रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से आशय किसी राष्ट्र की उस क्षमता से है जिसके माध्यम से वह विदेश नीति और रक्षा से जुड़े निर्णय बाहरी दबावों या गठबंधन संबंधी बाध्यताओं से मुक्त होकर स्वयं ले सके।
- यह पृथकतावाद (Isolationism) या तटस्थता (Neutrality) का पर्याय नहीं है, बल्कि लचीलापन, स्वतंत्रता तथा अपनी शर्तों पर विविध वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध स्थापित करने की क्षमता को दर्शाता है।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के समक्ष चुनौतियां:
- विभाजित विश्व व्यवस्था: अमेरिकी प्रभुत्व, चीन की आक्रामकता, और रूसी पुनरावलोकनवाद (revisionism) की वजह से विश्व आज कई पक्षों में विभाजित है।
- रूसी पुनरावलोकनवाद (Russian Revisionism) वास्तव में रूसी राष्ट्रपति की विदेश नीति की एक प्रमुख रणनीति है। इसका उद्देश्य शीत युद्ध के बाद बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बदलना, पश्चिमी देशों के प्रभाव को कमजोर करना और रूस के प्रभाव क्षेत्र को फिर से स्थापित करना है।
- पश्चिमी देशों का दबाव: ऊर्जा एवं रक्षा के क्षेत्र में रूस के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को लेकर विशेष रूप से अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों तथा कूटनीतिक विरोध के कारण चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।
- चीन से चुनौती: अमेरिका के साथ भारत की गहरी होती रणनीतिक साझेदारी को चीन के विरोध के रूप में देखा जाता है।
- अन्य चुनौतियां:
- कमजोर होती अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं,
- हाल के सैन्य संघर्षों में विधि के शासन के बजाय बल का प्रयोग को प्राथमिकता देना;
- प्रौद्योगिकीय, डिजिटल और वित्तीय स्तरों पर देशों के बीच विभाजन,
- संरक्षणवाद की ओर झुकाव, आदि।
रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए भारत के उपाय:
- प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों का पुनर्संतुलन: भारत अमेरिका के साथ संबंधों को सुदृढ़ कर रहा है, साथ ही टैरिफ और प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न तनावपूर्ण आर्थिक संबंधों में संतुलन बनाए हुए है।
- चीन के साथ संतुलनकारी नीति: सीमा एवं कूटनीतिक स्तर पर तनावों के बावजूद भारत ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों में भाग लेता है, जहाँ चीन की प्रमुख भूमिका है।
- रूस के साथ मजबूत संबंध: चीन के साथ रूस की बढ़ती नजदीकी और यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ने के बावजूद, रूस के साथ भारत अपने रक्षा और कूटनीतिक संबंध बनाए हुए है।
- अलग-अलग देशों से रक्षा आयात करना: इसके उदाहरण हैं; रूस के साथ संयुक्त रूप से ब्रह्मोस मिसाइल का विकास, फ्रांस निर्मित मिराज 2000 लड़ाकू विमान, साथ ही इजरायल निर्मित हथियार जैसे SCALP-2000 बम।
- व्यापार में विविधता लाना: भारत मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौतों (CEPAs) को वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ा रहा है।
उपर्युक्त के अलावा, डिजिटल संप्रभुता, ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत आपूर्ति शृंखला तथा आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) के दृष्टिकोण के साथ समावेशी विकास जैसे उपाय भारत की सामरिक स्वायत्तता को निरंतर बनाए रखने में सहायक होंगे।