भारत में बिजली गिरने की घटनाएँ और उनका प्रभाव
अप्रैल और जुलाई 2023 के बीच, पूरे भारत में बिजली गिरने से 1,621 लोगों की जान गई। इस बड़ी संख्या में बिहार और उत्तर प्रदेश में तीन दिनों में हुई एक दुखद घटना भी शामिल है, जिसमें 100 लोग, जिनमें मुख्य रूप से किसान थे, मारे गए। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से, बिजली गिरना भारत में सबसे घातक मौसम संबंधी घटना रही है।
सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र
- पूर्वी भारत में बिजली गिरने का सबसे अधिक खतरा है, क्योंकि यह घटना धान की बुवाई जैसी कृषि गतिविधियों के चरम पर होने के कारण होती है।
- विस्तारित हो रहे बिजली क्षेत्रों में अब मध्य, उत्तरी, उत्तर-पूर्वी और तटीय क्षेत्र, साथ ही हिमालय की तलहटी भी शामिल हो गई है।
- मध्य प्रदेश जैसे राज्य तथा राजस्थान के बीकानेर और चुरू जैसे जिले नए हॉटस्पॉट बन गए हैं।
जलवायु परिवर्तन और बिजली
- जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी और आर्द्रता जैसी अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करके, अधिक बार बिजली गिरने में योगदान दे रहा है।
- तापमान में 1°C की वृद्धि से मानसून संवहन में वृद्धि के कारण बिजली गिरने की गतिविधि में 10-12% की वृद्धि हो सकती है।
- शहरीकरण, भूमि-उपयोग में परिवर्तन , तथा बेहतर पहचान के कारण भी बिजली गिरने की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
शहरी भारत और बिजली
- शहरी क्षेत्रों में बिजली गिरने का खतरा बढ़ रहा है, जिससे संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं और आर्थिक तथा सामाजिक परिणाम सामने आ रहे हैं।
- शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव से स्थितियाँ और भी बदतर हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप अधिक तीव्र वायु प्रवाह और अधिक तीव्र तूफान आते हैं।
पूर्वानुमान और रोकथाम के प्रयास
- विस्तृत अलर्ट और वास्तविक समय बहुभुज मानचित्रों के साथ आईएमडी की पूर्वानुमान सटीकता 86% तक सुधर गई है।
- बेहतर पूर्वानुमानों के बावजूद, अलर्ट प्रसार और सार्वजनिक जागरूकता के संबंध में चुनौतियां बनी हुई हैं।
- ओडिशा जैसे राज्यों ने बिजली गिरने के खतरे को कम करने के लिए ताड़ के पेड़ लगाने जैसी पहल शुरू की है।
सरकारी पहल
- मृत्यु दर और क्षति को कम करने के लिए 10 राज्यों के 50 जिलों में 186 करोड़ रुपये की लागत वाली बिजली शमन परियोजना शुरू की गई है।
- प्रयासों में दामिनी मोबाइल ऐप के माध्यम से वास्तविक समय अलर्ट और जागरूकता अभियान शामिल हैं।
निष्कर्ष और सिफारिशें
विशेषज्ञ प्रभावी चेतावनी प्रसार और व्यवहार परिवर्तन के लिए अंतिम छोर तक संपर्क के महत्व पर ज़ोर देते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में बिजली से होने वाली मौतों को कम करने के लिए जागरूकता अभियान और निवारक उपाय बेहद ज़रूरी हैं।