CoP-29 में भारत ने कहा कि “जस्ट ट्रांजिशन में जलवायु न्याय अवश्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए” | Current Affairs | Vision IAS
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अजरबैजान के बाकू में जलवायु परिवर्तन पर पक्षकारों का 29वां सम्मेलन (CoP-29) आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन के दूसरे वार्षिक उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के दौरान भारत ने वैश्विक जलवायु न्याय (क्लाइमेट जस्टिस) और न्यायोचित जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

जस्ट ट्रांजिशंस के बारे में

  • यह अवधारणा सुनिश्चित करती है कि कम कार्बन उत्सर्जन तथा पर्यावरणीय रूप से संधारणीय अर्थव्यवस्था और समाज की दिशा में प्रगति के दौरान कोई भी पीछे न छूट जाए या किसी को जानबूझकर पीछे न कर दिया जाए।

जस्ट ट्रांजिशंस की आवश्यकता क्यों है?

  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए: कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा स्रोतों को अपनाने से ग्लोबल वार्मिंग को सीमित किया जा सकता है।
  • वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताएं पूरी करने के लिए: भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों और पंचामृत संकल्प को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए: कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा स्रोतों को अपनाने से जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम होगी।

जस्ट ट्रांजिशन के समक्ष चुनौतियां

  • जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन की लागत के निर्धारण में समस्या: स्वच्छ ऊर्जा को न्यायपूर्ण तरीके से अपनाने की लागत का अनुमान लगाने हेतु वैश्विक स्तर पर कोई पिछला अनुभव या उदाहरण मौजूद नहीं है। 
  • बौद्धिक संपदा से जुड़ी चिंताएं: अधिकतर हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर विकसित देशों की कंपनियों को बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त है। इस वजह से विकासशील देशों को इन प्रौद्योगिकियों को प्राप्त करने में कठिनाई आती है।
  • नैतिकता से जुड़ी दुविधाएं: ये दुविधाएं समानता व उत्तरदायित्व, पर्यावरण न्याय, आर्थिक न्याय आदि से संबंधित हैं।
  • अन्य चुनौतियां: 
    • देश के भीतर वित्तीय संसाधन के स्रोत कम हैं, 
    • अधिक आर्थिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है आदि।

आगे की राह

  • विकसित देशों से विकासशील देशों में प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को आसान बनाया जाना चाहिए;
  • विकसित देशों से न्यायपूर्ण तरीके से जलवायु लोक वित्त-पोषण (Public Climate Finance) प्राप्त होना चाहिए;
  • जलवायु कार्रवाई में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और विश्वास को बढ़ाने की जरूरत है;
  • जस्ट ट्रांजिशन की स्वतंत्र रूप से निगरानी करने के लिए राष्ट्रीय जस्ट ट्रांजिशन संस्था की स्थापना करनी चाहिए।  

भारत में जस्ट ट्रांजिशन के लिए शुरू की गई पहलें

  • उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना: इसका उद्देश्य भारत में उच्च दक्षता वाले सोलर पीवी मॉड्यूल के निर्माण के लिए अनुकूल व्यवस्था बनाना है।
  • कार्बन तीव्रता को कम करने के लिए सॉवरेन ग्रीन बॉण्ड जारी किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा निधि (NCEF) की स्थापना की गई है। कोयला उपकर से संग्रहित राशि इस निधि में जमा की जाती है। इस निधि से स्वच्छ ऊर्जा उपक्रमों को फंड दिए जाते हैं।
  • ग्रीन टर्म अहेड मार्केट शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य एक्सचेंजों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित विद्युत की बिक्री की सुविधा प्रदान करना है।
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