नए आयकर विधेयक को लोकसभा की मंजूरी
लोकसभा ने एक नए आयकर विधेयक को मंजूरी दे दी है, जो 1961 के आयकर अधिनियम का स्थान लेगा। इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस विधेयक के प्रमुख पहलुओं में सीमित देयता भागीदारी (LLP) फर्मों पर वैकल्पिक न्यूनतम कर को हटाना और करदाताओं द्वारा दाखिल करने की समय सीमा चूक जाने पर भी रिफंड दावों की अनुमति देना शामिल है।
आयकर (संख्या 2) विधेयक की मुख्य विशेषताएं
- आयकर अधिनियम, 1961 का प्रतिस्थापन: नए विधेयक का उद्देश्य अध्यायों की संख्या को आधा करके तथा समझने में आसान शब्दावली का उपयोग करते हुए ‘कर भाषा’ को सरल बनाना है।
- संकल्पनात्मक परिवर्तन: "कर निर्धारण वर्ष" और "पिछले वर्ष" के स्थान पर "कर वर्ष" रखा गया है।
- हानि को आगे ले जाने के प्रावधान: वर्तमान प्रावधानों को बनाए रखता है, जिससे हानि को आगे ले जाया जा सकता है।
- छूट और कटौती:
- यह विधेयक विशुद्ध रूप से धार्मिक ट्रस्टों द्वारा प्राप्त गुमनाम दान पर गैर-लाभकारी संस्थाओं को कर से छूट प्रदान करता है।
- रियायती कर दरों के अंतर्गत अंतर-कॉर्पोरेट लाभांश के लिए कटौती पुनः शुरू की गई।
- उदारीकृत धन प्रेषण योजना के अंतर्गत शिक्षा हेतु प्रेषित धन पर स्रोत पर शून्य कर संग्रह किया जाएगा।
- इलेक्ट्रॉनिक भुगतान नियम: इसमें 'व्यवसाय' के साथ 'पेशे' को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले पेशेवरों को निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड का उपयोग करना होगा।
- स्पष्टीकरण: परिवार के सदस्यों द्वारा प्राप्त कम्यूटेड पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए कटौतियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
सिफारिशों और उद्योग की प्रतिक्रिया का समावेश
- नये विधेयक में प्रवर समिति की लगभग सभी सिफारिशें शामिल कर ली गई हैं।
- अनुपालन को आसान बनाने तथा मौजूदा कानून के साथ संरेखित करने के लिए उद्योग विशेषज्ञों द्वारा भी इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार किया गया है।