आर्टेमिस II चंद्र मिशन (Artemis II Moon Mission) | Current Affairs | Vision IAS

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आर्टेमिस II चंद्र मिशन (Artemis II Moon Mission)

22 May 2026
1 min

In Summary

  • नासा का मानवयुक्त चंद्र मिशन, आर्टेमिस II, 1 अप्रैल, 2026 को एसएलएस और ओरियन अंतरिक्ष यान का उपयोग करते हुए 10 दिवसीय मिशन के लिए लॉन्च किया गया था।
  • इस मिशन का उद्देश्य मानवयुक्त प्रणालियों का परीक्षण करना, आपातकालीन संचालन का प्रदर्शन करना और चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति और मंगल ग्रह के अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त करना है।
  • आर्टेमिस II में ऐतिहासिक चालक दल का प्रतिनिधित्व किया गया है, जिसमें चंद्रमा के निकट की यात्रा करने वाली पहली महिला और अश्वेत व्यक्ति शामिल हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, नासा (NASA) के ऐतिहासिक चंद्र मिशन के बाद आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौट आए हैं।

आर्टेमिस II चंद्र मिशन के बारे में

  • मिशन का प्रकार: यह नासा (NASA) के आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत एक मानवयुक्त चंद्र फ्लाईबाई मिशन है। 
  • प्रक्षेपण तिथि: 1 अप्रैल, 2026
  • अवधि: 10 दिन
  • प्रक्षेपण यान: स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS)
    • स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) नासा (NASA) का एक अत्यधिक भार वहन कर सकने वाला (सुपर हैवी-लिफ्ट) रॉकेट है। यह एक ही मिशन में ओरियन अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष यात्रियों और पेलोड को सीधे चंद्रमा पर भेजने में सक्षम है। 
  • अंतरिक्ष यान: ओरियन अंतरिक्ष यान।
    • ओरियन का निर्माण नासा (NASA) और लॉकहीड मार्टिन द्वारा किया गया है। यह अंतरिक्ष यात्रियों को सुदूर अंतरिक्ष में ले जाने और चंद्रमा के समीप से उच्च गति पर उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने में सक्षम है।
  • मिशन के प्रमुख उद्देश्य:
    • चालक दल: उड़ान के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित और सक्षम वातावरण प्रदान करने तथा उनकी पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की क्षमता का प्रदर्शन करना। 
    • प्रणालियाँ: मानवयुक्त चंद्र अभियान के लिए आवश्यक प्रणालियों और संचालन का प्रदर्शन करना। इसके अंतर्गत ग्राउंड सिस्टम से लेकर अंतरिक्ष में उपयोग होने वाले हार्डवेयर तक शामिल हैं। साथ ही, इसमें विकास से लेकर प्रक्षेपण, उड़ान तथा पुनर्प्राप्ति (recovery) तक की सभी प्रक्रियाएं शामिल हैं। 
    • आपातकालीन संचालन: आपातकालीन प्रणाली की क्षमताओं का प्रदर्शन करना और व्यावहारिक सीमा तक संबंधित संचालनों को प्रमाणित करना। आवश्यकता पड़ने पर इसमें अभियान रोकने और बचाव की प्रक्रियाएं शामिल हैं।

आर्टेमिस कार्यक्रम (Artemis Program)

  • मिशन के लक्ष्य: आर्टेमिस कार्यक्रम, नासा की वह पहल है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पुनः चंद्रमा पर भेजना, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करना तथा भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की आधारशिला तैयार करना है। 
  • नाम की उत्पत्ति: इस कार्यक्रम का नाम यूनानी पौराणिक कथाओं में वर्णित शिकार की देवी आर्टेमिस के नाम पर रखा गया है, जो अपोलो की जुड़वाँ बहन मानी जाती हैं। यह नाम कार्यक्रम के अपोलो मिशनों से संबंध को दर्शाता है, साथ ही उनसे इसकी अलग पहचान भी स्थापित करता है। 

