AI के लोकतंत्रीकरण का अर्थ है कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उपयोगकर्ताओं के एक विस्तृत और विविधतापूर्ण समूह के लिए सुलभ, किफायती एवं उपयोग योग्य बनाना।
- यह केवल तैयार एप्लीकेशंस तक पहुंच से कहीं अधिक है। इसमें AI के मुख्य आधारों जैसे कंप्यूटिंग पॉवर, डेटासेट और मॉडल इकोसिस्टम तक पहुंच शामिल है।
AI लोकतंत्रीकरण के प्रमुख स्तंभ
- जनहित के लिए AI एप्लीकेशंस का लोकतंत्रीकरण: इसमें 'भाषिणी' (AI के माध्यम से विभिन्न भाषाओं में कंटेंट सक्षम करना), किसानों की सहायता के लिए 'किसान ई-मित्र' और आपदा प्रबंधन के लिए 'मौसमGPT' जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
- सुलभ डेटा और मॉडल्स: राष्ट्रीय मंच 'एआईकोश' (AIKosh) एक साझा संसाधन के रूप में कार्य करता है। यह डेवलपर्स को 7,500 से अधिक डेटासेट्स और 273 पुन: प्रयोज्य (reusable मॉडल्स प्रदान करता है।
- किफायती कंप्यूटिंग पॉवर: 'इंडिया एआई मिशन' के तहत 38,000 से अधिक हाई-एंड ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) को शामिल किया गया है। ये ₹65 प्रति घंटे की रियायती दर पर उपलब्ध हैं, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।
- मजबूत अवसंरचना और कनेक्टिविटी: व्यापक AI उपयोग को 5G सेवाओं का समर्थन प्राप्त है, जो अब भारत के 99.9% जिलों को कवर करती हैं।
- सतत ऊर्जा: AI की उच्च ऊर्जा मांग को देखते हुए, भारत ने अपनी अवसंरचना को हरित ऊर्जा लक्ष्यों के साथ जोड़ा है। जून 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से स्थापित विद्युत क्षमता का 50% हासिल कर लिया गया है।
AI के लोकतंत्रीकरण के लिए उठाए गए कदम
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