 1.3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिसमें बुनियादी सुविधाओं और डीबीटी भुगतानों के लिए समायोजन किया जाएगा।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) ने अपने सफल क्रियान्वयन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य 

योजना की मुख्य विशेषताएँ 

  • गरीब और आवासहीन परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराकर ग्रामीण क्षेत्रों में "सभी के लिए आवास" (Housing for All) के लक्ष्य को प्राप्त करना।
  • ग्रामीण परिवारों के लिए गरिमापूर्ण, सुरक्षित और सुदृढ़ जीवन स्तर सुनिश्चित करना।
  • बेहतर आवास अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना

वर्ष 2016 में शुरू की गई PMAY-G को पूर्ववर्ती 'इंदिरा आवास योजना' (IAY) को पुनर्गठित करके तैयार किया गया था, जिसकी शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी।

प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना 

मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय।

मुख्य बिंदु एवं विशेषताएँ:

  • लक्ष्य (Targets): सरकार ने शुरुआत में वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2023-24 तक के लिए 2.95 करोड़ मकानों का लक्ष्य निर्धारित किया था। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की निरंतर मांग को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगले पांच वर्षों (वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2028-29) के लिए इसके विस्तार को मंजूरी दी है, जिसमें 2 करोड़ अतिरिक्त मकानों का नया लक्ष्य जोड़ा गया है। 
  • लाभार्थियों का चयन: लाभार्थियों का चयन सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 के आवास अभाव (Housing Deprivation) डेटा के आधार पर किया जाता है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस सूची का सत्यापन ग्राम सभा के अनुमोदन और 'आवास+' (Awaas+) के तहत जियो-टैगिंग (Geo-tagging) के माध्यम से किया जाता है।
    • पात्र लाभार्थी: इसमें वे आवासहीन परिवार और लोग शामिल हैं जो SECC डेटा के अनुसार 0 से 2 कमरों वाले कच्चे मकानों में रह रहे हैं। निम्नलिखित श्रेणियों का इसमें स्वतः/अनिवार्य समावेश किया जाता है:
      • आश्रयहीन परिवार
      • बेसहारा/भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले
      • हाथ से मैला ढोने वाले (Manual Scavengers)
      • आदिम जनजातीय समूह
      • कानूनी रूप से मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूर
    • पक्के मकानों का अपवर्जन: वे सभी परिवार जिनके पास पक्की छत और/या पक्की दीवारें हैं, अथवा जो 2 से अधिक कमरों वाले मकानों में रह रहे हैं, उन्हें इस पात्रता सूची से बाहर कर दिया जाता है।
    • स्वतः अपवर्जन के मानदंड (इन्फोग्राफिक देखें)।
  • लाभार्थियों का वर्गीकरण/प्राथमिकता (Beneficiary Prioritisation): यह आवास अभाव के मानदंडों पर आधारित है। कुल आवंटित लक्ष्यों में से न्यूनतम 60% लक्ष्य अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के परिवारों के लिए आरक्षित हैं, तथा 15% कोष अल्पसंख्यकों के लिए निर्धारित किया गया है।
    • महिलाओं और बेंचमार्क विकलांगता (न्यूनतम 40% दिव्यांगता) वाले व्यक्तियों को वरीयता (संभव होने पर न्यूनतम 5%) दी जाती है। इसका सत्यापन ग्राम सभा/स्थानीय स्वशासन निकायों द्वारा किया जाता है।
  • वित्तीय सहायता: मकान का न्यूनतम आकार 25 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। इसके निर्माण के लिए मैदानी क्षेत्रों में ₹1.2 लाख तथा पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और दुर्गम क्षेत्रों में ₹1.3 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
    • श्रम सहायता: मनरेगा (MGNREGA) के तहत अनिवार्य अभिसरण के माध्यम से लाभार्थी को मकान निर्माण के लिए 90 से 95 अकुशल मानव-दिवस की मजदूरी सहायता दी जाती है।
  • स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G): शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की अतिरिक्त सहायता दी जाती है।
  • वित्तपोषण का स्वरूप: केंद्र और राज्यों के बीच लागत का विभाजन सामान्य राज्यों के लिए 60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में होता है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100% केंद्रीय सहायता दी जाती है।
    • लाभार्थी को मिलने वाले सभी भुगतान उनकी सहमति से आधार से जुड़े (Aadhaar-linked) बैंक/डाकघर खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) मोड के माध्यम से किए जाते हैं।
  • योजनाओं का अभिसरण: लाभार्थियों को अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाओं को इसके साथ जोड़ा गया है; जैसे एलपीजी कनेक्शन (उज्वला योजना), स्वच्छ पेयजल (जल जीवन मिशन), बिजली कनेक्शन (पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना) आदि।
  • निगरानी और जवाबदेही: CPGRAMS और स्थानीय निकायों के माध्यम से शिकायतों का निवारण 15 दिनों के भीतर किया जाता है। इसके साथ ही, वर्ष 2026 के बाद योजना को जारी रखने और नीतिगत समीक्षा के लिए नीति आयोग द्वारा समय-समय पर इसका मूल्यांकन किया जाता है। 
  • तकनीकी सहायता: राष्ट्रीय तकनीकी सहायता एजेंसी (NTSA) तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।
    • राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए 'ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण' (RMT) कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
  • प्रगति और उपलब्धियां: मार्च 2026 तक, इस योजना के चरण-I और चरण-II के तहत लगभग 4.15 करोड़ मकान को आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें से 3.90 करोड़ स्वीकृत हुए और 2.99 करोड़ मकान सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। वर्ष 2029 तक 4.95 करोड़ मकानों के कुल लक्ष्य के सापेक्ष अब तक ₹4.03 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित की जा चुकी है।

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ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण (RMT)

यह NSDC द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में राजमिस्त्रियों के कौशल को बढ़ाने के लिए चलाया जाने वाला एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो PMAY-G जैसी आवास योजनाओं के सफल कार्यान्वयन में सहायक है।

राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC)

यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत एक गैर-लाभकारी संगठन है। NSDC, PMKVY सहित विभिन्न कौशल विकास पहलों के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है।

राष्ट्रीय तकनीकी सहायता एजेंसी (NTSA)

यह विभिन्न आवास कार्यक्रमों, जैसे PMAY-G, के लिए तकनीकी सहायता और विशेषज्ञता प्रदान करने वाली एक संस्था है।

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