सुर्ख़ियों में क्यों?
अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक राष्ट्रपति ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं में भागीदारी तथा वित्तीय योगदान समाप्त करने का निर्णय लिया।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के पीछे हटने के कारण
- असंगत वित्तीय बोझ को समाप्त करना: प्रशासन का तर्क है कि अमेरिका अरबों डॉलर ऐसे खराब प्रबंधन वाले नौकरशाही तंत्रों पर खर्च करता है, जिनसे अपेक्षित प्रतिफल प्राप्त नहीं होता।
- यू एस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) (अब विघटित) को वर्ष 2024 के बजट में 44.2 अरब डॉलर आवंटित किए गए थे, जो 2024 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा दर्ज कुल मानवीय सहायता का लगभग 42% था।
- राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा: प्रशासन का कहना है कि अनेक अंतरराष्ट्रीय निकाय अमेरिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं तथा उसकी घरेलू नीतियों पर बाहरी दबाव डालने का प्रयास करते हैं।
- "अमेरिका प्रथम" नीति: अमेरिका बहुपक्षवाद से हटकर अंतरराष्ट्रीय सहमति की अपेक्षा राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की नीति अपना रहा है।
- U.S. के हटने से UNFCCC और IPCC के बजट में 22% की कमी होने की संभावना है, जिससे USA में वेलफेयर पर किया जाने वाला व्यय बढ़ सकता है।
- आर्थिक समायोजन: "जलवायु रूढ़िवादिता" के माध्यम से कार्बन-उत्सर्जन में कमी या ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले निकायों को अमेरिका के जीवाश्म ईंधन संबंधी हितों और आर्थिक विकास के लिए प्रतिकूल माना गया है।
- वैचारिक असहमति: प्रशासन ने उन संगठनों के प्रति आपत्ति व्यक्त की है जो तथाकथित "वैश्विकवादी एजेंडा" को प्राथमिकता देते हैं। इससे उजागर होता है कि ये तरीके हमेशा उसकी पॉलिसी की वरीयता के हिसाब से नहीं हो सकते हैं।
- उदाहरण के लिए, UNESCO से हटने को इस दावे के आधार पर सही ठहराया गया कि एजेंसी "जागरूक, बांटने वाले सांस्कृतिक और सामाजिक कारणों" के साथ-साथ इजरायल विरोधी झुकाव का भी समर्थन करती है।
वे प्रमुख संगठन जिनसे अमेरिका हट रहा है
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बहुपक्षीय संगठनों पर संभावित प्रभाव
- मानवीय और वैश्विक स्वास्थ्य संकट: 'द लैंसेट' के एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती से 2030 तक रोके जा सकने वाले कारणों से 2.2 करोड़ से अधिक मृत्यु हो सकती हैं।
- चीन के प्रभाव मे वृद्धि: अमेरिकी पीछे हटने से चीन को संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और वैश्विक बाजारों में प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
- उदाहरणार्थ, अंतरराष्ट्रीय जलवायु मंचों में अमेरिकी आर्थिक प्रभाव के अभाव में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में प्रमुख भूमिका निभा सकती है।
- बहुपक्षीय बजट में कमी: संयुक्त राष्ट्र का नियमित बजट 2026 में पहले से ही 7% घट रहा है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन की कुल आय का लगभग 20% कम हो रहा है।
- असमान मानक: सार्वभौमिक नियमों के स्थान पर वैश्विक सहयोग छोटे, अस्थायी तंत्रों और द्विपक्षीय समझौतों में विभाजित हो रहा है, जिससे वैश्वीकरण और बहुपक्षीय संगठनों पर विश्वास प्रभावित हो रहा है।
- जलवायु परिवर्तन: ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के वैश्विक प्रयासों में बाधा उत्पन्न होगी, क्योंकि अन्य देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं को टालने का बहाना बना सकते हैं।
- बहुपक्षवाद का विखंडन: अमेरिका के हटने से अंतरराष्ट्रीय शासन व्यवस्था कमजोर होगी, शक्ति प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी और संरक्षणवाद तथा क्षेत्रीय गुटों की तरफ झुकाव बढ़ेगा।
- वैश्विक शांति: संयुक्त राष्ट्र पीस बिल्डिंग कमीशन में अमेरिकी योगदान के अभाव से संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों (जैसे अफ्रीका या कैरेबियन) में शांति प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र सुधार की आवश्यकता: यह वर्तमान सर्वसम्मति-आधारित प्रणाली की कमियों को उजागर करता है तथा गतिरोध दूर करने और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से विविध वित्तीय मॉडल विकसित करने की आवश्यकता दर्शाता है।
आगे की राह
- बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे प्रमुख निकायों में सुधार, जैसा कि G4 देशों द्वारा सुझाया गया है, ताकि न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
- वित्तीय आत्मनिर्भरता: वित्तीय संरचना का विविधीकरण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को सुदृढ़ करना, ताकि वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग और स्वायत्तता में तेजी: उदाहरण के लिए, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पारंपरिक संयुक्त राष्ट्र ढांचे से बाहर 1 ट्रिलियन डॉलर के सौर ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है।
- राष्ट्रीय लचीलापन निर्माण: जो देश विदेशी सहायता पर अत्यधिक निर्भर हैं, उन्हें स्वास्थ्य और जलवायु अनुकूलन जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए राष्ट्रीय लचीलापन तंत्र विकसित करना होगा।
- गठबंधनों का विविधीकरण: राष्ट्रवादी और लेन-देन आधारित कूटनीति के स्थान पर विश्व को G20, BRICS+ और SCO जैसे मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर वैकल्पिक नेतृत्व संरचनाएं विकसित करनी चाहिए।
निष्कर्ष
यद्यपि अमेरिकी के पीछे हटने से अनिश्चितता उत्पन्न होती है लेकिन यह संरचनात्मक संकट बहुपक्षीय सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर भी प्रस्तुत करता है। क्षेत्रीय स्वायत्तता को बढ़ावा देकर, राष्ट्रीय लचीलापन सुदृढ़ कर तथा विविध गठबंधनों का निर्माण कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय अधिक प्रभावी वैश्विक शासन व्यवस्था स्थापित कर सकता है।