सुर्ख़ियों में क्यों?
एक हालिया अध्ययन के अनुसार हिमालय–काराकोरम क्षेत्र में हिमनदीय झीलों की संख्या, आकार और इनमें जल स्तर तेजी से बढ़ रहे हैं। इन संकेतों के बावजूद GLOF के बढ़ते खतरे का पर्याप्त जोखिम आकलन नहीं किया गया है।
आईआईटी रुड़की के इस अध्ययन के मुख्य बिंदु
- एशिया के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग 31,000 हिमनदीय झीलों का आकार बढ़ रहा है।
- पूर्वी हिमालय क्षेत्र में हिमनदीय झीलों का क्षेत्रफल सबसे अधिक पाया गया है।
- एशिया के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में हिमनदीय झीलों के कुल क्षेत्रफल में 5.5% की वृद्धि दर्ज की गई है।
हिमनदीय झील और GLOF के बारे में
- हिमनदीय झील वह जल निकाय है जो हिमनदों की बर्फ के पिघलने से बनती है। ये आमतौर पर उन गड्ढों या घाटियों में बनती हैं, जिन्हें हिमनद अपने संचलन के दौरान काटकर बनाते हैं।
- निर्माण प्रक्रिया के आधार पर हिमनदीय झीलों की 4 श्रेणियां हैं; हिमोढ़-रुद्ध (Moraine-dammed), हिमरूद्ध (Ice-dammed), अपरदन से निर्मित, और अन्य प्रकार।
- GLOF वह स्थिति है जब हिमनद के पिघलने से बनी झील का पानी अचानक और तेज़ी से बाहर निकल जाता है। ये झीलें हिमनद के किनारे, सामने, भीतर, नीचे या उसकी सतह पर निर्मित हो सकती हैं।
- GLOFs के उदाहरण
- 2023: साउथ लोनाक झील की GLOF परिघटना की वजह से सिक्किम के चुंगथांग में स्थित तीस्ता–III बांध नष्ट हो गया था।
- 2013: उत्तराखंड में चोराबाड़ी हिमनदीय झील में घटित GLOF के कारण मंदाकिनी नदी में भीषण बाढ़ आ गई थी।
GLOFs के प्रमुख कारण:
- वैश्विक तापमान में वृद्धि: इससे हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं और सिकुड़ रहे हैं। इससे हिमनदीय झीलें अपनी क्षमता से अधिक फैल रही हैं।
- विश्व स्तर पर 1990 के बाद से हिमनदीय झीलों की संख्या, क्षेत्रफल और इनमें जल की मात्रा में क्रमशः 53%, 51% और 48% की वृद्धि हुई है।
- 'ग्लेशियल सर्जिंग': यह कम समय में बर्फ का अचानक और तेज़ी से आगे बढ़ने की परिघटना है, जिसमें हिमनद तेजी से फैल जाता है। उदाहरण के लिए: गिल्की ग्लेशियर, अलास्का।

- संरचनात्मक विफलता: अस्थिर हिमोढ़ या मोरेन (ढीली चट्टानें और बर्फ) आंतरिक अपरदन, जल के दबाव या परमाफ्रॉस्ट के पिघलने से टूट सकती हैं।
- उदाहरण के लिए: साउथ लोनाक GLOF (सिक्किम)।
- वृहत संचलन: हिमस्खलन या भूस्खलन के मलबे जब झील में गिरते हैं, तो तेज लहरें उत्पन्न होती हैं। ये झील के प्राकृतिक तटबंध को तोड़ सकती हैं।
- उदाहरण के लिए: 2021 की चमोली GLOF परिघटना जो शैलों और बर्फ के हिमस्खलन से घटित हुई।
- श्रृंखलाबद्ध घटनाएं: विवर्तनिक गतिविधियां (भूकंप), झील के प्राकृतिक तटबंध को अचानक तोड़ सकती हैं। ध्यातव्य है कि हिंदूकुश–हिमालय भूकंप प्रवण क्षेत्र है।
- मानव जनित गतिविधियां: अनियंत्रित शहरीकरण, अवैज्ञानिक तरीके से खनन, वनों की कटाई, जलविद्युत परियोजनाएँ और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जैसे कारक जल अपवाह प्रणाली और ढ़ालों की स्थिरता को प्रभावित करते हैं।

GLOFs के खतरे को कम करने की रणनीतियां
भारत में रणनीतियां
- राष्ट्रीय हिमनदीय झील प्रस्फोट जनित बाढ़ (GLOF) जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (NGRMP): यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड जैसे चार राज्यों में GLOF के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
- GLOF प्रवण क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करना: हिमालयी क्षेत्र के लिए GLOF प्रवण क्षेत्रों का विस्तृत मानचित्र तैयार करने हेतु ISRO के उपग्रह डेटा का उपयोग किया जा रहा है।
