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संक्षिप्त समाचार

30 Apr 2026
14 min

संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में इंडियाAI मिशन के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया। 

इंडियाAI मिशन से जुड़े मुद्दे एवं मुख्य सुझाव

समिति द्वारा रेखांकित मुख्य मुद्दे

मुख्य सुझाव

आवंटित निधियों का कम उपयोग: मिशन ने वित्त वर्ष  2025-26 में (दिसंबर 2025 तक) अपने संशोधित अनुमान (RE) का केवल 32% उपयोग किया। परिणामस्वरूप, 2026-27 के बजट अनुमान (BE) में प्रस्तावित आवश्यकताओं के अनुपात में आवंटन आधा कर दिया गया।

वित्तीय अनुशासन: समिति ने MeitY से वित्तीय अनुशासन मजबूत करने, मिशन के सभी स्तंभों (घटकों) में क्रियान्वयन तेज करने और खर्च को अनुकूलित करने का आग्रह किया।

अवसंरचना से संबद्ध बाधाएं: GPU क्लस्टर के विकास के बावजूद हार्डवेयर की उच्च लागत, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने में देरी और कर से संबंधित समस्याएं बनी हुई हैं।

हितधारकों से परामर्श: MeitY को हार्डवेयर की खरीद और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी बाधाओं से निपटने के लिए इस क्षेत्रक के व्यापक हितधारकों से परामर्श करना चाहिए। 

पर्यावरण पर प्रभाव: विशाल कंप्यूटिंग अवसंरचना स्थापित करने में डेटा सेंटरों द्वारा अत्यधिक बिजली और जल की खपत होती है।

पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना: MeitY को संप्रभु डेटा सेंटर स्थापित करने से जुड़े पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने हेतु पर्यावरण विशेषज्ञों से परामर्श करना चाहिए।

अनुसंधान और विकास (R&D) तथा समावेशन की चुनौतियां: स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने में विशेष चुनौतियां हैं। साथ ही, AI में अनुसंधान हेतु वित्तपोषण मुख्यतः IITs जैसे प्रमुख संस्थानों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक सीमित है। इससे व्यापक AI प्रणाली का विकास बाधित होता है। 

व्यापक R&D का मूल्यांकन: MeitY को नई पहलों जैसे अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन तथा अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष के वास्तविक प्रभाव का आकलन करना चाहिए, ताकि अनुसंधान का लोकतंत्रीकरण हो सके।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और प्रतीक्षा ट्रस्ट ने ब्रेन को-प्रोसेसर पर 'मूनशॉट' परियोजना शुरू की। 

  • मूनशॉट परियोजना का उद्देश्य शरीर के अंदर लगाने योग्य (इम्प्लांटेबल) और नॉन-इनवेसिव (बिना सर्जरी के इस्तेमाल होने वाले) ब्रेन को-प्रोसेसर विकसित करना है। ये उपकरण मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों (न्यूरल गतिविधि) को रिकॉर्ड करके उन्हें समझेंगे और संसाधित करेंगे, और फिर न्यूरल स्टिमुलेशन (तंत्रिका उद्दीपन) के माध्यम से इन संकेतों को दोबारा मस्तिष्क में भेजेंगे। 

ब्रेन को-प्रोसेसर के बारे में

  • ब्रेन को-प्रोसेसर ऐसे AI-आधारित, द्विदिशीय (बिडायरेक्शनल) न्यूरल इंटरफेस होते हैं, जो मस्तिष्क से आने वाले संकेतों को समझते (डिकोड) और उनका विश्लेषण करते हैं, और फिर उन्हें दोबारा मस्तिष्क में भेजते हैं (री-एन्कोड)। 
  • सामान्य ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) से अलग, ये केवल संकेत पढ़ने तक सीमित नहीं होते। ये मस्तिष्क की पूरी संज्ञानात्मक प्रक्रिया जैसे अनुभूति (Perception)ध्यान (Attention), निर्णयन और शरीर की गतिविधियों का नियंत्रण (मोटर कंट्रोल) को ध्यान में रखकर कार्य करते हैं। 
  • प्राथमिक लक्ष्य: स्ट्रोक से प्रभावित लोगों में हाथ को आगे बढ़ाने और चीज़ों को पकड़ने की क्षमता को फिर से बहाल करना।

नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन (NIBS) के बारे में

  • यह एक ऐसी तकनीक है, जो सर्जिकल प्रत्यारोपण के बिना मस्तिष्क की गतिविधि को नियंत्रित करती है।
  • इसमें ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (TMS) और ट्रांसक्रेनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) जैसी पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।
  • TMS और tDCS में मस्तिष्क के खुले हिस्से पर इलेक्ट्रोड लगाने की आवश्यकता नहीं होती और इनका उपयोग न्यूरोलॉजिकल, मनोचिकित्सीय और न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों पर शोध में किया जाता है।

वी.ओ. चिदम्बरनार पत्तन प्राधिकरण डिजिटल ट्विन पहल शुरू करने वाला भारत का पहला बंदरगाह बना

  • वी.ओ. चिदंबरनार पत्तन (पूर्व में तूतीकोरिन पत्तन), भारत के 13 महापत्तनों में से एक है। यह तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्थित एक कृत्रिम गहरा समुद्री पत्तन है।
    • इसका इतिहास 123 ईस्वी से शुरू होता है, जब ग्रीस के टॉलेमी ने तूतीकोरिन को पश्चिमी और पूर्वी देशों के साथ समुद्री व्यापार में संलग्न एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र के रूप में वर्णित किया था।
    • तूतीकोरिन सदियों से मोती मत्स्यन (Pearl Fishery) का केंद्र रहा है।

डिजिटल ट्विन पहल के बारे में

  • डिजिटल ट्विन किसी भौतिक वस्तु या प्रणाली का एक आभासी प्रतिनिधित्व (virtual representation) है। यह वास्तविक समय के डेटा (real-time data) का उपयोग करके अपने वास्तविक विश्व के समकक्ष के व्यवहार, प्रदर्शन और स्थितियों को सटीक रूप से दर्शाता है। 
    • डिजिटल ट्विन किसी वस्तु, उत्पाद या प्रणाली के डिजाइन एवं उत्पादन से लेकर रखरखाव व डिकमीशनिंग (decommissioning) तक, उसकी पूर्ण अस्तित्व अवधि की निरंतर निगरानी, सिमुलेशन और विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है।
  • पत्तन प्रबंधन के लिए उपयोग: यह पत्तन की अवसंरचना, परिचालनरत संपत्तियों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की एक वास्तविक समय की आभासी प्रतिकृति (virtual replica) तैयार करेगी। इससे पत्तन में परिचालन दृश्यता, पूर्वनुमानकारी विश्लेषण (predictive analytics) और डेटा-संचालित निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा। 
    • प्रयुक्त प्रौद्योगिकियां: इस प्लेटफॉर्म में IoT सेंसर, GPS ट्रैकिंग, LiDAR मैपिंग, ड्रोन इमेजिंग और CCTV नेटवर्क आदि तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने 'व्हीकल-टू-एवरीथिंग' या V2X टेक्नोलॉजी के लिए एयरवेव स्पेक्ट्रम आवंटन शुरू कर दिया है। 

V2X टेक्नोलॉजी के बारे में

  • यह वाहनों को एक-दूसरे के साथ (V2V), पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों जैसे अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के साथ (V2P), और सड़क किनारे के बुनियादी ढांचे के साथ (V2I) संवाद/संचार करने में सक्षम बनाता है। 
  • लाभ: यह तकनीक वाहनों को सड़क दुर्घटना के सर्वाधिक शिकार उपयोगकर्ताओं (जैसे पैदल यात्री, साइकिल चालक) को “देखने” और पहचानने में मदद करती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। यातायात दक्षता में सुधार होता है, आदि।  

भारतीय रेलवे ने कई जोन में कवच प्रणाली के विस्तार को मंजूरी दी।

कवच {स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली} के बारे में:

  • यह ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) है। यदि दो ट्रेनें टकराने की स्थिति में हों, तो यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर टक्कर रोकती है।
  • विकास: भारतीय रेलवे के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा। 
  • प्रमुख विशेषताएं: 
    • लोकोमोटिव को निरंतर रीयल-टाइम अपडेट प्रदान करना।
    • भी प्रकार की ट्रेन टक्करों की रोकथाम: आमने-सामने, पीछे से और बगल से टक्कर (लोको से लोको संचार)। 
    • सिग्नल को पार करने पर खतरे को रोकना। 
    • अन्य: कोहरे वाले मौसम के लिए लाइन-साइड सिग्नल को दोहराना, स्वचालित हॉर्न एक्टिवेशन और आपातकालीन (SoS) संदेश प्रसारित करना।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि GARBH-INi पहल के अंतर्गत 12,000 महिलाओं पर यह अध्ययन समयपूर्व जन्म (preterm births) की समस्या से निपटने हेतु स्वदेशी, AI-आधारित समाधान विकसित करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। 

