सुर्ख़ियों में क्यों?
ग्रामीण विकास के लिए केंद्रीय बजट आवंटन 211% से अधिक बढ़कर 2.73 लाख करोड़ (2016-17 से 2026-27 तक) हो गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है।
विकेंद्रीकरण के बारे में
- अर्थ: प्रशासनिक अधिकारों का विभिन्न व्यक्तियों या इकाइयों के बीच हस्तांतरण या वितरण।
- संवैधानिक प्रावधान:
- 73वां और 74वां संशोधन अधिनियम, 1992: पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया तथा भाग IX (पंचायत) और भाग IX-A (नगरपालिका) जोड़े गए।
- अनुच्छेद 40: राज्यों को ग्राम पंचायतों को संगठित करने और उन्हें आवश्यक शक्तियां तथा अधिकार प्रदान करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
- अनुच्छेद 243G: राज्य विधानमंडल को पंचायतों पर शक्तियों और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण का अधिकार प्रदान करता है।
- सातवीं अनुसूची: पंचायत को राज्य सूची के विषय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- विकेंद्रीकरण से संबंधित समितियां
- बलवंत राय मेहता समिति (1957): ग्रामीण स्थानीय सरकार की त्रि-स्तरीय प्रणाली का सुझाव दिया, जिसमें जिला परिषद (जिला स्तर), पंचायत समिति (खंड/तहसील/तालुका) और ग्राम पंचायत (गांव) शामिल हैं।
- पहला पंचायती राज संस्थान (PRI) 2 अक्टूबर, 1959 को राजस्थान के नागौर में गठित किया गया था।
- अशोक मेहता समिति (1977): PRI की द्वि-स्तरीय प्रणाली, जिसमें जिला परिषद (जिला स्तर) और मंडल पंचायत (आधार स्तर) शामिल हैं।
- अन्य समितियों में शामिल हैं: एल.एम. सिंघवी समिति (1985); सरकारिया आयोग (1986); पी.के. थुंगन समिति (1988), आदि।
- बलवंत राय मेहता समिति (1957): ग्रामीण स्थानीय सरकार की त्रि-स्तरीय प्रणाली का सुझाव दिया, जिसमें जिला परिषद (जिला स्तर), पंचायत समिति (खंड/तहसील/तालुका) और ग्राम पंचायत (गांव) शामिल हैं।
73वें और 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 की मुख्य विशेषताएं
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ग्रामीण रूपांतरण के लिए विकेंद्रीकरण का महत्व
- बेहतर आर्थिक और सामाजिक संकेतक: नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) में वर्णित किया गया है कि गरीबी का हेडकाउंट अनुपात 2005–06 में 55.3% से घटकर 2022–23 में 11.28% हो गया है।
- जल जीवन मिशन के कारण 99.6% (2024-25) ग्रामीण परिवार पेयजल के बेहतर स्रोतों का प्रयोग करते हैं; स्वच्छ भारत मिशन के तहत 96% गांवों ने 2025 तक खुले में शौच मुक्त (ODF) प्लस का दर्जा हासिल कर लिया है; आदि।
- महिलाओं के लिए लोकतांत्रिक अवसर: अब PRI नेतृत्व में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 40% है।
- अधिक वित्त: पंचायती राज मंत्रालय के विकेंद्रीकरण सूचकांक- 2024 के अनुसार, अधिकारों के हस्तांतरण का स्तर 39.9% (2013-14) से बढ़कर 43.9% (2021-22) हो गया है।
- स्वस्थ सहकारी संघवाद: उदाहरण के लिए, केरल ने सभी 29 कार्य पंचायतों को सौंप दिए; बिहार ने "पंचायत सरकार" को अपनाया और ओडिशा ने महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बढ़ाकर 50% कर दी हैं।
- संस्थागत ढांचा: स्थानीय निकायों को शासन के लिए अधिक दायित्व सौंप देना, निरंतरता का तत्व प्रदान करना और जनभागीदारी की प्रक्रिया को व्यापक बनाना।
ग्रामीण क्षेत्रों में शक्तियों के विकेंद्रीकरण की दिशा में प्रारंभ की गई हालिया पहलें
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA): 2022-23 में लागू एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम, इसका उद्देश्य प्रशिक्षण आदि के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की क्षमता बढ़ाना है।
- विकेंद्रीकरण सूचकांक (Devolution Index): सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 6 आयामों —अर्थात् ढांचा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता संवर्धन और जवाबदेही के आधार पर रैंकिंग; पंचायतों के खातों के ऑडिट के लिए 'AuditOnline' आदि।
- ई-ग्राम स्वराज: एक वेब-आधारित पोर्टल, जिसे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि राज्य केंद्रीय वित्त आयोग के फंड को ऑनलाइन माध्यम से PRIs को हस्तांतरित कर सकें।
- सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के साथ एकीकृत किया गया है।
- राजकोषीय विकेंद्रीकरण: 15वें वित्त आयोग (2021-2026) के तहत लगभग ₹2.36 लाख करोड़ से बढ़कर 16वें वित्त आयोग (2026-2031) के तहत लगभग ₹4.35 लाख करोड़ हो गया है।
- डिजिटलीकरण की पहलें:
