हाल ही में, निवेश को आकर्षित करने और आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की सिंगापुर और जापान की आधिकारिक विदेश यात्रा की। मुख्यमंत्री की यह यात्रा भारत में पैरा-डिप्लोमेसी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।
पैरा-डिप्लोमेसी के बारे में
- पैरा-डिप्लोमेसी राज्यों (उप-राष्ट्रीय इकाइयों) को अपने स्वयं के हितों को साधने के लिए विदेशों या विदेशी क्षेत्रों के साथ संबंध बढ़ाने की अनुमति देती है।
- भारत के विदेश मंत्रालय ने 2014 में एक राज्य प्रभाग बनाया था। यह राज्यों को निर्यात, पर्यटन को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद करता है।
महत्व:
- निवेश आकर्षित करने में मदद मिलना: विभिन्न राज्यों द्वारा इसी उद्देश्य से निवेश शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं; जैसे वाइब्रेंट गुजरात, प्रोग्रेसिव पंजाब और वाइब्रेंट गोवा।
- सांस्कृतिक कूटनीति: केरल खाड़ी देशों के साथ संबंध प्रगाढ़ करने के लिए अपने प्रवासियों के संबंधों का उपयोग करता है।
- राष्ट्रीय विदेश नीति में योगदान: जापानी संस्थानों के साथ IIT कानपुर और IIT BHU के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई।
- क्षेत्रीय विकास: वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में बेंगलुरु का उदय हुआ, जबकि चेन्नई और हैदराबाद आईटी और विनिर्माण के केंद्र के रूप में उभरे हैं।
चुनौतियां:
- संघवाद से जुड़ी चिंताएं: विदेश मामले संघ सूची (प्रविष्टि 10) का विषय है। अन्य देशों की सरकारों और प्रतिनिधियों के साथ जुड़ते समय राज्यों को अपनी शक्तियों का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए।
- पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर प्रभाव: राज्यों की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं, विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में।
- उदाहरण के लिए: तमिलनाडु (श्रीलंका के संदर्भ में), पश्चिम बंगाल (बांग्लादेश के संदर्भ में)।
इस प्रकार, पैरा-डिप्लोमेसी आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करती है, लेकिन इसे पूरी तरह से राष्ट्रीय विदेश नीति के अनुरूप होना चाहिए।
ईरान युद्ध के कारण LNG जहाजों के यातायात में वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप पनामा नहर अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रही है।
पनामा नहर के बारे में

- यह एक मानव-निर्मित अंतर-महासागरीय जलमार्ग है। यह जलमार्ग लॉक सिस्टम का उपयोग करता है, जो वाटर लिफ्ट के रूप में कार्य करता है और जहाजों को ऊपर उठाता एवं नीचे लाता है।
- अवस्थिति: पनामा भूडमरूमध्य/ स्थलसंधि (इस्थमस), मध्य अमेरिका।
- संपर्क बिंदु: यह नहर अटलांटिक महासागर (कैरिबियन सागर) और प्रशांत महासागर को जोड़ती है।
- लंबाई: लगभग 82 किमी।
- परिचालन: वर्ष 1914 से क्रियाशील।
- रणनीतिक महत्त्व: यह वैश्विक व्यापार मार्गों को लगभग 8,000 समुद्री मील कम कर देता है।
IAEA ने इजराइल के परमाणु अनुसंधान केंद्र डिमोना के पास ईरानी मिसाइल हमले की रिपोर्ट के बाद “अधिकतम संयम” का आह्वान किया।
- डिमोना (Dimona) नेगेव मरुस्थल में स्थित इजराइल के परमाणु अनुसंधान केंद्र की मेजबानी करने वाला एक दक्षिणी शहर है।
सुर्ख़ियों में संघर्ष के अन्य क्षेत्र:
- नतांज (Natanz) परमाणु संवर्धन केंद्र: यह एक ईरानी केंद्र है।
- साउथ पार्स (South Pars) गैस क्षेत्र: यह ईरान और कतर के बीच विश्व के सबसे बड़े साझा प्राकृतिक गैस क्षेत्र का हिस्सा है।
- लितानी नदी (Litani River): इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में इस नदी पर बने क्रॉसिंग को नष्ट कर दिया गया, जिसका उपयोग हिजबुल्लाह द्वारा किया जा रहा था।
- टायर शहर (Tyre city): दक्षिणी लेबनान में स्थित यह एक तटीय शहर है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
- रास लफान (Ras Laffan) इंडस्ट्रियल सिटी: हाल ही में, कतर का यह मुख्य गैस केंद्र हमले की चपेट में आया।
ऊर्जा संकट के बीच श्रीलंका, भारत द्वारा सहायता प्राप्त त्रिंकोमाली परियोजना को विकसित करने पर विचार कर रहा है।
- त्रिंकोमाली श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित एक प्राकृतिक बंदरगाह है। यह विश्व का दूसरा सर्वोत्तम प्राकृतिक बंदरगाह है।