गर्भ-इनी के बारे में 

  • यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा समर्थित एक प्रमुख कार्यक्रम है।
  • लक्ष्य: गर्भावस्था के प्रतिकूल परिणामों को कम करना।
  • इस पहल ने एक राष्ट्रीय बायोरिपोजिटरी और 'GARBH-INi-DRISHTI' डेटा-साझाकरण प्लेटफॉर्म स्थापित किया है। यह अनुसंधान समुदाय के लिए व्यापक पहुंच सुनिश्चित करता है।
  • गर्भ-इनी प्रेगनेंसी कोहोर्ट दक्षिण एशिया के सबसे बड़े प्रेगनेंसी कोहोर्ट में से एक है। इसे 2015 से गुरुग्राम सिविल हॉस्पिटल में स्थापित किया गया।  

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' (REPM) के विनिर्माण के लिए एकीकृत सुविधाएं स्थापित करने हेतु बोलियां आमंत्रित की हैं।

सिंटर्ड REPM विनिर्माण प्रोत्साहन योजना के बारे में:

  • लक्ष्य: प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता स्थापित करना। इसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड को धातुओं में, धातुओं को मिश्र धातुओं में और मिश्र धातुओं को तैयार REPM में बदलना शामिल है। 
  • लाभार्थी आवंटन: वैश्विक प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से 5 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा, जिनमें प्रत्येक को अधिकतम 1,200 MTPA क्षमता आवंटित की जाएगी। 
  • वित्तीय परिव्यय: ₹7,280 करोड़ (पूंजीगत सब्सिडी: ₹750 करोड़, बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन: ₹6,450 करोड़)। 

REPM के बारे में: 

  • ये रेयर अर्थ तत्वों के मिश्र धातुओं से बने सबसे शक्तिशाली प्रकार के स्थायी चुंबक होते हैं।  
  • उदाहरण: नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन।
  • उपयोग: इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में।

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन ने वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 रिपोर्ट जारी की है। यह एटलस बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे के वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अनुमान प्रदान करता है। 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मोटापे यानी ओबेसिटी को एक पुरानी, बार-बार होने वाली बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसमें शरीर में असामान्य या अत्यधिक वसा का संचय होता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है।
    • इसका निदान लोगों के वजन और लंबाई (कद) को मापने और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की गणना करके किया जाता है:
      • BMI = वजन (किलोग्राम) / लंबाई² (मीटर²)
    • स्कूली आयु के बच्चों (5–19 वर्ष) के लिए, मोटापा तब माना जाता है जब यह WHO ग्रोथ रेफरेंस मीडियन से 2 मानक विचलन (standard deviations) से अधिक हो।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

वैश्विक परिदृश्य

  • मोटापा: स्कूली उम्र के बच्चों (5-19 वर्ष) में मोटापे का प्रसार 1975 के 4% से बढ़कर 2022 में लगभग 20% हो गया।
    • इनमें से अधिकांश बच्चे मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। 
  • प्रभाव: बचपन का मोटापा अक्सर वयस्क होने तक बना रहता है। इससे गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे कि मधुमेह, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मोटापे के उच्च प्रसार वाले देश: केवल दस देशों  में ही उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले 20 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चे रहते हैं। इनमें चीन, भारत और अमेरिका में सबसे अधिक बच्चे हैं। 

भारतीय परिदृश्य

  • उच्च प्रसार: अधिक वजन और मोटापे के साथ जी रहे बच्चों के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। 
    • भारत में स्कूली उम्र के 4.1 करोड़ बच्चों का BMI उच्च है। 
  • गंभीर बीमारी के संकेतक: 2025 में, लगभग 83.9 लाख बच्चों में BMI-जनित 'मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड लिवर डिजीज' (MASLD) दर्ज की गई। वहीं, 29.8 लाख बच्चे BMI-जनित उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित थे। 

