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हाल ही में "वाइब कोडिंग" व्यवसाय जगत में कोडिंग का एक महत्वपूर्ण टूल बनकर उभरी है।

वाइब कोडिंग के बारे में

  • अर्थ: यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यूजर्स की सोच (जो सामान्य भाषा में व्यक्त की जाती है) को उपयोग योग्य कोड (executable code) में परिवर्तित कर देती है।
  • 2024 में, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के लगभग 30% कोड AI द्वारा बनाए गए थे। इस तरह यह एक बड़े बदलाव का संकेतक है।
  • महत्त्व:
    • यह रियल टाइम में सुझाव देती है।
    • बोझिल कार्यों और प्रक्रियाओं को स्वचालित करती है।
    • मानक कोडबेस संरचनाएँ तैयार करती है।
  • मुख्य चुनौतियां:
    • तकनीकी जटिलता: जटिल या नवीन फ्रेमवर्क बनाने के लिए विशेष ज्ञान की आवश्यकता पड़ती है।
    • कोड की गुणवत्ता और इसके प्रदर्शन पर संदेह बना रहता है।
    • डिबगिंग (त्रुटि सुधार) संबंधी चुनौतियां।
    • रख-रखाव और अपडेट से जुड़ी चुनौतियां।
    • साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं।

हाल ही में वैज्ञानिकों ने सबसे भारी प्रोटॉन उत्सर्जक समस्थानिक 188At (एस्टेटीन) की अर्ध-आयु (190 माइक्रोसेकंड) की माप की है, जिसका प्रोटॉन उत्सर्जन के बाद क्षय हो गया।

  • प्रोटॉन धनात्मक विद्युत आवेश वाला एक उप-परमाण्विक कण है।

प्रोटॉन उत्सर्जन के बारे में

  • यह एक प्रकार का रेडियोधर्मी क्षय है, जो अधिकतर तत्वों के प्रोटॉन-प्रचुर नाभिकों की अवलोकन-योग्य सीमा को निर्धारित करता है।
    • अर्थात, किसी नाभिक में यदि निर्धारित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन संख्या के साथ और अधिक प्रोटॉन जोड़े जाएँ, तो एक निश्चित पॉइंट आता है जहां अंतिम जोड़ा गया प्रोटॉन स्वतः ही बाहर निकल जाता है।    
  • प्रोटॉन उत्सर्जन को पहली बार 1970 के दशक में 53Co (कोबाल्ट) समस्थानिक से देखा गया था। 

हाल ही में, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (INP) में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों का माओवादियों से सामना हुआ।

इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के बारे में

  • अवस्थिति: बीजापुर जिला, छत्तीसगढ़।
  • भू-दृश्य: यह भैरमगढ़ और पामेड़ वन्यजीव अभ्यारण्यों के साथ मिलकर इंद्रावती लैंडस्केप का निर्माण करता है।
  • इंद्रावती नदी: इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान का नाम इंद्रावती नदी के नाम पर रखा गया है। 
    • इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा के दंडकारण्य श्रेणी से होता है। यह गोदावरी की सहायक नदी है।
  • यह नदी इस टाइगर रिजर्व की उत्तरी और पश्चिमी सीमा बनाती है, जो छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की अंतर्राज्यीय सीमा भी है।
  • अवस्थिति: इसे 1981 में राष्ट्रीय उद्यान और 1983 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।
  • प्राप्त वनस्पतियां: बड़े-बड़े पेड़, लताएं, झाड़ियाँ, बांस, फ़र्न, ब्रायोफाइट्स, शैवाल आदि।
  • प्राप्त जीव-जंतुदुर्लभ जंगली भैंस केवल इसी राष्ट्रीय उद्यान में प्राप्त होते हैं।

विश्व बैंक ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो (DRC) में इंगा-3 जलविद्युत परियोजना के लिए 250 मिलियन डॉलर के वित्तपोषण को मंजूरी दी।

इंगा 3 परियोजना के बारे में

  • यह डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में कांगो नदी पर 11050 मेगावाट की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना है।
  • यह ग्रैंड इंगा परियोजना का हिस्सा है। 
    • ग्रैंड इंगा परियोजना का लक्ष्य 42,000 मेगावाट से अधिक की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है।

कांगो नदी के बारे में

  • कांगो नदी बेसिन वाले छह देश: कैमरून, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी और गैबॉन।
    • यहां दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय पीटलैंड स्थित है।
  • मुख्य विशेषताएं: जल अपवाह की मात्रा के मामले में यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नदी है। ऐसी सबसे बड़ी नदी अमेज़ॅन है।  
  • कांगो नदी, नील नदी के बाद अफ्रीका की दूसरी सबसे लंबी नदी है। 
  • कांगो नदी भूमध्य रेखा को दो बार पार करती है।

हाल ही में चंडीगढ़ में परजीवी वैस्प की एक नई प्रजाति लॉसग्ना ऑक्सीडेंटलिस (Losgna Occidentalis) की खोज की गई है।