त्रिंकोमाली परियोजना के बारे में
- वर्ष 2022 में, भारत-श्रीलंका ने त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म के संयुक्त विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- इस ऑयल फार्म का निर्माण 1930 के दशक में अंग्रेजों द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नौसेना को ईंधन की आपूर्ति करना था।
- उद्देश्य: पेट्रोलियम भंडारण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना।
- रणनीतिक और वाणिज्यिक भूमिका: यह हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के पास स्थित है। यह भारत के महासागर (MAHASAGAR) विजन और नेबरहुड फर्स्ट नीति के अनुरूप है।
भारत ने 28 फरवरी, 2026 से जापान के साथ अपनी द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था (मुद्रा स्वैप समझौता) को नवीनीकृत किया है।
- द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था दो-तरफा व्यवस्था है। इसमें दो देश अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर के बदले आपस में बदल सकते हैं।
- मुद्रा स्वैप (Currency Swap) का अर्थ है – दो देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच तय शर्तों के अनुसार एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा का लेन-देन करने का समझौता।
- भारत-जापान द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था की मात्रा: यह पहले की तरह 75 अरब अमेरिकी डॉलर है।
- भारत द्वारा किए गए अन्य ‘मुद्रा स्वैप समझौते (CSA)’: सार्क मुद्रा स्वैप समझौता (2024–27), भारत-संयुक्त अरब अमीरात मुद्रा स्वैप समझौता, भारत-श्रीलंका मुद्रा स्वैप समझौता, आदि।
Article Sources
1 sourceभारत ने ‘भ्रष्टाचार-रोधी कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों के वैश्विक परिचालन नेटवर्क’ (GlobE Network) की 12वीं संचालन समिति की बैठक की मेजबानी की।

भारतीय नौसेना ने 'इंडियन ओशन शिप' (IOS) सागर पहल के दूसरे संस्करण का आयोजन किया।
IOS सागर के बारे में:
- उद्देश्य: यह मित्रवत देशों के नौसैनिक कर्मियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर प्रशिक्षण लेने और साथ चलने में सक्षम बनाता है। इससे परस्पर सहयोग बढ़ता है।
- भागीदारी: इसमें हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) के 16 देशों ने भाग लिया।
- यह भारत के ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (SAGAR) के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- यह व्यापक ‘MAHASAGAR’ (संपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा हेतु पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) फ्रेमवर्क में भी योगदान देता है।
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1 sourceरायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण भारत में आयोजित किया गया।
- 2026 के इस संस्करण की थीम थी: "संस्कार - असर्शन, एकॉमोडेशन, एडवांसमेंट"।
- रायसीना डायलॉग के तहत, रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल (SDI) का पहला संस्करण शुरू किया गया।
रायसीना डायलॉग के बारे में:
- यह भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख सम्मेलन है। यह 2016 से प्रतिवर्ष नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है।
- इसे विदेश मंत्रालय के सहयोग से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जाता है।
- रायसीना प्लेटफॉर्म्स एंड आइडियाज फोरम (RPIF) वह इकाई है, जो रायसीना डायलॉग का प्रशासन और प्रबंधन करती है।