ईंधन में इथेनॉल के उपयोग का अवलोकन
पेट्रोल के विकल्प के रूप में इथेनॉल का उपयोग विश्व स्तर पर स्थापित है, तथा अमेरिका और ब्राजील जैसे देश इथेनॉल मिश्रण प्रथाओं में अग्रणी हैं।
इतिहास और उद्देश्य
- इथेनॉल सम्मिश्रण मूलतः 1970 के दशक के तेल संकट की प्रतिक्रिया के रूप में उभरा था।
- इसे कार्बन-तटस्थ विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता है।
भारत की रणनीति और आर्थिक निहितार्थ
- भारत के लिए इथेनॉल के उपयोग की प्राथमिक प्रेरणा आयात प्रतिस्थापन और लागत में कमी है।
- सरकार का लक्ष्य 20% तक इथेनॉल मिश्रण के माध्यम से प्रतिवर्ष 10 बिलियन डॉलर की बचत करना है।
- हालाँकि, आर्थिक लाभ किसानों, व्यापारियों और शराब बनाने वालों के बीच असमान रूप से वितरित हो सकता है।
- भारत की योजना निम्नलिखित का उपयोग करने की है:
- चीनी उत्पादन के लिए सी-भारी गुड़ का उपयोग नहीं किया जाता है ।
- टूटे हुए चावल जो भंडारण में खराब हो सकते हैं।
- मक्का की खेती का क्षेत्रफल और उत्पादकता बढ़ाना, जिसे कृषि की दृष्टि से कम मांग वाला कार्य माना जाता है।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
- कमी की स्थिति में इथेनॉल उत्पादन की तुलना में खाद्यान्न भंडार को प्राथमिकता देने के बारे में चिंताएं हैं।
- उर्वरकों जैसे कृषि आदानों के आयात से आयात प्रतिस्थापन लाभ कम हो सकता है।
- इथेनॉल की दक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह पदार्थ के स्थायित्व को प्रभावित कर सकता है तथा ईंधन प्रणालियों को संक्षारित कर सकता है।
संगतता और मानक
- वैश्विक अध्ययनों से पता चलता है कि विभिन्न मानकों (यूरो 2, यूएस टियर 1 और भारत का बीएस 2) के तहत निर्मित वाहन E15 तक इथेनॉल उपयोग के लिए अनुकूल हैं।
- भारत के बीएस 2 मानक वाहनों में इथेनॉल से जुड़ी दक्षता और स्थायित्व संबंधी समस्याओं को कम करने की विशेषताएं हैं।
- 2023 से भारत में बेचे जाने वाले वाहनों को E20 इथेनॉल मिश्रण तक संभालना आवश्यक है।
उपभोक्ता प्रभाव और नीतिगत सिफारिशें
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- भारत में उपभोक्ताओं के पास फिलहाल ईंधन के मामले में कोई विकल्प नहीं है।
- सरकार द्वारा कीमतों में कटौती का दावा करने से ईंधन स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं होता प्रतीत होता है।
- भारत भी इथेनॉल-विशिष्ट मानक विकसित कर रहा है तथा E27 मिश्रणों को अपनाने में ब्राजील का अनुसरण कर रहा है।
- सरकार और निर्माताओं को इथेनॉल के साथ वाहन अनुकूलता पर पारदर्शिता प्रदान करने की आवश्यकता है।
- निर्माताओं को पिछले वाहन मॉडलों की इथेनॉल अनुकूलता का खुलासा करना चाहिए तथा शमन रणनीतियों का सुझाव देना चाहिए।
- सरकार को इथेनॉल के उपयोग से संबंधित बीमा दावों का समर्थन करना चाहिए।