भारत में ‘मगरमच्छ संरक्षण परियोजना’ के 50 वर्ष पूरे हुए | Current Affairs | Vision IAS
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विश्व मगरमच्छ दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर भारत में ‘मगरमच्छ संरक्षण परियोजना’ की शुरुआत की स्वर्ण जयंती मनाई गई। 

  • ध्यातव्य है कि प्रत्येक वर्ष 17 जून को विश्व मगरमच्छ दिवस (World Crocodile Day) मनाया जाता है।  

मगरमच्छ संरक्षण परियोजना के बारे में:

  • परियोजना की शुरुआत: एच.आर. बस्टर्ड की सिफारिशों के आधार पर 1 अप्रैल, 1975 को यह परियोजना अलग-अलग राज्यों में औपचारिक रूप से शुरू की गई थी।
  • उद्देश्य: मगरमच्छों के प्राकृतिक पर्यावासों का संरक्षण करना और कैप्टिव ब्रीडिंग के माध्यम से इनकी आबादी को तेजी से बढ़ाना।
  • तकनीकी और वित्तीय सहायता: यह सहायता भारत सरकार के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) तथा खाद्य और कृषि संगठन (FAO) से प्राप्त होती है। 

भारत में मगरमच्छ संरक्षण की सफलता:

  • ओडिशा की विशेष भूमिका: ओडिशा भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां मगरमच्छ की तीनों स्थानिक (नेटिव) प्रजातियों के लिए संरक्षण केंद्र मौजूद हैं। ये तीन संरक्षण केंद्र निम्नलिखित हैं:
    • घड़ियाल: टिकरपाड़ा (सतकोसिया);
    • खारे जल का मगरमच्छ: डांगमाल (भीतरकनिका); तथा 
    • मगर (मगरमच्छ): रामतीर्थ (सिमिलिपाल)।
  • खारे जल के मगरमच्छ और मगर की संख्या में वृद्धि:
    • खारे जल का मगरमच्छ: अब इनकी संख्या लगभग 2,500 हो चुकी है। इनकी सबसे अधिक संख्या ओडिशा के भीतरकनिका में है। यह प्रजाति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) में भी पाई जाती है।
    • मगर: इनकी संख्या बढ़कर 8,000–10,000 तक पहुंच गई है। यह प्रजाति एक बार फिर से अपने ऐतिहासिक प्राकृतिक क्षेत्र (जैसे गंगा नदी घाटी) में पाई जाने लगी है।
  • घड़ियाल संरक्षण: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य, गंडक नदी, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य जैसे संरक्षण क्षेत्रों में प्रतिवर्ष घड़ियालों के 400 से अधिक घोंसले दर्ज किए जा रहे हैं।
    • राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य तीन राज्यों में विस्तृत है। 
  • आज भारत में विश्व की 80% जंगली घड़ियाल आबादी मौजूद है।

वर्तमान में संचालित संरक्षण पहलें:

  • इस वर्ष (2025) भारत ने एक ‘नई घड़ियाल संरक्षण परियोजना’ की घोषणा की है। इस नई परियोजना का उद्देश्य गंगा, ब्रह्मपुत्र व सिंधु नदियों तथा ओडिशा की महानदी में घड़ियालों की संख्या बढ़ाना है।
  • मद्रास क्रोकोडाइल बैंक: यहां मगरमच्छों की ब्रीडिंग कराई जाती है और इनकी संख्या बढ़ाने वाले कार्यक्रमों का समर्थन किया जाता है।

मगरमच्छ के बारे में:

  • मगरमच्छ की प्रजातियां: दुनिया भर में मगरमच्छ की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें नाइल क्रोकोडाइल, खारे जल का मगरमच्छ आदि शामिल हैं।
    • इनमें से भारत में तीन नेटिव मगरमच्छ प्रजातियां पाई जाती हैं (इन्फोग्राफिक देखिए)।
  • सबसे बड़ी सरीसृप प्रजाति: खारे जल का मगरमच्छ (saltwater crocodile) दुनिया में मगरमच्छ की सबसे बड़ी जीवित प्रजाति और सबसे बड़ी जीवित कशेरुकी (vertebrate) वर्ग की सरीसृप प्रजाति है।
  • विशेषताएं: ये निशाचर और पॉयकिलोथर्मिक जीव हैं। 
    • पॉयकिलोथर्मिक जीवों के शरीर का तापमान आस-पास के तापमान के साथ बदलता रहता है।  
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