एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत के वनों में कार्बन अवशोषण की क्षमता में भारी वृद्धि होने का अनुमान है। यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हो सकती है।
अध्ययन के मुख्य मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- वनस्पति आधारित कार्बन बायोमास में अनुमानित वृद्धि: 2100 तक 35% (निम्न-उत्सर्जन परिदृश्य में) से लेकर 97% (उच्च-उत्सर्जन परिदृश्य में) तक की वृद्धि हो सकती है।
- प्रमुख कारक: वायुमंडल में CO2 का बढ़ता स्तर (जो प्रकाश संश्लेषण में सहायता करता है) और वर्षा पैटर्न में बदलाव।
- वृद्धि वाले प्रमुख क्षेत्र: राजस्थान और गुजरात जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में 60% से अधिक की वृद्धि का अनुमान है।
भारत के लक्ष्य और रुझान
- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs): 2031-35 के अद्यतन NDC लक्ष्यों के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5-4.0 बिलियन टन CO2 के बराबर कार्बन सिंक बनाना है।
- भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार:
- कुल वन कार्बन भंडारण 2013 के 6.94 बिलियन टन से बढ़कर 2023 में 7.29 बिलियन टन हो गया।
- कुल वन और वृक्ष आवरण भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 24.62% (2021) से बढ़कर 25.17% हो गया।
भारत की कार्बन भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रमुख पहलें
- ग्रीन इंडिया मिशन (GIM): इसके लक्ष्य हैं; वन/वृक्ष आवरण को 5 मिलियन हेक्टेयर तक बढ़ाना और अन्य 5 मिलियन हेक्टेयर वन/गैर-वन भूमि की गुणवत्ता में सुधार करना।
- राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (NAP): यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य निम्नीकृत वनों की पारिस्थितिकी पुनर्बहाली और जनभागीदारी के माध्यम से वन संसाधनों का विकास करना है।
- प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA): इसका उद्देश्य है किसी परियोजना (जैसे सड़क, खनन, उद्योग आदि) के लिए जंगल की जमीन का उपयोग गैर-वन कार्यों में करने पर उसके बदले में नए पेड़ लगाकर और जंगल विकसित करके उसकी भरपाई करना।
- अन्य महत्वपूर्ण पहलें: भारत में वनों के बाहर वृक्ष (TOFI) कार्यक्रम, बॉन चैलेंज (26 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि को बहाल करने की) प्रतिबद्धता, कृषि वानिकी उप-मिशन (SMAF), ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (GCP), और नगर वन योजना।