सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) {Micro, Small, and Medium Enterprises (MSMEs)} | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) {Micro, Small, and Medium Enterprises (MSMEs)}

31 Mar 2026
1 min

In Summary

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में तीन-आयामी दृष्टिकोण का प्रस्ताव है: इक्विटी समर्थन (एसएमई ग्रोथ फंड, आत्मनिर्भर भारत फंड), तरलता समर्थन (टी-रीडीएस, सीजीटीएमएसई, जीईएम एकीकरण) और व्यावसायिक समर्थन (कॉर्पोरेट मित्र)।
  • भारत की अर्थव्यवस्था के लिए लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) महत्वपूर्ण हैं, जो जीडीपी में 31.1%, निर्यात में 48.58% का योगदान करते हैं और 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं, फिर भी उन्हें वित्त और बुनियादी ढांचे तक पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • उद्यम पंजीकरण, पीएमईजीपी, पीएम विश्वकर्मा, रैंप और सार्वजनिक खरीद नीति जैसी पहलों का उद्देश्य एमएसएमई को बढ़ावा देना है, जिसमें आगे का रास्ता ऋण, वैश्विक एकीकरण और कुशल मानव पूंजी पर केंद्रित है।

In Summary

सुर्खियों में क्यों?

केंद्रीय बजट 2026-2027 में विकसित भारत के लिए आर्थिक विकास को गति देने और उसे बनाए रखने के उद्देश्य से त्रि-आयामी दृष्टिकोण के माध्यम से "चैंपियन MSMEs" बनाने के लिए विभिन्न कदमों की घोषणा की गई।

अन्य संबंधित तथ्य 

त्रि-आयामी दृष्टिकोण में शामिल हैं:

  • इक्विटी सहायता
    • SME ग्रोथ फंड: चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10,000 करोड़ का समर्पित विशेषज्ञ SME ग्रोथ फंड।
    • आत्मनिर्भर भारत निधि: 2021 में स्थापित आत्मनिर्भर भारत फंड में सूक्ष्म उद्यमों के लिए ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि शामिल करने का प्रस्ताव है।
  • तरलता सहायता 
    • ट्रेड्स (TReDS): चार विशिष्ट उपायों के माध्यम से ट्रेड्स (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) प्लेटफॉर्म की क्षमता को अधिकतम करना:
      • ट्रेड्स का अनिवार्य उपयोग: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) से सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्रक उद्यमों (CPSE) की खरीदारी का निपटान ट्रेड्स के माध्यम से किया जाएगा।
      • क्रेडिट गारंटी सहायता: ट्रेड्स पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए गारंटी प्रदान करने और ऋणदाता के जोखिम को कम करने के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के माध्यम से एक क्रेडिट गारंटी सहायता तंत्र शुरू करना।
        • CGTMSE का उद्देश्य सदस्य ऋण संस्थानों (MLIs) द्वारा सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) को बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा या तीसरे पक्ष की गारंटी के विस्तारित ऋण सुविधाओं के लिए क्रेडिट गारंटी प्रदान करना है।
      • जेम–ट्रेड्स एकीकरण: सरकारी खरीद डेटा को वित्त-पोषकों के साथ साझा करने के लिए जेम को ट्रेड्स के साथ जोड़ना, जिससे एमएसएमई को तेज और सस्ता ऋण मिल सके।
      • द्वितीयक बाजार विकास: तरलता बढ़ाने के लिए ट्रेड्स प्राप्तियों को 'एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज' के रूप में पेश करना।
  • पेशेवर सहायता 
    • कॉरपोरेट मित्र: मान्यता प्राप्त पैरा-प्रोफेशनल जो किफायती लागत पर अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में MSMEs की मदद करेंगे।
    • पेशेवर संस्थान: ICAI, ICSI और ICMAI जैसे संस्थानों को विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में 'कॉरपोरेट मित्रों' को प्रशिक्षित करने के लिए अल्पकालिक, मॉड्यूल-आधारित पाठ्यक्रम डिजाइन करने की सुविधा दी जाएगी।

ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS)

  • उत्पत्ति: 2018 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा।
  • परिभाषा: ट्रेड्स (TReDS) एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जो कई वित्तपोषकों के माध्यम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के व्यापार प्राप्तियों के वित्त-पोषण / डिस्काउंटिंग की सुविधा प्रदान करता है।
  • ये प्राप्तियाँ कॉर्पोरेट्स और सरकारी विभागों तथा सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों (PSUs) सहित अन्य खरीदारों से देय हो सकती हैं।
  • प्रतिभागी: विक्रेता, खरीदार और वित्त-पोषक ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर भागीदार होते हैं।
    • विक्रेता: ट्रेड्स में केवल MSMEs ही विक्रेता के रूप में भाग ले सकते हैं।
    • खरीदार: कॉर्पोरेट, सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रम (PSUs) और कोई भी अन्य इकाई।
    • ट्रेड्स में वित्त-पोषक: बैंक, NBFC - फैक्टर्स और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमत संस्थान।

 

 

MSMEs क्या हैं?     

