राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) को एक स्टैंडअलोन केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत शुरू की गई इस योजना के लिए कुल 2481 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह बजट 15वें वित्त आयोग की अवधि यानी 2025-26 तक के लिए है।

पृष्ठभूमि

  • इससे पहले, शून्य बजट प्राकृतिक कृषि (ZBNF) का नाम बदलकर 2019 में भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP) कर दिया गया था। इसे परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) नामक अम्ब्रेला योजना के तहत एक उप-योजना के रूप में शामिल किया गया था।
    • बाद में, 2023-24 से BPKP का नाम बदलकर NMNF कर दिया गया था।

NMNF योजना की मुख्य विशेषताएं

  • कार्यान्वयन: अगले दो वर्षों में, NMNF को इच्छुक ग्राम पंचायतों के 15,000 क्लस्टर्स में लागू किया जाएगा तथा इसे 1 करोड़ किसानों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही, इसके तहत 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक कृषि शुरू की जाएगी।
    • योजना के तहत प्राकृतिक कृषि करने वाले किसानों की बहुतायत संख्या वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • बायो-इनपुट संसाधन केंद्र (BRCs): इनके माध्यम से किसानों के लिए उपयोग हेतु तैयार बायो-इनपुट की आसान उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए 10,000 ऐसे आवश्यकता-आधारित केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
  • मॉडल प्रदर्शन फार्म्स: इच्छुक किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए इन फार्म्स की स्थापना कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों (AUs) और किसानों के खेतों में की जाएगी।
  • जागरूकता सृजन: इच्छुक किसानों को संगठित करने और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए यह कार्य कृषि सखी के माध्यम से किया जाएगा। 
  • प्रमाणन: बाजार पहुंच के लिए सुगम व सरल प्रमाणन प्रणाली और समर्पित सामान्य ब्रांडिंग का प्रावधान किया गया है। 
  • निगरानी: योजना के तहत एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कार्यान्वयन की रियल टाइम जियो-टैग्ड और संदर्भित निगरानी की जाएगी।
  • अभिसरण: मौजूदा योजनाओं और समर्थन संरचनाओं के साथ अभिसरण की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा।

प्राकृतिक कृषि के बारे में

  • यह रसायन मुक्त और पशुधन आधारित कृषि पद्धति है। यह फसलों, वृक्षों और पशुधन को कार्यात्मक जैव विविधता के साथ एकीकृत करती है। 
  • मुख्य घटक: 
    • बीजामृत: इसमें गाय के गोबर आदि से बीजों का उपचार किया जाता है; 
    • जीवामृत: यह सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले जैव-उत्तेजक के रूप में कार्य करता है; 
    • आच्छादन (मल्चिंग): इसके तहत जीवित फसलों और मृत बायोमास दोनों का उपयोग करके मिट्टी की सतह को ढका जाता है;
    • व्हापासा: इसमें जलवाष्प के संघनन के लिए मिट्टी में केंचुओं को सक्रिय करना शामिल है; और 
    • पौध संरक्षण: कीटों आदि को रोकने के लिए जैविक मिश्रण का छिड़काव किया जाता है। 

 

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