सुर्ख़ियों में क्यों?
केंद्रीय वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 में ऑरेंज इकोनॉमी (क्रिएटिव इकोनॉमी) को बढ़ावा देने की योजना की घोषणा की, जो रोजगार सृजन, नवाचार, निर्यात और सॉफ्ट पावर में इसकी भूमिका को मान्यता देती है।
बजट में विभिन्न घोषणाएं
- AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स: सरकार ने 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने के लिए भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT), मुंबई को सहायता देने का प्रस्ताव दिया।
- संवृद्धि का अनुमान: बजट में कहा गया है कि भारत के एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र को 2030 तक 20 लाख (2 मिलियन) पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है।
- नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID): भारतीय डिजाइनरों की कमी को दूर करने के लिए, बजट में भारत के पूर्वी क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
- भारत में वर्तमान में सात NIDs हैं, जिन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में मान्यता प्राप्त है।

ऑरेंज इकोनॉमी क्या है?
- उत्पत्ति: यह शब्द कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति इवान डुके मार्केज़ और पूर्व संस्कृति मंत्री फेलिप बुइट्रागो ने अपनी 2013 की पुस्तक, "द ऑरेंज इकोनॉमी: एन इनफिनिट अपॉर्चुनिटी" में गढ़ा था।
- उन्होंने नारंगी (ऑरेंज) रंग इसलिए चुना क्योंकि यह ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से संस्कृति, रचनात्मकता और पहचान से जुड़ा रहा है।
- परिभाषा: "ऑरेंज इकोनॉमी" को जुड़ी हुई गतिविधियों के एक समूह के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके माध्यम से विचारों को सांस्कृतिक वस्तुओं और सेवाओं में परिवर्तित किया जाता है, और उनका मूल्य मुख्य रूप से बौद्धिक संपदा द्वारा निर्धारित होता है।
- अवधारणा: ऑरेंज इकोनॉमी उन उद्योगों पर केंद्रित है जो रचनात्मकता और बौद्धिक पूंजी को अपने प्राथमिक इनपुट (इनपुट) के रूप में उपयोग करते हैं। इसमें गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है जैसे:
- एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC)
- ऑडियोविजुअल मीडिया, फिल्म निर्माण, टेलीविजन और रेडियो
- संगीत, प्रदर्शन कला और दृश्य कला

- वास्तुकला, डिजाइन, फैशन और शिल्प
- सॉफ्टवेयर, अनुसंधान और विकास (R&D), और संचार की डिजिटल अभिव्यक्तियाँ आदि।
भारत के लिए ऑरेंज इकोनॉमी का महत्व
- निर्यात क्षमता: यह विदेशी मुद्रा का एक महत्वपूर्ण चालक है; 2023-24 में रचनात्मक निर्यात में 20% की वृद्धि हुई, जिससे 11 बिलियन डॉलर से अधिक की कमाई हुई।
- रोजगार सृजन: रचनात्मक क्षेत्र मौलिक रूप से प्रतिभा-संचालित है। वर्तमान में यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 मिलियन से अधिक आजीविकाओं का समर्थन करता है।
- सांस्कृतिक विरासत का लाभ उठाना: यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता को मूर्त आर्थिक अवसर में बदलने का एक तंत्र है।
- जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के पांच दिन स्थानीय अर्थव्यवस्था में ₹100 करोड़ से अधिक का योगदान देते हैं।
- "स्मार्ट पावर" का निर्माण: भारतीय OTT कंटेंट के कुल दर्शक संख्या का लगभग 25% विदेशों से आता है, जो विभिन्न महाद्वीपों में भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध सफलतापूर्वक बना रहा है।
- युवा और महिला-संचालित: वैश्विक स्तर पर, इसका 23% कार्यबल 15 से 29 वर्ष की आयु के बीच है (किसी भी अन्य क्षेत्र से अधिक), और रचनात्मक व्यवसायों में महिलाओं की हिस्सेदारी 45% है।
- लागत प्रतिस्पर्धात्मकता: भारत एक बड़े और कुशल कार्यबल के सहयोग से, एनीमेशन और VFX सेवाओं में 40 से 60% तक लागत लाभ प्रदान करता है।
- इस तुलनात्मक बढ़त ने भारत को एक आउटसोर्सिंग गंतव्य से बदलकर 'अवतार' और 'गेम ऑफ थ्रोन्स' जैसी प्रस्तुतियों के लिए उच्च-मूल्य वाले रचनात्मक सहयोग के एक पसंदीदा केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।
