नीति आयोग ने 'विकसित भारत और नेट जीरो की दिशा में परिदृश्य: महत्वपूर्ण खनिज मूल्यांकन' पर एक रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • यह रिपोर्ट इस तथ्य पर जोर देती है कि 2070 तक भारत का 'नेट जीरो' (शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य सुरक्षित, किफायती एवं जिम्मेदारी से प्राप्त महत्वपूर्ण ऊर्जा संक्रमण खनिजों (CETMs) की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
  • चीन पर अधिक निर्भरता होने से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में रुकावट से जुड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। 
  • घरेलू परिशोधन एवं पुनर्चक्रण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन (पूंजी सहायता, आउटपुट से संबद्ध प्रोत्साहन आदि) प्रदान करने चाहिए।

In Summary

यह रिपोर्ट इस तथ्य पर जोर देती है कि 2070 तक भारत का 'नेट जीरो' (शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य सुरक्षित, किफायती एवं जिम्मेदारी से प्राप्त महत्वपूर्ण ऊर्जा संक्रमण खनिजों (CETMs) की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। 

  • महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज हैं, जो किसी देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होते हैं।

प्रमुख संबद्ध चुनौतियां

  • मांग में भारी वृद्धि: नेट जीरो परिदृश्य के तहत CETMs की अनुमानित मांग वर्तमान नीति परिदृश्य की तुलना में 51% अधिक है। इसका मुख्य कारण बैटरी से जुड़े खनिजों की मांग है।
  • आयात पर अत्यधिक निर्भरता: उदाहरण के लिए- लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे प्रमुख खनिजों हेतु भारत 100% आयात पर निर्भर है।
  • एक ही देश पर अधिक निर्भरता का जोखिम: जैसे— चीन पर अधिक निर्भरता होने से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में रुकावट से जुड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। 
  • घरेलू बाधाएं: घरेलू खनन, शोधन (रिफाइनिंग) और पुनर्चक्रण क्षमताओं का कम उपयोग; निजी क्षेत्रक की सीमित भागीदारी और सीमित अनुसंधान व विकास (R&D) क्षमताएं।

नीतिगत सुझाव

  • घरेलू अन्वेषण और खनन को मजबूत करना: शुरुआती चरण के अन्वेषण में सशर्त "पहले आओ, पहले पाओ" (FCFS) मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए।
  • घरेलू नवाचार (R&D) का निर्माण: प्रसंस्करण और शोधन प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित मिशन-उन्मुख R&D शुरू करनी चाहिए। 
  • अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति में विविधता लाना: "मूल्य-श्रृंखला स्टैक" साझेदारियों (जैसे- खनिज सुरक्षा साझेदारी - MSP) में भाग लेना चाहिए और विदेशी CETMs प्राप्ति के लिए खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) को मजबूत करना चाहिए।
  • चक्रीयता और शोधन का विस्तार: घरेलू परिशोधन एवं पुनर्चक्रण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन (पूंजी सहायता, आउटपुट से संबद्ध प्रोत्साहन आदि) प्रदान करने चाहिए।
  • संस्थागत संरचना: निरंतर जोखिम मूल्यांकन करने के लिए एक राष्ट्रीय क्रिटिकल रॉ मटेरियल (CRM) विश्लेषण इकाई का गठन करना चाहिए।

महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्य पहलें

  • राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM): महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रक में आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करना।
    • महत्वपूर्ण खनिज पुनर्चक्रण प्रोत्साहन योजना: महत्वपूर्ण खनिजों में पुनर्चक्रण क्षमता के विकास को प्रोत्साहित करना।
  • खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL): वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों के अधिग्रहण के लिए खान मंत्रालय की एक संयुक्त उद्यम कंपनी।
  • दुर्लभ भू-खनिज गलियारे (Rare Earth Corridors): चार राज्यों—ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित किए जा रहे हैं।
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दुर्लभ भू-खनिज गलियारे (Rare Earth Corridors)

ये विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र हैं जहाँ दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (rare earth elements) के अन्वेषण, निष्कर्षण और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए विशेष बुनियादी ढांचा और नीतियां विकसित की जा रही हैं। भारत में ये ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM)

दुर्लभ भू तत्वों सहित महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक दीर्घकालिक और एंड-टू-एंड आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करने के उद्देश्य से भारत सरकार की एक पहल।

राष्ट्रीय क्रिटिकल रॉ मटेरियल (CRM) विश्लेषण इकाई

यह एक प्रस्तावित संस्थागत संरचना है जो महत्वपूर्ण कच्चे माल से संबंधित जोखिमों का निरंतर मूल्यांकन और विश्लेषण करने के लिए स्थापित की जाएगी, ताकि सूचित नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।

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