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने GLP-1 दवाइयों के बढ़ते दुरुपयोग की चिंताओं के बीच फार्मास्यूटिकल कंपनियों को इन दवाइयों का विज्ञापन करने से प्रतिबंधित कर दिया है। 

GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट) दवाइयों के बारे में:  

  • यह दवाइयों का एक वर्ग है। ये दवाइयां शरीर में प्राकृतिक GLP-1 हार्मोन की तरह कार्य करती हैं और ब्लड शुगर स्तर तथा भूख को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
    • इन दवाइयों में ओज़ैम्पिक, वेगोवी, आदि शामिल हैं।
  • इन्हें मूल रूप से टाइप 2 मधुमेह के प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन अब इनका उपयोग मोटापा कम करने और वजन घटाने के लिए भी किया जा रहा है।
    • ये दवाइयां भोजन के पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं और पेट भरे होने का एहसास बढ़ाती हैं। इससे भोजन का सेवन कम हो जाता है। 
  • कुछ GLP-1 दवाइयां दिल का दौरा, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर के जोखिम को कम करने के साथ-साथ टाइप-2 मधुमेह, किडनी और लिवर रोगों की संभावना को भी कम कर सकती हैं।

वसा कोशिकाएं (सफेद वसा और भूरी वसा, दोनों) वजन घटाने के भावी उपचारों के लिए एक आशाजनक लक्ष्य बन सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे ऊष्मा के लिए ऊर्जा का उपयोग करती हैं। 

सफेद और भूरी वसा के बारे में: 

  • वयस्कों में सफेद वसा सबसे प्रचुर मात्रा में होती है। भूरी वसा मुख्य रूप से गर्दन और ऊपरी छाती में पाई जाती है। 
  • प्राथमिक कार्य: सफेद वसा ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में ऊर्जा संग्रहीत करती है।
    • भूरी वसा ऊर्जा का उपयोग करती है और कैलोरी को जलाती है। यह रासायनिक ऊर्जा को ऊष्मा (Heat) में परिवर्तित करती है। 
  • सफेद वसा एक अंतःस्रावी अंग के रूप में कार्य करती है। यह लेप्टिन (भूख कम करने के लिए) और एडिपोनेक्टिन (इंसुलिन को नियमित करने के लिए) जैसे हार्मोन छोड़ती है। 
    • ठंडे तापमान के संपर्क में आने पर मस्तिष्क द्वारा भूरी वसा प्राकृतिक रूप से सक्रिय हो जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करना है। 

सर्न (CERN) के वैज्ञानिकों ने पहली बार सड़क मार्ग से सफलतापूर्वक एंटीप्रोटॉन का परिवहन किया। 

  • यह बड़ी उपलब्धि है क्योंकि एंटीमैटर आमतौर पर मैटर के संपर्क में आने पर नष्ट हो जाता है। इसी कारण से पहले इसका परिवहन बहुत कठिन था। 

एंटीप्रोटॉन के बारे में:

  • ये एंटीमैटर कण हैं, जो द्रव्यमान और स्पिन के मामले में प्रोटॉन के समान होते हैं। हालांकि, इन पर विपरीत (ऋणात्मक) विद्युत आवेश होता है। 
  • पहली बार एमिलियो सेग्रे और ओवेन चेम्बरलेन द्वारा इनकी पहचान की गई थी। इसके लिए उन्हें 1959 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। 
  • यह प्रयोग मैटर-एंटीमैटर से जुड़े रहस्यों को सुलझाने में मदद करेगा।
    • बिग बैंग (Big Bang) के बाद समान मात्रा में मैटर और एंटीमैटर उत्पन्न होना चाहिए था। इसके बावजूद वर्तमान ब्रह्मांड में केवल मैटर का ही प्रभुत्व है।

खगोलविदों ने मीरकैट (MeerKAT) टेलीस्कोप का उपयोग कर सबसे चमकीले और सबसे दूरस्थ मेगामेजर (Megamaser) की खोज की है। 

  • दक्षिण अफ्रीका में स्थित MeerKATस्क्वायर किलोमीटर एरे (SKA) टेलीस्कोप का अगला संस्करण है। 

मेगामेजर के बारे में:

