सुर्ख़ियों में क्यों?
1026 ई. में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया जा रहा है।

सोमनाथ मंदिर के बारे में
- अवस्थिति: गुजरात में वेरावल के समीप प्रभास पाटन में।
- त्रिवेणी संगम (तीन नदियों— कपिला, हिरण और सरस्वती का संगम) की उपस्थिति के कारण सोमनाथ का यह स्थल प्राचीन काल से ही एक प्रमुख तीर्थस्थल रहा है।
- ज्योतिर्लिंग: भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में इसे प्रथम माना जाता है और यह अत्यधिक प्रतिष्ठित है।
- वास्तुकला:
- वर्तमान मंदिर 'मारू-गुर्जर वास्तुकला' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे चालुक्य या सोलंकी शैली भी कहा जाता है।

- इसका स्वरूप "कैलाश महामेरु प्रसाद" जैसा है, जिसमें मुख्य रूप से तीन भाग शामिल हैं: गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप।
- मंदिर के शीर्ष पर 150 फुट ऊंचा शिखर है, जिसके शीर्ष पर 10 टन का कलश स्थापित है।
- सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक वर्णन:
- प्राचीन काल: कालिदास ने अपने ग्रंथ 'रघुवंशम' (5वीं शताब्दी) में सोमनाथ-प्रभास को एक प्रतिष्ठित शिव तीर्थस्थल के रूप में वर्णित किया है।
- मध्यकाल:
- अल-बरूनी ने अपनी रचना 'किताब-उल-हिंद' (11वीं शताब्दी) में सोमनाथ मंदिर की प्रशंसा की है।
- अमीर खुसरो ने 'खजाइन-उल-फुतूह' (13वीं शताब्दी) में अलाउद्दीन खिलजी की सेना द्वारा सोमनाथ मंदिर के विध्वंस का उल्लेख किया है।
- सोमनाथ पर आक्रमण: 1026 ई. में, भीम- प्रथम के शासनकाल के दौरान, तुर्क मुस्लिम शासक महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर इसे लूटा और इसके ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया।
- मंदिर को 1297, 1394 और अंततः 1706 ई. में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर पुनः नष्ट किया गया।
- इस मंदिर को कुल 17 बार लूटा गया था।
- पुनर्निर्माण: स्वतंत्रता के पश्चात 1947 में भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा इसका पुनर्निर्माण कार्य आरंभ किया गया था।
- 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा इसकी प्राण-प्रतिष्ठा/ उद्घाटन की गई थी।
- इससे पूर्व, 18वीं शताब्दी (लगभग 1783 ई.) में अहिल्याबाई होल्कर ने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।
मारू-गुर्जर वास्तुकला (सोलंकी शैली) के बारे में:
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