अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने परमाणु तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया | Current Affairs | Vision IAS
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IAEA ने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु तकनीकें वैश्विक चुनौतियों के लिए नए समाधान प्रस्तुत कर रही हैं।

अलग-अलग क्षेत्रकों में परमाणु तकनीकों के प्रमुख उपयोग

  • चिकित्सा में: बीमारी की जांच और इलाज में उपयोग किया जाता है।
    • एक्स-रे जांच मशीन से ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता लगाकर इलाज शुरू किया जा सकता है।
    • रेडियोएक्टिव आयोडीन (I-131) का उपयोग थायराइड कैंसर और थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करने वाली अन्य बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।
  • ऊर्जा क्षेत्रक में: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार विश्व की लगभग 10% बिजली का स्रोत परमाणु ऊर्जा है।
  • कृषि क्षेत्रक में:
    • फॉलआउट रेडियोन्यूक्लाइड (FRN) तकनीक मृदा में रेडियोन्यूक्लाइड की मात्रा का विश्लेषण करके अपरदन पैटर्न को मापती है।
    • रेडियोइम्यूनोएसे (RIA) तकनीक: इसका उपयोग पशुओं में हार्मोन के स्तर का पता लगाने में किया जाता है। इससे कृत्रिम गर्भाधान के लिए सटीक समय निर्धारित करना संभव हो जाता है, आदि।
  • पर्यावरण संरक्षण में:
    • आइसोटोप हाइड्रोलॉजी हाइड्रोलॉजिकल चक्र में जल की गतिविधियों की निगरानी के लिए स्थायी (स्टेबल) और रेडियोएक्टिव, दोनों प्रकार के आइसोटोप्स का उपयोग करता है।
    • आइसोटोपिक तकनीकें चरम मौसम की घटनाओं की निगरानी में मदद कर रही हैं।
  • उद्योग क्षेत्रक में: रेडियोएक्टिव ट्रेसर्स का व्यापक रूप से महंगे औद्योगिक उपकरणों में त्रुटियों का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। इससे इन उपकरणों की संचालन अवधि बढ़ाई जा सकती है। 
  • अन्य क्षेत्रकों में उपयोग
    • खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने में: खाद्य विकिरण (Food irradiation) तकनीक के तहत खाद्य पदार्थों को गामा किरणों के प्रभाव में लाया जाता है। इससे खाद्य जनित बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।
    • रेडियोआइसोटोप थर्मल जनरेटर (RTG) का उपयोग अंतरिक्ष मिशनों में किया जाता है।

परमाणु तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पहलें

वैश्विक पहलें:

  • एटम्स4फूड (Atoms4Food) पहल: यह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा शुरू की गई पहल है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य हानि को कम करने हेतु नवीन परमाणु तकनीकों का उपयोग करने के लिए देशों को सहायता प्रदान करना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर: इसका निर्माण फ्रांस में किया जा रहा है। यह संलयन ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए मैग्नेटिक कॉनफाइनमेंट का परीक्षण करने वाली सबसे बड़ी टोकामक मशीन होगी। 

भारत की पहलें

  • प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के तहत बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण यूनिट्स की स्थापना के लिए प्रावधान किए गए हैं।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) गामा विकिरण के जरिये उत्परिवर्तन प्रेरित करके उच्च उपज देने वाली बीज की किस्में विकसित करता है।
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