  • मानदंड: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का वर्गीकरण संयंत्र, मशीनरी या उपकरण में निवेश (भूमि और भवन को छोड़कर) और वार्षिक टर्नओवर (कारोबार) के मूल्यों पर आधारित होता है।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का वर्गीकरण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 (संशोधन 2020) के तहत परिभाषित किया गया है।
    • केंद्रीय बजट 2025-26 ने वर्गीकरण के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमाओं को क्रमशः 2.5 गुना और 2 गुना बढ़ा दिया है, जो 01.04.2025 से प्रभावी है।

MSMEs का महत्व

  • रोजगार सृजन: MSME भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है।
    • देश में 7.47 करोड़ से अधिक MSME उद्यम हैं, जो 32.82 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करते हैं (आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26)।
  • समावेशी विकास का साधन: इन उद्योगों में कम पूंजी लागत की आवश्यकता होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों और कामकाजी गरीबों, महिलाओं, युवाओं तथा कमजोर समुदायों के बीच गरीबी दूर करने में भारी योगदान देता है।
  • आर्थिक उत्पादन: यह क्षेत्र राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा चालक है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 31.1% हिस्सा है (आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26)।
  • औद्योगिक क्षेत्रक का आधार: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, MSME देश के कुल विनिर्माण का लगभग 35.4% प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • निर्यात को बढ़ावा: MSMEs घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों की मांगों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो भारत के कुल निर्यात में 48.58% का योगदान देते हैं।
  • ग्रामीण विकास: MSMEs का वितरण आंशिक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के पक्ष में है, जिनकी कुल हिस्सेदारी 51% है।

MSMEs द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दे

  • वित्तीय स्रोतों तक पहुंच: भारत में 21.5% MSME द्वारा इसे सबसे बड़ी बाधा के रूप में पहचाना गया है। (विश्व बैंक)
    • उच्च जोखिम की धारणा, संपार्श्विक की कमी, उच्च लेनदेन लागत और लघु आवेदकों की साख को सत्यापित करने में कठिनाइयों के कारण बैंक अक्सर ऋण देने में संकोच करते हैं।
  • "मिसिंग मिडल" की स्थिति: कड़े व्यापारिक नियम और अनुपालन लागत लघु फर्मों को असमान रूप से प्रभावित करती है, जिससे "नियामक रडार से बाहर" रहने के लिए लघु और अनौपचारिक बने रहने की प्रवृत्ति पैदा होती है।
    • नवंबर 2023 तक, पंजीकृत MSMEs में से 97.92% सूक्ष्म उद्यम थे, जबकि केवल 0.01% ही "मध्यम" स्तर तक पहुँच पाए।
  • नवाचार की निम्न दर: दक्षिण एशिया में 24.9% और वैश्विक स्तर पर 36% की तुलना में केवल 5.8% भारतीय MSMEs नए उत्पाद या सेवाएं पेश करते हैं।
  • बुनियादी ढांचे की बाधाएं: खराब सड़कें, अविश्वसनीय बिजली आपूर्ति और अपर्याप्त डिजिटल महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा व्यावसायिक संचालन में बाधा डालते हैं।
  • बाजार तक पहुंच: हालांकि कुल निर्यात में MSMEs की हिस्सेदारी लगभग 45% है, लेकिन उद्यम (Udyam) पोर्टल पर पंजीकृत MSMEs में से केवल 1.1% ही वास्तव में निर्यात गतिविधियों में लगे हुए हैं।

MSMEs के प्रोत्साहन के लिए भारत की विभिन्न पहलें

  • उद्यम पंजीकरण पोर्टल: MSMEs के लिए पंजीकरण की सुविधा और सभी योजनाओं एवं लाभों तक पहुंच आसान बनाने के लिए इसे 2020 में लॉन्च किया गया था। पंजीकरण की प्रक्रिया निःशुल्क, कागज रहित और डिजिटल है।
  • उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) पोर्टल (2023): अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों (IMEs) को औपचारिक दायरे में लाने और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (PSL) लाभों का लाभ उठाने के लिए।
    • दिसंबर 2025 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर 7.30 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीकृत हो चुके हैं।
  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): बैंक ऋणों पर मार्जिन मनी सब्सिडी देकर सूक्ष्म उद्यमियों को सहायता प्रदान करता है।
  • PM विश्वकर्मा (2023): 18 व्यवसायों के उन कारीगरों और शिल्पकारों को शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करना जो अपने हाथों और औजारों से काम करते हैं।
  • MSME प्रदर्शन को बेहतर और तेज करना (RAMP) योजना: विश्व बैंक द्वारा समर्थित केंद्रीय क्षेत्र की योजना, जिसका उद्देश्य बाजार, वित्त और प्रौद्योगिकी उन्नयन तक MSMEs की पहुंच में सुधार करना है।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति: यह केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) से 25% वार्षिक खरीद को अनिवार्य बनाती है।
  • MSME चैंपियन योजना: चयनित उद्यमों की प्रक्रियाओं को उन्नत करके, अक्षमताओं को कम करके, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करके और घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीयदोनों बाजारों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए उनके विकास में सहायता प्रदान करना।
    • इस योजना के तीन घटक हैं, जिनके नाम हैं: 'MSME-सस्टेनेबल (ZED)''MSME कॉम्पिटिटिव (LEAN)' और 'MSME-इनोवेटिव (इनक्यूबेशन, डिजाइन और IPR)'

आगे की राह

MSMEs को मजबूत करने के लिए एक समग्र रणनीति की आवश्यकता है, जिसमें भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के माध्यम से ऋण का विस्तार करना, उन्हें वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना और कुशल मानव पूंजी का निर्माण करना शामिल है। इसके साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म, साझा अनुसंधान बुनियादी ढांचा और बेहतर बाजार पहुंच नवाचार, दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा दे सकते हैं।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

MSME-Sustainable (ZED)

A component of the MSME Champion Scheme focused on promoting sustainable practices among MSMEs, likely through certifications or standards related to environmental, social, and governance (ESG) aspects.

G.E.M. (Government e-Marketplace)

A platform for online procurement of common goods and services required by various government organizations. The article highlights its integration with TReDS to facilitate faster and cheaper credit for MSMEs by sharing procurement data with financiers.

Corporate Mitra

Recognized para-professionals who will assist MSMEs in meeting compliance requirements at an affordable cost. This initiative falls under the 'professional assistance' pillar for MSMEs.

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet