अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) | Current Affairs | Vision IAS

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अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance)

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) ने अपना 10वां स्थापना दिवस मनाया, जिसकी परिकल्पना समान उत्पादन और वितरण के लिए एक वैकल्पिक ऊर्जा संरचना के रूप में की गई है।
  • हिंदू कुश हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र में 1990 के बाद से ग्लेशियर क्षेत्र का 12% हिस्सा कम हो गया है, जिसमें गंगा और ब्रह्मपुत्र घाटियों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।
  • आईएसए के सामने आने वाली चुनौतियों में वित्तपोषण की कमी, व्यापार अवरोध, तकनीकी समस्याएं जैसे कि रुक-रुक कर उत्पादन होना और सदस्य देशों में घरेलू विनिर्माण क्षमता की कमी शामिल हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

11 मार्च, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का 10वां स्थापना दिवस मनाया गया

ISA का महत्व

  • वैकल्पिक ऊर्जा संरचना: भारत के प्रधानमंत्री ने ISA की परिकल्पना एक "वैकल्पिक OPEC" के रूप में की थी। यह ऊर्जा के समान उत्पादन और वितरण हेतु मंच प्रदान करता है  साथ ही जीवाश्म ईंधन संपन्न देशों के एकाधिकार को चुनौती देता है।
  • जलवायु परिवर्तन शमन: यह सतत विकास लक्ष्यों (विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा के लिए SDG 7 और जलवायु कार्रवाई के लिए SDG 13 की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • दक्षिण-दक्षिण सहयोग: यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऊर्जा की कमी वाले विकासशील देशों (वैश्विक दक्षिण) की आवाज को मजबूत करने हेतु एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपकरण के रूप में कार्य करता है। इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर उनकी निर्भरता कम होती है।
  • वित्तीय एवं प्रौद्योगिकीय समेकन: यह अल्पविकसित देशों (LDCs) और लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के लिए सौर वित्तपोषण तथा प्रौद्योगिकियों की लागत को काफी कम करने हेतु वैश्विक मांग को एकीकृत करता है।

ISA के समक्ष चुनौतियां

  • वित्तीय बाधाएं: केवल सार्वजनिक संसाधनों से विशाल धनराशि नहीं जुटाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त, विकासशील देशों में जोखिम की धारणा के कारण निजी वाणिज्यिक पूंजी को आकर्षित करना कठिन बना हुआ है।
  • व्यापार और टैरिफ बाधाएं: सौर फोटोवोल्टिक (PV) सेल और मॉड्यूल पर उच्च मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) टैरिफ, विशेष रूप से अफ्रीकी और प्रशांत द्वीपीय देशों में, लागत प्रभावी सौर परिनियोजन में गंभीर बाधा उत्पन्न करते हैं।
  • प्रौद्योगिकी और अनियमितता की समस्या: "सौर निरंतरता की समस्या" (रात में या खराब मौसम/प्रदूषण के दौरान सौर प्रकाश की कमी) के कारण उन्नत और महंगी ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता होती है, जिसका कई सदस्य देशों के पास अभाव है।
  • घरेलू विनिर्माण की कमी: कई विकासशील देशों में स्वतंत्र रूप से सौर उपकरणों के विनिर्माण हेतु आवश्यक प्रौद्योगिकी क्षमता, गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना और सहायक नीतियों की कमी है।

निष्कर्ष

ISA संधारणीय और लोकतांत्रिक वैश्विक ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक परिवर्तनकारी आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता है। यह भावना वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है) के भारतीय दर्शन पर आधारित है।

भारत के लिए, अपनी घरेलू सौर ऊर्जा उत्पादन वृद्धि को बनाए रखते हुए अपनी "सौर सॉफ्ट पावर" को प्रभावी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में बदलना 21वीं सदी के लिए एक न्यायसंगत और कार्बन-तटस्थ ऊर्जा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक होगा।

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कार्बन-तटस्थ ऊर्जा व्यवस्था

एक ऊर्जा प्रणाली जिसमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को अवशोषित की गई या हटाई गई मात्रा के बराबर किया जाता है, जिससे शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त होता है।

सौर सॉफ्ट पावर

एक देश की सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकी और नीतियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और नेतृत्व स्थापित करने की क्षमता।

वसुधैव कुटुंबकम

एक संस्कृत वाक्यांश है जिसका अर्थ है 'पूरी दुनिया एक परिवार है'। यह भारत की विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जो वैश्विक सहयोग और साझा प्रगति पर जोर देता है।

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