सुर्ख़ियों में क्यों?

16 जनवरी, 2026 को 'राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस' के अवसर पर भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्टार्टअप इंडिया पहल' ने अपने सफल दस वर्ष पूर्ण किए हैं।
अन्य संबंधित तथ्य
- स्टार्टअप इंडिया पहल का शुभारंभ 16 जनवरी, 2016 को किया गया था।
- वर्ष 2022 में, सरकार ने आधिकारिक तौर पर 16 जनवरी को 'राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस' के रूप में घोषित किया था।
स्टार्टअप की परिभाषा
- विधिक संरचना: इसे भारत में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, भागीदारी फर्म (Partnership Firm), सीमित देयता भागीदारी (LLP), या एक सहकारी समिति (बहु-राज्य सहकारी समितियों सहित) के रूप में निगमित या पंजीकृत होना चाहिए।
- अवधि: अपनी स्थापना या पंजीकरण की तिथि से 10 वर्ष की अवधि तक इसे स्टार्टअप माना जाता है।
- कारोबार: स्थापना के बाद से किसी भी वित्तीय वर्ष में इसका वार्षिक कारोबार 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।
- कार्य का दायरा: यह उत्पादों, प्रक्रियाओं या सेवाओं के नवाचार, विकास या सुधार की दिशा में कार्यरत हो, अथवा इसमें रोजगार सृजन या संपदा निर्माण की उच्च क्षमता वाला एक 'स्केलेबल बिजनेस मॉडल' होना चाहिए।
विशेष नोट: किसी मौजूदा व्यवसाय को विभाजित करके या उसके पुनर्गठन से बनी इकाई को 'स्टार्टअप' नहीं माना जाता है।
स्टार्टअप इंडिया पहल के प्रमुख घटक
वित्तीय सहायता योजनाएं:
- स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (FFS): सिडबी (SIDBI) द्वारा 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ प्रबंधित। यह योजना सेबी-पंजीकृत 'वैकल्पिक निवेश कोष' (AIFs) को सहायता प्रदान करती है, जो घरेलू जोखिम पूंजी के विस्तार हेतु स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
- स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS): 945 करोड़ रुपये के कोष वाली यह योजना शुरुआती चरण की गतिविधियों, जैसे- अवधारणा का प्रमाण, प्रोटोटाइप विकास और बाजार में प्रवेश हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- स्टार्टअप्स हेतु क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS): राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा संचालित, यह योजना स्टार्टअप्स को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और इकोसिस्टम समर्थक:
- स्टार्टअप इंडिया हब: यह एक डिजिटल मंच है जो निवेशकों, मेंटर्स (परामर्शदाताओं), इनक्यूबेटर्स और इच्छुक उद्यमियों जैसे हितधारकों को आपस में जोड़ता है।
- MAARG पोर्टल (राष्ट्रीय मेंटरशिप पोर्टल): यह स्टार्टअप्स को अनुभवी विशेषज्ञों से रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने की सुविधा देने हेतु डिज़ाइन किया गया कार्यक्रम है।
- स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल: यह एक ही आवेदन के माध्यम से शुरुआती चरण के उद्यमों को विभिन्न वेंचर कैपिटल फंड्स से जुड़ने की सुविधा प्रदान करता है।
- राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF): यह स्टार्टअप अनुकूल नीतियों और उनके कार्यान्वयन के आधार पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन कर 'प्रतिस्पर्धी संघवाद' को बढ़ावा देता है।
- व्यापक इकोसिस्टम सहायता:
- अटल इनोवेशन मिशन (AIM): यह स्कूलों में 'अटल टिंकरिंग लैब' (ATLs) और इनक्यूबेशन समर्थन के माध्यम से नवाचार की संस्कृति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
- नवाचारों के विकास और दोहन के लिए राष्ट्रीय पहल (NIDHI), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग: यह एक अंब्रेला कार्यक्रम है जो 'प्रयास' (PRAYAS - प्रोटोटाइप सहायता) और टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर्स (TBIs) के माध्यम से ज्ञान-आधारित नवाचारों को स्टार्टअप्स के रूप में विकसित करता है।
- MeitY की पहलें: इसमें 'MeitY स्टार्टअप हब' (MSH) और 'TIDE 2.0' योजना शामिल हैं, जो IoT और AI जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने वाले ICT स्टार्टअप्स का समर्थन करती हैं।
आर्थिक विकास में स्टार्टअप्स की भूमिका
- रोजगार सृजन: स्टार्टअप्स भारत के 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) का उपयोग कर तकनीक, विनिर्माण और सेवाओं में रोजगार पैदा कर रहे हैं, साथ ही गिग वर्क और आपूर्ति श्रृंखलाओं में अप्रत्यक्ष अवसर भी पैदा कर रहे हैं। अकेले NIDHI कार्यक्रम द्वारा 1,30,000 से अधिक रोजगार सृजित किए गए हैं।
- ग्रामीण-शहरी अंतराल को कम करना: एग्री-टेक, टेलीमेडिसिन और माइक्रोफाइनेंस में नवाचार विकासात्मक अंतराल को समाप्त कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, एग्री-टेक प्लेटफॉर्म किसानों के लिए बाजार तक पहुंच में सुधार करते हैं, जबकि ग्रामीण योजनाएं टिकाऊ आजीविका का समर्थन करती हैं।
- तकनीकी एकीकरण: स्टार्टअप्स डीप-टेक और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे रहे हैं और तकनीक हस्तांतरण एवं वैश्विक बाजार एकीकरण के लिए बड़े कॉरपोरेट्स के साथ सहयोग कर रहे हैं।
- आर्थिक गुणक प्रभाव: स्वच्छ गतिशीलता और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश से वित्त और स्थिरता क्षेत्रों में गुणक प्रभाव पैदा हो रहा है, जो इस इकोसिस्टम को 2030 तक $7.3 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के भारत के लक्ष्य के लिए एक केंद्रीय चालक के रूप में स्थापित करता है।
भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी प्रमुख चिंताएं
- जोखिम से बचने की मानसिकता:
- विफलता के प्रति कम सहनशीलता: भारतीय समाज पारंपरिक रूप से असफलता को सीखने के अवसर के बजाय एक 'कलंक' के रूप में देखता है।
- स्थिर रोजगार को प्राथमिकता: परिवार और सामाजिक संरचनाएं सुरक्षित सरकारी या कॉर्पोरेट नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं।
- वित्तीय बाधाएं:
- फंडिंग अंतराल: शुरुआती स्तर के स्टार्टअप्स को पूंजी जुटाने में कठिनाई होती है क्योंकि निवेशक स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड वाले परिपक्व उद्यमों को पसंद करते हैं।
- नकदी प्रवाह प्रबंधन: कई स्टार्टअप खराब राजस्व सृजन और उच्च 'बर्न रेट' (बहुत तेजी से पैसा खर्च करना) के कारण विफल हो जाते हैं।
- नियामक और नौकरशाही संबंधी अड़चनें:
- निकास बाधाएं: व्यवसाय को बंद करना अक्सर उसे शुरू करने की तुलना में अधिक जटिल और कठिन होता है।
- कराधान के मुद्दे: स्टार्टअप कर अनुपालन के साथ संघर्ष करते हैं, जिसमें विवादास्पद 'एंजल टैक्स' और तरलता को प्रभावित करने वाले विलंबित भुगतान शामिल हैं।
- प्रतिभा और मेंटरशिप:
- कौशल अंतराल: शैक्षणिक प्रशिक्षण और उद्योग द्वारा अपेक्षित व्यावहारिक कौशल के बीच असंतुलन है।
- प्रतिभा को बनाए रखने के मुद्दे: स्टार्टअप उन बड़े कॉरपोरेट्स के मुकाबले प्रतिभा को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं जो उच्च नौकरी स्थिरता प्रदान करते हैं।
- बाजार और बुनियादी ढांचे की बाधाएं:
- मूल्य संवेदनशीलता: भारतीय ग्राहक अत्यधिक मूल्य-सचेत हैं और अक्सर नई सेवाओं के लिए भुगतान करने को तैयार नहीं होते हैं।
- खंडित बाजार: भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के कारण किसी उत्पाद को विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार देना कठिन होता है।
- उद्योग-अकादमिक सामंजस्य का अभाव: शैक्षणिक परिणाम और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच असंतुलन।
आगे की राह
जैसे-जैसे भारत स्टार्टअप इंडिया पहल के दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है, ध्यान स्केल से स्थिरता (Sustainability) की ओर, और 'तीव्र प्रसार' से लचीले नवाचार की ओर स्थानांतरित होना चाहिए।
डीप-टेक अनुसंधान को सुदृढ़ करना, नियामक बाधाओं को कम करना, उद्योग-अकादमिक संबंधों को गहरा करना और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उद्यमिता की मानसिकता को पोषित करना वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यम बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा। सुसंगत नीतिगत समर्थन, सक्रिय निजी भागीदारी और एक सक्षम सामाजिक-सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ, भारत का स्टार्टअप आंदोलन समावेशी विकास, तकनीकी नेतृत्व और दीर्घकालिक आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला के रूप में उभर सकता है।
संबंधित सुर्खियांडीप-टेक स्टार्टअपवैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) ने अपने 'औद्योगिक आरएंडडी संवर्धन कार्यक्रम' (IRDPP) के मानदंडों में संशोधन किया है। अब डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता और आधिकारिक मान्यता प्राप्त करने हेतु '3 वर्ष के निरंतर संचालन' की पूर्व-अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।डीप-टेक स्टार्टअप क्या है?मानक स्टार्टअप मानदंडों के अतिरिक्त, एक डीप-टेक स्टार्टअप में निम्नलिखित विशेषताएं प्रदर्शित होनी चाहिए:
भारत में डीप-टेक स्टार्टअप के लिए की गई अन्य पहलें:
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