सुर्ख़ियों में क्यों?
लोकसभा ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है।
अमरावती और इसका सांस्कृतिक महत्व

- अमरावती आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में कृष्णा नदी के किनारे स्थित है।
- राजधानी परियोजना की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग करके एक स्वतंत्र राज्य बनाया गया था।
- "अमरावती" शब्द का शाब्दिक अर्थ है "अमर व्यक्तियों का निवास/स्थान"।
- उदुंबरावती अमरावती का प्राचीन नाम था। यह नाम क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में औदुम्बर वृक्षों की उपस्थिति के कारण पड़ा था।
- ऐतिहासिक महत्व:
- अमरावती सातवाहन वंश की राजधानी थी और इसका ऐतिहासिक महत्व तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक जाता है।
- अमरावती स्तूप:
- यह स्तूप सफेद संगमरमर से बना था।
- हालांकि स्तूप स्वयं पूर्णतः नष्ट हो चुका है, लेकिन इसके उत्कीर्ण शिल्प-पट्ट मद्रास तथा ब्रिटिश संग्रहालयों में संरक्षित हैं।
- इसे महाचैत्य ("महान स्तूप") के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सातवाहन काल के दौरान हुआ था और इसे भारत के सबसे प्राचीन बौद्ध स्मारकों में से एक माना जाता है।
- इस स्तूप में एक वृत्ताकार प्रदक्षिणापथ, जातक कथाओं और बुद्ध के जीवन प्रसंगों को दर्शाते हुए सूक्ष्म नक्काशीदार वेदिका स्तंभ, तथा सिंह एवं कमल आकृतियों से अलंकृत तोरण थे।
- प्रारंभिक चरणों में बुद्ध को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया था, जबकि पहली शताब्दी ईस्वी से मानवाकार बुद्ध प्रतिमाएँ दिखाई देने लगीं।
- बौद्ध धर्म का केंद्र
- ऐसा माना जाता है कि आचार्य नागार्जुन ने अमरावती क्षेत्र में मध्यमिका दर्शन का प्रतिपादन किया था, जो बाद में महायान बौद्ध धर्म का दार्शनिक आधार बना।
- माध्यमिक मार्ग अस्तित्ववाद (शाश्वतवाद) और विनाशवाद (अस्तित्वहीनता) जैसे चरम दृष्टिकोणों के बीच "मध्य मार्ग" का समर्थन करता है।
- ऐसा माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां गौतम बुद्ध ने सबसे पहले अपने "कालचक्र" के उपदेशों का प्रसार किया था।
- कालचक्र ("समय का चक्र") वज्रयान बौद्ध परंपरा है जो ब्रह्मांड विज्ञान, समय चक्र और आध्यात्मिक ज्ञानोदय पर केंद्रित है।
- ह्वेनसांग ने बौद्ध पांडुलिपियों और पवित्र ग्रंथों को एकत्र करने के लिए 7वीं शताब्दी ईस्वी में अमरावती की यात्रा की थी।
- ऐसा माना जाता है कि आचार्य नागार्जुन ने अमरावती क्षेत्र में मध्यमिका दर्शन का प्रतिपादन किया था, जो बाद में महायान बौद्ध धर्म का दार्शनिक आधार बना।
- अमरावती कला शैली
- यह शैली सातवाहन वंश तथा इक्ष्वाकु शासकों के संरक्षण में कृष्णा–गोदावरी घाटी में विकसित हुई।
- इस कला के मुख्य केंद्र नागार्जुनकोंडा, अमरावती, गोली, घंटसाला और जग्गय्यापेटा आदि थे।
- गांधार और मथुरा शैलियों के साथ-साथ यह प्राचीन भारत में बौद्ध कला की तीन प्रमुख शैलियों में से एक के रूप में उभरी।
- जातक कथाओं, बुद्ध के जीवन के दृश्यों और बौद्ध प्रतीकों को दर्शाने वाली गतिशील कथात्मक कला के लिए प्रसिद्ध है।
- उदाहरण: नागार्जुनकोंडा में अमरावती शैली की बुद्ध प्रतिमा।
- अमरावती की अन्य ऐतिहासिक विरासत
- यहाँ श्री अमरलिंगेश्वर स्वामी मंदिर स्थित है, जो एक महत्वपूर्ण शैव तीर्थस्थल है।
- आंध्र प्रदेश के पूजनीय पंचाराम क्षेत्रों में से एक है।
- यह क्षेत्र कोंडापल्ली खिलौनों और कलमकारी वस्त्रों जैसी पारंपरिक हस्तशिल्पों के लिए प्रसिद्ध है।
