Select Your Preferred Language

Please choose your language to continue.

कमजोर जनजातीय समूहों को अलग से गिना जा सकता है | Current Affairs | Vision IAS

Daily News Summary

Get concise and efficient summaries of key articles from prominent newspapers. Our daily news digest ensures quick reading and easy understanding, helping you stay informed about important events and developments without spending hours going through full articles. Perfect for focused and timely updates.

News Summary

Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat

कमजोर जनजातीय समूहों को अलग से गिना जा सकता है

1 min read

जनगणना में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को शामिल करना

17 जुलाई को जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (RGI) को एक प्रस्ताव भेजा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य आगामी जनगणना में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को अलग से शामिल करना है। इस अनुरोध का उद्देश्य पहली बार विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों की अलग से गणना करना और उनकी सांस्कृतिक, जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को उजागर करना है।

पृष्ठभूमि और पहल

  • वर्तमान स्थिति:
    • देश में कुल 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) मौजूद हैं, जो 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में फैले हुए हैं।
    • 2011 की जनगणना में 40 PVT समूहों को व्यापक श्रेणी अनुसूचित जनजातियों (STs) की व्यापक श्रेणी में शामिल किया गया था।
  • ऐतिहासिक संदर्भ:
    • 1961 में ढेबर आयोग की रिपोर्ट के बाद PVTGs राजनीतिक चर्चा में आए, जिसमें जनजातीय समूहों के बीच असमानताओं की पहचान की गई थी।
    • आदिम जनजातीय समूह (PTGs) श्रेणी 1973 में निम्नलिखित के आधार पर बनाई गई थी :
      1. प्रौद्योगिकी का पूर्व-कृषि स्तर
      2. निम्न साक्षरता स्तर
      3. आर्थिक पिछड़ापन
      4. घटती या स्थिर जनसंख्या
    • 2006 में, "आदिम" शब्द की नकारात्मक छवि को हटाने के लिए इस शब्द को संशोधित कर PVTG कर दिया गया।

पहल का महत्व

  • सामाजिक-आर्थिक लाभ: PVTGs की अलग से गणना से लक्षित नीतियाँ बनाई जा सकेंगी, जिससे इनके उत्थान और समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।
  • स्वास्थ्य और साक्षरता संबंधी चिंताएं: हाल के अध्ययनों, विशेष रूप से ओडिशा में, ने खराब स्वास्थ्य सूचकांक और PVTGs में महिला साक्षरता दर सबसे कम दर्ज की गई है।
  • सरकारी पहल: प्रधान मंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM JANMAN) वर्ष 2023 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य PVTGs को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

भविष्य की संभावनाएं 

  • मानदंड को अपडेट करना: PVTG की परिभाषा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान मानदंड, बदलती जमीनी वास्तविकताओं को देखते हुए, कुछ समुदायों को बाहर कर सकते हैं।
  • प्रौद्योगिकी में बदलाव: आधुनिकीकरण ने "पूर्व-कृषि स्तर की प्रौद्योगिकी" के उपयोग को बदल दिया है, तथा अब वंचित समुदायों भी अपेक्षाकृत उन्नत उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं।
  • सामाजिक समावेशन: PVTGs की आवश्यकताओं की पहचान करने और उन्हें दूर करने पर महत्वपूर्ण ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि समावेशन के बजाय सामाजिक समावेशन को बढ़ाया जा सके।
  • Tags :
  • PVTGs
Subscribe for Premium Features