जैव प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार परिषद ने 'वन डे वन जीनोम' पहल की शुरुआत की | Current Affairs | Vision IAS
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इस पहल का उद्देश्य देश में पूर्ण रूप से व्याख्या किए गए जीवाण्विक जीनोम (Bacteriological genome) को जन सामान्य के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना है। साथ ही, वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ाना, नवाचार को बढ़ावा देना और शोधकर्ताओं एवं समुदाय के लिए माइक्रोबियल जीनोमिक्स डेटा को सुलभ बनाना भी इसका उद्देश्य है।

जीनोम और जीनोम अनुक्रमण के बारे में

  • जीनोम: जीनोम एक कोशिका में पाए जाने वाले DNA संकेतों का संपूर्ण सेट होता है। इसमें डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड या DNA/ राइबोन्यूक्लिक एसिड या RNA शामिल होते हैं। इसमें जीव की संपूर्ण आनुवंशिक जानकारी होती है। जीनोम विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड क्षार अनुक्रमों से बना होता है।
    • डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड यानी DNA वह अणु है, जो किसी जीव के समस्त जैविक कार्यों को निर्देशित करने के लिए आनुवंशिक जानकारी को कूटबद्ध किए रहता है।
    • DNA में विशेष रासायनिक कोड होते हैं। ये कोड DNA के चार क्षार (बेस)- एडेनिन (A), साइटोसिन (C), गुआनिन (G) और थाइमिन (T) के क्रम द्वारा निर्धारित होते हैं। वास्तव में ये क्षार विशिष्ट युग्म बनाते हैं।
  • जीनोमिक अनुक्रमण: जीनोम अनुक्रमण से आशय जीनोम में DNA न्यूक्लियोटाइड्स के क्रम का पता लगाना है। इसका अर्थ है As, Cs, Gs और Ts के क्रम का पता लगाना।

जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) के अनुप्रयोग

  • रोग का पता लगाना: दुर्लभ विकारों का पता लगाना, विकारों के लक्षण पहले ही निर्धारित करना आदि। उदाहरण के लिए, सिस्टिक फाइब्रोसिस और थैलेसीमिया।
  • फार्माकोजेनोमिक्स: इसमें किसी व्यक्ति के जीनोम अनुक्रमण से प्राप्त जानकारी के आधार पर दवाओं की प्रभावशीलता और उनकी सुरक्षा का मूल्यांकन करना शामिल है।
  • मेटाजेनोमिक अनुक्रमण: मेटाजीनोमिक अनुक्रमण सीधे पर्यावरण या प्रयोगशाला से ​​नमूनों का उपयोग करके सूक्ष्मजीव समुदायों की आनुवंशिक सामग्री का विश्लेषण करने की एक विधि है। इससे प्रजातियों की त्वरित पहचान और पर्यावरणीय प्रभाव विश्लेषण संभव हो पाता है।
  • कृषि: विविध फसली पादपों में रोग प्रतिरोधक क्षमता और सूखा सहनशीलता के लिए आनुवंशिक मार्करों की पहचान की जा सकती है। फसली पादपों की नई किस्मों को विकसित करने में लगने वाले समय को कम किया जा सकता है। साथ ही, फसलों में होस्ट व रोगजनकों के बीच संबंधों को समझा जा सकता है। 
  • सूक्ष्म जैविक अनुक्रमण: यह उन्नत जैव ईंधन विकास, नवीन नैदानिक उपकरणों, बेहतर टीकों और परिष्कृत पर्यावरणीय स्वच्छता तकनीकों को सक्षम बनाता है।

 

सूक्ष्मजीवों का महत्त्व

  • पर्यावरण: ये जैव-रासायनिक चक्रों, मृदा के निर्माण आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • उदाहरण के लिए- शैवाल सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके भोजन बनाते हैं और हवा में ऑक्सीजन मुक्त करते हैं।
  • मानव शरीर: ये हमारे पाचन तंत्र, प्रतिरक्षा और यहां तक ​​कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत आवश्यक हैं। 
  • घरेलू उत्पाद: फ्लेवर्स, खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों के विकास में उपयोगी हैं।
    • उदाहरण के लिए- लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) का उपयोग खाद्य किण्वन में किया जाता है।
  • औद्योगिक उपयोग: बेकर्स यीस्ट का उपयोग अनाज और फलों से ब्रेड एवं बीयर जैसे पेय पदार्थों के लिए किया जाता है।
  • अन्य: यीस्ट द्वारा जैव ईंधन उत्पादन; सीवेज उपचार आदि। 
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