ऑरेंज इकोनॉमी की संवृद्धि में बाधाएं
- बौद्धिक संपदा (IP) का उल्लंघन: डिजिटल परिवेश में बौद्धिक संपदा की रक्षा करना एक बड़ी बाधा है, जहाँ सामग्री को आसानी से कॉपी और पुनर्वितरित किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप फिल्म और टेलीविजन उद्योगों को राजस्व का भारी नुकसान होता है।
- बाजार का संकेंद्रण और एकाधिकार शक्ति: डिजिटल रचनात्मक अर्थव्यवस्था अत्यधिक संकेंद्रित है। इसमें कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियां और "गेटकीपर" प्लेटफॉर्म प्रकाशन, स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया जैसे क्षेत्रों पर हावी हैं।
- उदाहरण के लिए, प्रकाशन उद्योग में अनुमानित 90% राजस्व प्रकाशकों, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा ले लिया जाता है, जिससे वास्तविक रचनाकारों के लिए केवल 10% ही बचता है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): यह बिना किसी मुआवजे के कलाकारों के काम के अनधिकृत उपयोग को लेकर चिंताएं पैदा करता है।
- श्रम की स्थिति: रचनात्मक उद्योग के श्रमिकों को अक्सर उच्च नौकरी असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। काम अक्सर परियोजना-आधारित और स्व-रोजगार वाला होता है, जो श्रमिकों को भुगतान किए गए बीमार अवकाश या मातृत्व अवकाश जैसी मानक सामाजिक सुरक्षा सुरक्षाओं से वंचित कर देता है।
- प्रणालीगत असमानताएं: नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं (जैसे फिल्म निर्देशन) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी बहुत कम है। साथ ही, रचनात्मक रोजगार अक्सर शहरी केंद्रों में केंद्रित होता है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाएं पीछे छूट जाती हैं।
ऑरेंज/क्रिएटिव इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें
- वैश्विक पहलें
- क्रिएटिव इकोनॉमी का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2021 को "सतत विकास के लिए रचनात्मक अर्थव्यवस्था का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष" घोषित किया।
- क्रिएटिव इकोनॉमी पर बाली एजेंडा (2018): रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर विश्व सम्मेलनों में स्थापित किया गया।
- ब्रिजटाउन कोवेनेंट: अंकटाड (UNCTAD) द्वारा संस्कृति और रचनात्मकता को व्यापार, तकनीकी नवाचार और आर्थिक विविधीकरण के केंद्र में रखने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।
- भारतीय पहलें
- भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT): इसे 2024 में मुंबई, महाराष्ट्र में 'AVGC-XR' के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अनावरण किया गया।
- फिल्म सुविधा और पायरेसी-रोधी उपाय: सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने डिजिटल बौद्धिक संपदा (IP) की सुरक्षा के लिए जेल की सजा और भारी जुर्माने सहित कड़े पायरेसी-रोधी प्रावधान पेश किए।
- इंडिया सिने हब (ICH): फिल्म शूटिंग की अनुमतियों को सरल बनाने और उत्पादन प्रोत्साहनों को केंद्रीकृत करने के लिए एक सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- राष्ट्रीय प्रसारण नीति: भारत के प्रसारण इकोसिस्टम के लिए एक आधुनिक, समावेशी और विकास-उन्मुख ढांचा तैयार करने के लिए विकसित की गई। यह कंटेंट की विविधता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी।
- वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES): यह प्लेटफॉर्म फिल्म, टेलीविजन, OTT, एनीमेशन, VFX, गेमिंग और XR क्षेत्रों के नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, रचनाकारों और निवेशकों के लिए एक संगम बिंदु के रूप में कार्य करता है।
निष्कर्ष
ऑरेंज इकोनॉमी की रचनात्मक क्षमता का लाभ उठाकर भारत में रोजगार और विकास को गति दी जा सकती है। बौद्धिक संपदा (IP) संरक्षण, डिजिटल बुनियादी ढांचे, कौशल विकास, सांस्कृतिक निर्यात और स्टार्टअप सहायता को मजबूत करने से इसकी पूर्ण आर्थिक और 'सॉफ्ट पावर' क्षमता का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।