दूसरा भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन रियो डी जेनेरियो में आयोजित हुआ। इसका आयोजन G-20 शिखर सम्मेलन 2024 के दौरान किया गया।
मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- ऑस्ट्रेलिया-भारत व्यापार विनिमय (AIBX) कार्यक्रम: इसे जुलाई 2024 के बाद से 4 और वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया।
- AIBX को 2021 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य व्यवसाय जगत को बाजार की जानकारी प्रदान करना और वाणिज्यिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
- भारत-ऑस्ट्रेलिया अक्षय ऊर्जा भागीदारी (REP): इसे सोलर पीवी, ग्रीन हाइड्रोजन, एनर्जी स्टोरेज जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग हेतु फ्रेमवर्क प्रदान करने के लिए शुरू किया गया।
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1 sourceअजरबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित UNFCCC COP-29 में यह घोषणा की गई कि FF-NPT पर चर्चा में 10 और देश शामिल हो गए हैं।
FF-NPT के बारे में
- इसकी संकल्पना 2016 में की गई थी और इसे आधिकारिक तौर पर 2019 में लॉन्च किया गया था।
- यह नागरिक समाज, अनुसंधान संगठनों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, सरकार आदि का एक समूह है।
- यह संधि निम्नलिखित 3 स्तंभों पर कार्य करती है-
- अप्रसार: नवीन जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल व गैस) के उत्पादन को रोकने के लिए वैश्विक सहयोग।
- उचित तरीके से चरणबद्ध समाप्ति: विकसित राष्ट्र अपनी क्षमता और ऐतिहासिक उत्सर्जन के आधार पर मौजूदा जीवाश्म ईंधन सुविधाओं को बंद करने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
- न्यायोचित परिवर्तन: प्रभावित श्रमिकों, समुदायों और देशों के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को तीव्र गति से आगे बढ़ाना।
भारतीय थल सेना ने गुजरात में बहुपक्षीय वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभ्यास, 'संयुक्त विमोचन 2024' का आयोजन किया।
संयुक्त विमोचन के बारे में
- इस अभ्यास में आपदा राहत प्रयासों से जुड़ी सभी एजेंसियां शामिल हुई हैं। इस तरह यह अभ्यास समग्र सरकार के समन्वय की आवश्यकता को दर्शाता है।
- खाड़ी सहयोग परिषद, हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व एशिया के 9 मित्र देशों ने भी अभ्यास में भाग लिया।
- यह आपदा से निपटने में भारत की तैयारियों और कार्रवाई करने की क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- इस तरह यह अभ्यास वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन में भारत के नेतृत्व को मजबूत करेगा।
- हाल ही में, अफ्रीकी पेंगुइन को IUCN रेड लिस्ट में क्रिटिकली एंडेंजर्ड के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।
अफ्रीकी पेंगुइन के बारे में
- यह पेंगुइन की एकमात्र प्रजाति है, जो अफ्रीका में पाई जाती है।
- विशेषताएं: यह सबसे छोटी पेंगुइन प्रजातियों में से एक है। नर पेंगुइन आम तौर पर मादाओं से थोड़े बड़े होते हैं।
- उनकी आंखों के ऊपर एक छोटी गुलाबी ग्रंथि होती है, जो उन्हें उच्च तापमान को सहन करने में सक्षम बनाती है।
- व्यवहार: ये स्वरों और शारीरिक भाषा के माध्यम से एक दूसरे के साथ संवाद करते हैं- जैसे देर तक चोंच को खोले रखना, चोंच दिखाना, चोंच मारना और चोंच से वार करना आदि।
- आहार: वे पेलेजिक स्कूलिंग फिश, विशेष रूप से सार्डिन और एन्कोवी खाते हैं।
हाल ही में, वैज्ञानिकों ने एक नया बायोप्लास्टिक विकसित किया है। इसे मैकेनिकल इंजीनियर्ड लिविंग मैटेरियल्स विद कम्पोस्टेबिलिटी, हीलेबिलिटी एंड स्केलेबिलिटी (MECHS) नाम दिया गया है।
MECHS के बारे में
- यह प्रकृति-प्रेरित समाधान है, जिसमें स्वयं को पुन: उत्पन्न करने, विनियमित करने और प्रकाश जैसे बाहरी उत्प्रेरकों पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता है।
- इसमें इंजीनियर्ड ई. कोलाई बैक्टीरिया को फाइबर मैट्रिक्स के साथ जोड़कर कागज या फिल्म जैसी सामग्री तैयार की गई है।
- MECHS पानी में और यहां तक कि खाद के डिब्बे में भी जैविक रूप से अपघटनीय (Biodegradable) है।
- MECHS को अपनाने में चुनौतियां: इंजीनियर्ड ई. कोलाई बैक्टीरिया की जीनोमिक स्थिरता; इकोनॉमी ऑफ़ स्केल व लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाएं आदि।
