ये नियम 2021 के नियमों में संशोधन करते हैं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित और सिंथेटिक कंटेंट के विनियमन को सख्त करते हैं।
मुख्य प्रावधान
- सिंथेटिक कंटेंट को कानूनी मान्यता: भारत में पहली बार 'सिंथेटिक रूप से उत्पन्न सूचना' (SGI) की औपचारिक परिभाषा और विनियमन प्रस्तुत किए गए हैं।
- यह मुख्य रूप से डीपफेक और AI-जनित छद्म प्रतिरूपण को लक्षित करता है।
- सामान्य संपादन, शैक्षणिक व प्रशिक्षण संबंधी कंटेंट आदि को इससे बाहर रखा गया है।
- अनिवार्य लेबलिंग: सभी SGI को स्पष्ट रूप से 'कृत्रिम' के रूप में चिह्नित करना अनिवार्य होगा। कंटेंट के स्रोत का पता लगाने के लिए इसमें मेटाडेटा या विशिष्ट पहचानकर्ता सम्मिलित होने चाहिए।
- प्लेटफॉर्म्स को AI लेबल या मेटाडेटा को हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं होगी।
- महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्तियों (SSMIs) के दायित्व: SSMIs को सिंथेटिक कंटेंट के संबंध में उपयोगकर्ता घोषणाओं को सत्यापित करना होगा और प्रकाशन से पहले SGI का स्पष्ट खुलासा सुनिश्चित करना होगा।
- इन नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स अपनी 'सेफ हार्बर' संरक्षण से वंचित ही सकते हैं।
- सेफ हार्बर: आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत यह संरक्षण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बचाता है।
- इन नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स अपनी 'सेफ हार्बर' संरक्षण से वंचित ही सकते हैं।
- प्रतिबंधित कंटेंट: मध्यवर्तियों को बाल यौन शोषण कंटेंट (CSAM), गैर-सहमति वाली अंतरंग छवियां (NCII), फर्जी दस्तावेज या भ्रामक प्रतिरूपण वाले सिंथेटिक कंटेंट को ब्लॉक करना होगा।
- त्वरित अनुपालन समय-सीमा: कानूनी आदेश मिलने पर कंटेंट को हटाने या पहुंच को अक्षम करने की समय-सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
- शिकायत निवारण की समय-सीमा भी 15 दिन से घटाकर 7 दिन कर दी गई है।
AI-जनित कंटेंट और डीपफेक पर अंकुश लगाने की आवश्यकता
अन्य पहलें
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