- ई-पंचायतों पर मिशन मोड प्रोजेक्ट (MMP-ePanchayat), जो RGSA का एक केंद्रीय घटक है;
- स्वामित्व(SVAMITVA) योजना, जिसके तहत ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को औपचारिक रूप देने के लिए ड्रोन-आधारित मैपिंग की जाती है;
- नमो ड्रोन दीदी पहल, इसका उद्देश्य डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है;
- डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP): भूमि प्रशासन में सुधारों के लिए।
- विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या या भू-आधार (ULPIN/Bhu-Aadhaar) आदि।
- विभिन्न वर्गों का सशक्तिकरण:
- युवा: मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देती है।
- महिलाएँ: दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत समावेशी आजीविका योजना (2023), ग्रामीण महिलाओं की स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 'अति-गरीब व्यक्ति के उत्थान का दृष्टिकोण' अपनाती है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए SHE-Marts की व्यवस्था।
- रोजगार और कौशल विकास
- 'विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025' प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष 125 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार का कानूनी अधिकार प्रदान करता है;
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) मांग-आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है।
विकेंद्रीकरण में विद्यमान समस्याएं
- अधिकारों के विकेंद्रीकरण की कमी: चूंकि 73वें और 74वें संशोधन अधिनियम कार्यों के विकेंद्रीकरण को अनिवार्य नहीं बनाया गया है, इसलिए स्थानीय निकायों की कार्यात्मक क्षमताएं सीमित हैं और कुछ राज्यों में तो यह विकेंद्रीकरण बहुत ही कम है।
- अंतर-सरकारी पदानुक्रम: तृतीय स्तर (स्थानीय निकायों) पर नीति निर्माण की शक्ति का अभाव है और वे राज्य सरकार के एक उपकरण के रूप में कार्य करते हैं, जो 'स्थानीय स्व-शासन' की मूल अवधारणा को ही धूमिल कर देता है।
- वित्तीय बाधाएं: स्थानीय निकाय अनुदान के लिए राज्य सरकारों पर निर्भर रहते हैं; उनके अपने राजस्व के स्रोत (OSR) बहुत कम हैं; आदि।
- उदाहरण के लिए, RBI के अनुसार, पंचायतों का OSR उनके कुल राजस्व का केवल 1.1% था।
- स्थानीय निकाय के अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार: जागरूकता के निम्न स्तर के साथ-साथ जाति, वर्ग और लिंग-आधारित पदानुक्रमों की व्यापकता ने स्थानीय शासन में जनता की भागीदारी को बाधित किया है। उदाहरण के लिए, 'सरपंच पति' संस्कृति।
- अधिकार क्षेत्र की स्पष्टता का अभाव: प्रत्येक विषय के तहत प्रत्येक स्तर की गतिविधियों का दायरा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है और इसे संबंधित राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़ दिया गया है।
- अन्य समस्याएं: राज्य वित्त आयोगों (SFCs) का अनियमित गठन; जिला योजना समिति (DPC) के कामकाज में समस्याएं; पर्याप्त कर्मचारियों/पदाधिकारियों का अभाव, आदि।
ग्रामीण विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने की दिशा में आगे की राह
- कल्याणकारी वितरण से विकेंद्रीकृत साझेदारी की ओर नीतिगत बदलाव: विकास के विशुद्ध सरकारी नेतृत्व वाले मॉडल से हटकर समुदाय-आधारित विकेंद्रीकृत दृष्टिकोणों की ओर बढ़ना।
- ग्राम सभा का सशक्तिकरण: लोगों की अधिकतम भागीदारी के साथ आवधिक बैठकें सुनिश्चित करना, ताकि जरूरतमंदों तक लाभ पहुंच सके।
- नवीन संसाधन जुटाना: अनुदानों पर निर्भरता के बजाय उद्यमशीलता गतिविधियों, उत्पादक भूमि और उचित कर संग्रह तंत्र से आय सृजन करना।
- समन्वय को बढ़ावा देना: एक ओर पंचायती राज संस्थाओं के तीन स्तरों और दूसरी ओर नौकरशाही के बीच शक्तियों और कार्यों के वितरण से संबंधित समन्वय को बढ़ावा देना।
- सामुदायिक नेटवर्क/संस्थानों को मजबूत करना: गरीबों की क्षमता निर्माण करना,
- आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दरिद्रता, भूख, बीमारी और अलगाव से बचाव करना।
- राज्यों की भूमिका: स्थानीय संस्थानों, कानूनी ढांचे के निर्माण और लोगों की भागीदारी के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में सहायता प्रदान करना।
- गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका: सरकार की कमियों को दूर करने और वंचित क्षेत्रों को विशेष ज्ञान एवं संसाधन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।
निष्कर्ष
विकेंद्रीकृत शासन की सफलता '3Fs' (फंड, फंक्शन और फंक्शनरी) के सशक्तिकरण पर निर्भर करती है।