आर्टेमिस मिशन (The Artemis Missions)

  • आर्टेमिस I (2022): यह स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) और ओरियन का एक मानवरहित परीक्षण मिशन था जिसने चंद्रमा की परिक्रमा की और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आया।
  • आर्टेमिस II: यह कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन होगा, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्रियों का दल चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगा, लेकिन उसकी सतह पर उतरेगा नहीं। 
  • आर्टेमिस III: प्रारंभ में चंद्रमा पर उतरने वाले मिशन के रूप में इसकी योजना बनाई गई थी, लेकिन अब यह भविष्य के चंद्र अभियानों हेतु डॉकिंग प्रक्रियाओं का परीक्षण करने के लिए दल को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजेगा। 
  • आर्टेमिस IV: वर्ष 2028 के लिए नियोजित यह मिशन स्टारशिप का उपयोग करके दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारेगा, जबकि अन्य दो अंतरिक्ष यात्री ओरियन पर सवार होकर चंद्र कक्षा में ही रहेंगे।
  • आर्टेमिस V और आगे के मिशन: भविष्य के मिशनों का उद्देश्य चंद्रमा पर आधार (lunar base) स्थापित करना, रोवर्स तैनात करना तथा जल और ऑक्सीजन जैसे संसाधनों का निष्कर्षण करना है। अतः नासा प्रत्येक छह महीने में मानवयुक्त मिशन भेजने की योजना बना रहा है। 

आर्टेमिस समझौते (The Artemis Accords)

  • इसकी स्थापना वर्ष 2020 में नासा और अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा शांतिपूर्ण अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। 
  • यह समझौता बाह्य अंतरिक्ष संधि, पंजीकरण कन्वेंशन, तथा बचाव और वापसी समझौते के प्रति हस्ताक्षरकर्ताओं की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। साथ ही, यह नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण और उपयोग के लिए जिम्मेदार मानदंडों को भी दोहराता है।
  • सदस्य राष्ट्र: 67; भारत भी इसका सदस्य है।

अपोलो बनाम आर्टेमिस 

  • आर्टेमिस कार्यक्रम अपोलो कार्यक्रम का आधुनिक संस्करण है।
    • अपोलो कार्यक्रम नासा (NASA) के शुरुआती मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें अपोलो चंद्र लैंडिंग भी शामिल थी। 
  • अपोलो मिशन शीत युद्ध से प्रेरित था, जबकि आर्टेमिस शांतिपूर्ण वैश्विक सहयोग को महत्व देता है। 
  • अपोलो मिशनों में चंद्रमा की सतह पर अल्पकालिक यात्राएं की गई थीं, जबकि आर्टेमिस का उद्देश्य भविष्य में मंगल मिशनों की तैयारी हेतु चंद्रमा पर स्थायी आधार स्थापित करना है। 