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1 sourceअज़रबैजान में आयोजित COP-29 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने "वैश्विक ऊर्जा दक्षता गठबंधन” शुरू किया।
“वैश्विक ऊर्जा दक्षता गठबंधन” के बारे में
- लक्ष्य: 2030 तक वैश्विक ऊर्जा दक्षता दरों को दोगुना करना और उत्सर्जन में व्यापक कमी लाना।
- इसका उद्देश्य रणनीतिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना और ऊर्जा दक्षता पहलों में निवेश को बढ़ावा देना है।
- यह गठबंधन सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों को संकलित करने और प्रसारित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसमें अफ्रीकी देशों की सहायता पर विशेष जोर दिया जाएगा।
- यह पहल COP-28 की ‘UAE कंसेंसस’ पर आधारित है।
- यह कार्बन उत्सर्जन को कम करने और संधारणीय संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता वाली पहल है।
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1 sourceहाल ही में, भारत ने UNRWA को 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की दूसरी किस्त जारी की। इसके साथ ही 2024-25 के लिए 5 मिलियन डॉलर के वार्षिक योगदान की भारत की प्रतिबद्धता पूरी हो गई।
UNRWA के बारे में
- उत्पत्ति: इसे 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक संकल्प द्वारा गठित किया गया था। इसे 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के बाद, फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए प्रत्यक्ष राहत और वर्क प्रोग्राम चलाने के लिए गठित किया गया था।
- वित्त पोषण: संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश स्वैच्छिक तौर पर योगदान फंड प्रदान करते हैं।
- इसकी कार्यावधि 30 जून, 2026 तक बढ़ा दी गई है।
- मुख्यालय: अम्मान (जॉर्डन) और गाजा।
- कार्य का क्षेत्र: जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, गाजा पट्टी और पूर्वी येरुशलम सहित वेस्ट बैंक।
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1 sourceभारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए यूनिकॉर्न (UNICORN) मस्तूलों (Mast) के सह-विकास हेतु भारत सरकार ने जापान के साथ कार्यान्वयन ज्ञापन (Memorandum of Implementation) पर हस्ताक्षर किए।
यूनिकॉर्न के बारे में
- यूनिकॉर्न, एकीकृत संचार प्रणालियों वाला एक मस्तूल है, जो नौसेना प्लेटफॉर्म्स की रडार से बच निकलने वाली विशेषताओं (Stealth characteristics) को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
- भारतीय नौसेना वर्तमान में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के एडवांस्ड कंपोजिट कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग करती है। यह जहाजों में संचार के लिए चौथी पीढ़ी की एकीकृत वॉयस / डेटा प्रणाली है।
- यह भारत और जापान के बीच 2015 में हस्ताक्षरित रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन का पहला मामला है।
यूक्रेन ने रूस पर हमला करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में निर्मित ATACMS मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ATACMS मिसाइलों के बारे में
- ATACMS सतह से सतह पर मार करने वाली लंबी दूरी की गाइडेड बैलिस्टिक मिसाइल है।
- इसकी अधिकतम मारक क्षमता 300 किलोमीटर है।
- इसमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के साथ बेहतर गाइडिंग पैकेज है।
- ATACMS मिसाइलों को HIMARS और MLRS M270 प्लेटफॉर्म्स से दागा जाता है।
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1 sourceIIT बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने 'एरोट्रैक' नामक जल-प्रदूषक पता लगाने वाला एक पोर्टेबल उपकरण विकसित किया है।
एरोट्रैक के बारे में
- यह उपकरण जल के नमूनों से हानिकारक 'एरोमैटिक जेनोबायोटिक' प्रदूषकों, जैसे- फिनोल, बेंजीन और जाइलेनॉल का पता लगाने के लिए प्रोटीन-आधारित बायोसेंसर का उपयोग करता है।
- एरोमैटिक जेनोबायोटिक यौगिक जीवित जीवों के लिए अत्यंत विषैले हो सकते हैं तथा उनका पता लगाना भी कठिन होता है।
- इंजीनियर्ड प्रोटीन डी.एन.ए. अनुक्रम वाला MopR बायोसेंसर अलग-अलग प्रदूषकों की पहचान करने में सक्षम है। इसमें एक LED फोटो ट्रांजिस्टर लगा होता है जो विविध तीव्रता के प्रकाश के माध्यम से परिणामों को प्रसारित करता है।
- महत्त्व: इसकी कम लागत व बैटरी चालित प्रकृति जल गुणवत्ता परीक्षण में क्रांति ला सकती है।