- केंद्रीय जल आयोग (CWC) 900 से अधिक हिमनदीय झीलों की निगरानी करता है। साथ ही, वह हिमनदीय झीलों के जोखिम सूचकांक के लिए मापदंड तय कर चुका है।
- आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने हिमालय में हिमनदीय झील बनने का पूर्वानुमान करने की एक पद्धति विकसित की है। इसके तहत, पूर्वी हिमालय में 493 उच्च-जोखिम वाले स्थलों की पहचान की गई है।
- पूर्व-चेतावनी प्रणाली (EWS): ऐसे सेंसर लगाए जाते हैं जो झील के जलस्तर में अचानक बदलाव का पता लगाते हैं और अनुप्रवाह क्षेत्र के गांवों (निचले इलाकों) में सायरन बजाकर चेतावनी देते हैं।
- उदाहरण के लिए: पूर्व-चेतावनी प्रणाली के लिए सिक्किम में 2 स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) स्थापित किए गए।
- संरचनात्मक इंजीनियरिंग: इसमें सिफोनिंग या पंपिंग के माध्यम से जल स्तर को कम करना तथा जल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कृत्रिम स्पिलवे (अधिप्लव मार्ग) का निर्माण शामिल हैं।
वैश्विक रणनीतियां/पहलें
- सीमापार सहयोग: सीमा-पार स्थित हिमनदीय झीलों (जैसे चीन, नेपाल, भारत की झीलें) के लिए प्रारंभिक चेतावनी हेतु डेटा साझा करना आवश्यक है।
- उदाहरण के लिए: आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंदाई फ्रेमवर्क सीमा-पार GLOF जोखिमों के प्रबंधन हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
- हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्रायोस्फीयर पहल: यह पहल हिमनदीय झीलों की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (International Centre for Integrated Mountain Development: ICIMOD) द्वारा संचालित की जा रही है।
- समुदाय-आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (CBDRR): स्थानीय "प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं" (फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स) को झीलों के प्राकृतिक तटबंधों की अस्थिरता के प्रारंभिक संकेतों को पहचानने का प्रशिक्षण देना चाहिए। उदाहरण के लिए: एंडीज और आल्प्स क्षेत्रों, भूटान आदि में।
आगे की राह: GLOF के प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देश, 2020
- जोखिम वाली झीलों की पहचान, मानचित्रण एवं प्राथमिकता निर्धारण: सुदूर संवेदी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग करके जोखिम के आधार पर इन झीलों का वर्गीकरण करना चाहिए।
- पूर्व-चेतावनी प्रणाली (EWS) का विकास एवं उपयोग: महत्वपूर्ण झीलों पर ग्राउंड इंस्ट्रूमेंटेशन, स्वचालित जल स्तर रिकॉर्डर (Automatic Water Level Recorders: AWLR) तथा विवर्तनिक सक्रियता (भूकंप) निगरानी जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना चाहिए।
- भूमि-उपयोग क्षेत्रीय (ज़ोनिंग) विनियमों का निर्माण एवं प्रवर्तन: GLOF/भूस्खलन झील प्रस्फोट जनित बाढ़ (LLOF) से संबंधित जोखिम क्षेत्रों के लिए विशेष भूमि-उपयोग ज़ोनिंग, विकास विनियमन एवं भवन निर्माण विनियम तैयार करने हेतु एक विशेष समिति का गठन करना चाहिए।
- संरचनात्मक जोखिम-न्यूनीकरण उपायों का क्रियान्वयन: झीलों के जल नियंत्रित तरीके से बाहर करना, सिफोनिंग या पंपिंग द्वारा जल निकासी, तथा खुले जल निकास मार्गों का निर्माण जैसे संरचनात्मक इंजीनियरिंग उपाय किए जाने चाहिए।
निर्णय
GLOF के कारणों, तात्कालिक कारकों और प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक शोध के माध्यम से अच्छी तरह से समझना बहुत जरूरी है। इसके साथ-साथ आपदा से निपटने की तैयारी, नुकसान को कम करने के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था और समुदाय-आधारित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना भी आवश्यक है। इससे GLOF के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।