वैज्ञानिक प्रयोग

  • अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य अध्ययन 
    • आर्चर (ARCHeR): इसका उद्देश्य सुदूर अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य और प्रदर्शन से संबंधित डेटा एकत्र करना है। इसके लिए यह अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य, गतिविधि और नींद के पैटर्न की निगरानी करेगा। 
    • अवतार (AVATAR): यह चालक दल के स्वास्थ्य पर सूक्ष्म गुरुत्व (माइक्रोग्रैविटी) और बढ़े हुए विकिरण के प्रभावों का अध्ययन करता है। इस कार्य के लिए यह ऑर्गन-ऑन-ए-चिप उपकरणों का उपयोग करता है। 
    • इम्यून बायोमार्कर: यह रक्त और लार के नमूनों का विश्लेषण कर यह समझने का प्रयास करेगा कि गहरे अंतरिक्ष की यात्रा मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को किस प्रकार प्रभावित करती है। 
    • आर्टेमिस II मानक उपाय: यह अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य से संबंधित मानकीकृत डेटा एकत्र कर एक डेटा बैंक तैयार करेगा, जिससे भविष्य के शोधकर्ताओं को अध्ययन में सहायता मिलेगी। 
    • विकिरण अध्ययन: यह ओरियन स्पेसक्राफ्ट कैप्सूल के अंदर और बाहर विकिरण स्तरों की निगरानी करेगा, ताकि गहरे अंतरिक्ष के विकिरणीय वातावरण का बेहतर आकलन किया जा सके। 
  • चंद्र विज्ञान
    • भूवैज्ञानिक अवलोकन: चंद्रमा के सुदूर हिस्से में तीन घंटे परिक्रमण  (फ्लाईबाई) के दौरान चालक दल ने क्षेत्र के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने लावा प्रवाह और इम्पैक्ट क्रेटरों का अध्ययन किया तथा उनकी तस्वीरें लीं।
  • अंतर्राष्ट्रीय क्यूबसैट प्रयोग (International CubeSat Experiments)
    • ATENEA (अर्जेंटीना का CONAE): इसका उद्देश्य पृथ्वी के विकिरण स्पेक्ट्रम को मापना, विकिरण परिरक्षण विधियों का आकलन करना तथा GPS डेटा एकत्र करना है। इसके साथ ही, यह एक लंबी दूरी के संचार लिंक को भी प्रमाणित करेगा। 
    • TACHELES (जर्मन एयरोस्पेस सेंटर): यह भविष्य में चंद्रमा पर चलने में सक्षम वाहन प्रौद्योगिकियों को डिजाइन करने में मदद करेगा। इसके लिए यह मापेगा कि अंतरिक्ष का वातावरण विद्युत घटकों को कैसे प्रभावित करता है। 
    • के-रेड क्यूब (K-Rad Cube) (दक्षिण कोरिया का KASA): इसका उद्देश्य वैन एलन विकिरण बेल्ट के भीतर जैविक प्रभावों और अंतरिक्ष विकिरण को मापना है।
    • SHMS (सऊदी अंतरिक्ष एजेंसी): इसका उद्देश्य पृथ्वी से विभिन्न दूरियों पर अंतरिक्ष के मौसम को मापना है। 

महत्व

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: वर्ष 1972 में अपोलो 17 के बाद 50 वर्षों में चंद्रमा पर जाने वाला यह पहला मानवयुक्त मिशन है।
  • सुदूर अंतरिक्ष में मानव सुरक्षा: यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी सर्विस मॉड्यूल और ओरियन की जीवन-रक्षक प्रणालियों का कठोर परीक्षण करता है, जिससे सतत और दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त होता है। 
  • ऐतिहासिक चालक दल प्रतिनिधित्व: यह उड़ान चंद्रमा के समीप पहली महिला (क्रिस्टीना कोच), पहले अश्वेत व्यक्ति (विक्टर ग्लोवर) और पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री (कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन) को भेजकर अनेक ऐतिहासिक बाधाओं को समाप्त करती है। 
  • अत्यधिक दूरियां: यह मिशन चार सदस्यीय दल को इतिहास में किसी भी मानव द्वारा तय की गई दूरी से अधिक सुदूर अंतरिक्ष में, चंद्रमा के निकट और उसके दूरस्थ भाग (far side) तक ले जाएगा। 
  • भविष्य के मिशन: यह मिशन भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करेगा।

निष्कर्ष 

आर्टेमिस II चंद्र अन्वेषण से आगे बढ़कर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। मानवयुक्त सुदूर अंतरिक्ष प्रणालियों का सफल परीक्षण करके यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी आधार स्थापित करने और भविष्य के मंगल अभियानों की मजबूत नींव तैयार करता है। यह मिशन इस बात को भी सिद्ध करता है कि अब अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विविधता मानवता के अंतरिक्ष विस्तार की प्रमुख प्रेरक शक्ति बन चुके हैं।

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