परजीवी वैस्प (पैरासाइटोइड्स/ Parasitoids) के बारे में

  • स्वरूप: ये छोटे आकार के उड़ने वाले कीट होते हैं। इनकी कई प्रजातियाँ तो एक मिलीमीटर से भी छोटी होती हैं।
  • ये कीट हायमेनॉप्टेरा वर्ग के अंतर्गत अलग-अलग फैमिली में पाए जाते हैं। इनमें सॉफ़्लाइज़, मधुमक्खियां और वैस्प शामिल हैं।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • वयस्क परजीवी वैस्प मुख्यतः फूलों के पराग और मकरंद पर निर्भर रहती हैं।
    • ये एकाकी जीवन व्यतीत करती हैं। ये न तो छत्ता बनाती हैं और न ही किसी रानी की अधीनता में रहती हैं।
    • ये अपने अंडे अन्य कीटों के शरीर के अंदर देती हैं, जहां से उनका जीवन-चक्र पूरा होता है। यह प्रक्रिया होस्ट जीव के व्यवहार को बदल देती है और अंततः होस्ट जीव को मार देती है
  • महत्त्व: ये कीटों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रोकते हैं, आदि।  

CRS डेटा से पता चलता है कि 2021 के कोविड पीक के बाद 2022 में मृत्यु पंजीकरण में गिरावट आयी।

CRS के बारे में: 

  • CRS एक जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली है। 
  • CRS का महत्त्व: 
  • यह स्वास्थ्य, जनसंख्या और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति निर्धारण के लिए डेटा प्रदान करता है। 
  • यह शासन और कल्याणकारी सेवाओं के प्रभावी वितरण को सुनिश्चित करता है।
  • कानूनी फ्रेमवर्क: 
    • CRS को "जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969" (2023 में संशोधित) के तहत संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य देश भर में रजिस्ट्रेशन की एकरूपता सुनिश्चित करना और तुलना को बढ़ावा देना है। 
    • CRS समवर्ती सूची (प्रविष्टि 30) के अंतर्गत आता है। 
  • संस्थागत संरचना: भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) इस प्रणाली का केंद्रीय स्तर पर समन्वय करते हैं और देशभर में CRS को संचालित करते हैं।

शोधकर्ताओं ने क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (Cryo-EM) का एक उन्नत संस्करण ‘मैग्नेटिक आइसोलेशन एंड कंसंट्रेशन क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ (MagIC) विकसित किया है

Cryo-EM के बारे में

  • 2017 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जैक्स डुबोचेट, जोआचिम फ्रैंक और रिचर्ड हेंडरसन को क्रायो-EM विकसित करने के लिए दिया गया था।
  • इसका उपयोग जैविक अणुओं की 3D आकृति (आकार) का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। इसमें इमेजिंग के लिए नमूने में अणु की उच्च सांद्रता की आवश्यकता होती है।
  • रिज़ॉल्यूशन: क्रायो-EM 1.5~3.5 एंगस्ट्रॉम (Å) रेंज में रिज़ॉल्यूशन प्राप्त करता है।
  • सीमाएं: बहुत कम मात्रा वाले अणुओं का अध्ययन करना कठिन होता है।

MagIC के बारे में

  • इसकी मदद से 100 गुना अधिक पतले नमूनों का अध्ययन किया जा सकता है।
  • लाभ: इससे अधिक दक्षता और नमूने की कम मात्रा के साथ दुर्लभ जैविक अणुओं की इमेजिंग संभव है।

भारत और नॉर्वे ने संयुक्त रूप से मोनाको समुद्री सम्मेलन में समुद्री स्थानिक नियोजन (MSP) पर एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान भारत ने MSP के लिए अपनी पहलों का उल्लेख किया जैसे-

  • SAHAV पोर्टल (डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति): यह एक GIS-आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली है। यह रियल टाइम में स्थानिक डेटा प्रदान करती है, जिससे स्मार्ट योजना और समुद्री लचीलापन सुनिश्चित होता है।
  • पायलट प्रोजेक्ट्स: पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भारत-नॉर्वे MSP सहयोग के तहत तटीय अपरदन से निपटने और जैव विविधता के प्रबंधन में MSP का उपयोग किया गया है।

समुद्री स्थानिक नियोजन के बारे में

  • यह एक सार्वजनिक प्रक्रिया है, जिसमें समुद्री क्षेत्रों में मानव गतिविधियों के स्थानिक और समय-आधारित वितरण का विश्लेषण और प्रबंधन किया जाता है। इसका उद्देश्य पारिस्थितिक, आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इन लक्ष्यों को एक राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित किया जाता है।
  • MSP एक सतत समुद्री गवर्नेंस का महत्वपूर्ण उपकरण है। यह एक विज्ञान-आधारित ढांचा प्रदान करता है, जो समुद्री संसाधनों के अनुकूलन, जैव विविधता की रक्षा और तटीय आजीविका को सुनिश्चित करता है। 
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