  • यह विद्युत-चुंबकीय विकिरण की एक विशाल किरण है। यह तब उत्सर्जित होती है, जब दो आकाशगंगाएँ तीव्रता के साथ एक दूसरे में विलीन हो जाती है।
    • ब्रह्मांडीय टकराव के दौरान, गैस के विशाल बादल संकुचित हो जाते हैं। इससे हाइड्रॉक्सिल (OH) अणुओं के बड़े भंडार उत्तेजित हो जाते हैं, जो उच्च ऊर्जा वाले माइक्रोवेव मुक्त करते हैं। 
  • यह मानव निर्मित लेजर के समान है, जिसमें लेजर कणों को उत्तेजित करके परिणामी प्रकाश तरंगों को दर्पण की सहायता से आगे बढ़ाया जाता है। 
    • हालांकि, मेगामेजर के मामले में, दृश्य प्रकाश की बजाय माइक्रोवेव प्रवर्धित (विस्तारण) होता है। 
  • ये दुर्लभ घटक ब्रह्मांडीय दिशा-सूचक के रूप में कार्य करते हैं। ये शुरुआती ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के बारे में महत्वपूर्ण विवरण प्रदान करते हैं। 

वैज्ञानिकों ने पहली बार आकाशगंगा (Milky Way) डिस्क के पास स्थित छोटे आणविक बादलों के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र के ढांचे को देखा है। इसका उद्देश्य तारा निर्माण में चुंबकीय क्षेत्र की भूमिका को बेहतर ढंग से समझना है। 

आणविक बादलों के बारे में:

  • यह गैस और धूल का एक अंतरतारकीय (Interstellar) बादल है जिसमें अणुओं का निर्माण हो सकता है, जिनमें सबसे सामान्य हाइड्रोजन Hहै।
  • माना जाता है कि हमारे सूर्य का निर्माण भी पास के सुपरनोवा द्वारा ट्रिगर किए गए इसी तरह के आणविक बादल के विघटन से हुआ था।
  • विशेषताएं: यह अपने आंतरिक धूल कणों के कारण अपारदर्शी होता है। इन काले बादलों का आकार अनियमित होता है और इनकी कोई स्पष्ट बाहरी सीमा नहीं होती।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR-NCL) ने डाइमिथाइल ईथर (DME) उत्पादन प्रक्रिया की तकनीक विकसित की है। 

  • DME को 'दूसरी पीढ़ी का ईंधन/बायो-फ्यूल' माना जा सकता है। इसका उपयोग LPG के संधारणीय विकल्प के रूप में किया जाता है। 

डाइमिथाइल ईथर (DME) के बारे में:

  • प्रकृति: यह रंगहीन गैस है जिसमें हल्की ईथर जैसी गंध होती है। यह दाब में तरल में बदल जाती है। 
  • गुणधर्म: यह अक्रिय, गैर-संक्षारक और गैर-कैंसरकारी है। इसकी विषाक्तता कम होती है। यह लंबे समय तक हवा के संपर्क में रहने पर पेरोक्साइड नहीं बनाती है। 
  • उपयोग: ईंधन, एरोसोल प्रणोदक, विलायक और प्रशीतक में। 
  • ईंधन के रूप में लाभ: यह स्वच्छ रूप से जलती है और इस प्रक्रिया में सल्फर ऑक्साइड (SOx) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और कालिख का उत्सर्जन कम होता है। 
    • इसका कैलोरी मान और तापीय क्षमता पारंपरिक ईंधनों के समान हैं। इसे LPG के साथ (20% तक) मिलाया जा सकता है। इसे इंडियन कोल, मेथनॉल या कैप्चर किए गए CO₂ आदि से उत्पादित किया जा सकता है।

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नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF)

भारत में अनुसंधान, विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक प्रमुख एजेंसी। इसका उद्देश्य अकादमिक और औद्योगिक अनुसंधान के बीच तालमेल स्थापित करना है।

अनुसंधान और विकास (R&D)

यह व्यवस्थित जांच और प्रयोग है जिसका उद्देश्य नए ज्ञान का सृजन करना और मौजूदा ज्ञान का उपयोग करके नई प्रक्रियाओं, उत्पादों या सेवाओं को विकसित करना है।

संप्रभु डेटा सेंटर (Sovereign Data Center)

एक डेटा सेंटर जो एक देश की सीमाओं के भीतर स्थित है और उस देश के कानूनों और विनियमों के अधीन संचालित होता है। इसका उद्देश्य डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता सुनिश्चित करना है।

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