ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रौद्योगिकी (Solid Fuel Ducted Ramjet Technology) | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

31 Mar 2026
6 min

In Summary

  • डीआरडीओ ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।
  • यह प्रदर्शन ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में हुआ।

In Summary

रक्षा अनुसंधान एवं विकास (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित समन्वित परीक्षण केंद्र (ITR) से ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (SFDR)  प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण प्रदर्शन किया।

चंद्रयान-4 मिशन के तहत चंद्रमा पर लैंडर को उतारने के लिए मॉन्स माउटन स्थान की पहचान की गई है।

  • चंद्रयान-4, भारत का चंद्रमा के लिए चौथा मिशन होगा।  
  • इस मिशन का उद्देश्य चन्द्रमा की सतह से नमूने एकत्र कर वहाँ से उड़ान भरने का प्रदर्शन करना तथा उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है।
  • चंद्रयान-4 मिशन के प्रक्षेपण की प्रस्तावित समय-सीमा: 2027

मॉन्स माउटन के बारे में

  • यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थित एक पर्वत है। इसे अनौपचारिक रूप से लैबनिट्ज़ बीटा के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसका नाम नासा की गणितज्ञ एवं कंप्यूटर प्रोग्रामर मेल्बा रॉय माउटन के सम्मान में रखा गया है।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • लगभग 100 किलोमीटर तक फैला चपाट चोटी वाला पर्वत
    • आसपास की सतह से लगभग 6000 मीटर ऊँचा। 

केंद्रीय बजट 2026 में सूर्य और ब्रह्मांड की उत्पत्ति का अध्ययन करने के लिए लद्दाख में दो नई दूरबीनों (Telescopes) की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

दो नई दूरबीनों के बारे में:

  • नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST): यह मेराक (लद्दाख) में स्थापित की जाने वाली 2-मीटर एपर्चर दूरबीन है। यह सौर गतिशीलता, चुंबकत्व और अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करेगी। 
    • एक बार प्रारंभ होने के बाद, NLST भूमि से संचालित भारत की तीसरी सौर वेधशाला के रूप में कार्य करेगी।
    • वर्तमान में, कोडाइकनाल सौर वेधशाला (तमिलनाडु, स्थापना 1899) और उदयपुर सौर वेधशाला (राजस्थान, स्थापना 1975) कार्यरत हैं।
  • नेशनल लार्ज ऑप्टिकल टेलीस्कोप (NLOT): यह हानले (लद्दाख) में 13.7-मीटर की सेगमेंटेड मिरर (Segmented Mirror) वाली दूरबीन होगी।
    • यह ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके एक्सोप्लैनेट (बाह्य ग्रहों) और ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर शोध करेगी। 

विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) पर दावोस कॉम्पैक्ट 2025 लॉन्च किया। यह कॉम्पैक्ट, 'एकीकृत AMR प्रतिक्रिया गठबंधन' द्वारा समर्थित है। 

  • इसका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी दोनों स्रोतों से स्थायी वित्त-पोषण प्राप्त करना है, ताकि वैश्विक स्तर पर AMR से होने वाली मौतों को कम किया जा सके। साथ ही, 2050 तक 100 मिलियन से अधिक लोगों का जीवन बचाया जा सके।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance: AMR) के बारे में

  • यह तब होता है, जब जीवाणु, विषाणु, कवक और परजीवी रोगाणुरोधी दवाओं (जैसे- एंटीबायोटिक, एंटीवायरल, एंटीफंगल आदि) का प्रतिरोध करने के लिए तंत्र विकसित कर लेते हैं। इससे ये दवाएं अप्रभावी हो जाती हैं।
  • यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो समय के साथ रोगजनकों (pathogens) में आनुवंशिक परिवर्तनों के माध्यम से होती है।
    • हालांकि, मानवजनित गतिविधियों, मुख्य रूप से रोगाणुरोधी दवाओं के दुरुपयोग एवं अत्यधिक उपयोग के कारण इसके प्रसार में तेजी आई है।
  • भारत में स्थिति: भारत में प्रतिवर्ष प्रतिरोधी संक्रमणों के कारण लगभग 6 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है।

AMR से निपटने के लिए प्रमुख पहलें

  • राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP) 2.0 (2025-2029): मनुष्यों, पशुओं, कृषि और पर्यावरण के लिए एक एकीकृत एवं समन्वित प्रयास करना।
  • प्रथम स्वदेशी एंटीबायोटिक, नेफिथ्रोमाइसिन (Nafithromycin): इसे 2024 में प्रस्तुत किया गया था। इसे सामान्य और असामान्य दोनों तरह के दवा-प्रतिरोधी जीवाणु के उपचार के लिए विकसित किया गया है।
  • राष्ट्रीय निगरानी नेटवर्क्स: वार्षिक AMR निगरानी रिपोर्ट तैयार करना, जिसका डेटा 'वैश्विक AMR निगरानी तंत्र' (GLASS) को भेजा जाता है।
  • वैश्विक प्रयास:
    • 2015 की विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान AMR पर वैश्विक कार्य योजना (GAP);
    • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की AMR पर उच्च स्तरीय बैठक, 2024: इसका लक्ष्य 2019 की आधाररेखा के मुकाबले 2030 तक जीवाणु संबंधी AMR से जुड़ी वैश्विक मौतों को 10% तक कम करना है।

केरल देश का पहला राज्य बन गया है जिसने 'बैसिलस सबटिलिस' (Bacillus subtilis)  को ‘राज्य सूक्ष्मजीव (State Microbe)’ घोषित किया है।

बैसिलस सबटिलिस क्या है?  

  • यह एक प्रकार का प्रोबायोटिक (अच्छा बैक्टीरिया) है, जो पर्यावरण में व्यापक रूप से पाया जाता है।
  • यह मनुष्यों की आंत में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है और किण्वित (fermented) खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है।
  • औद्योगिक दृष्टि से महत्व: यह एंजाइम (जैसे एमाइलेज, प्रोटीज), एंटीबायोटिक्स (जैसे-बेसिट्रासिन) के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
    • इसका कृषि और पशु आहार में प्रोबायोटिक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • इसका “सामान्य रूप से सुरक्षित के रूप में मान्यता (GRAS)” दर्जा, इसे खाद्य और औषधि क्षेत्रकों में उपयोगी बनाता है। 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अनुसार, पिछले एक दशक में अंग प्रत्यारोपण की संख्या लगभग चार गुना बढ़ गई है। 2013 में यह संख्या 5,000 से कम थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 20,000 हो गई है।

  • इनमें से लगभग 18% प्रत्यारोपण मृत दाताओं द्वारा दान किए गए अंगों से जुड़े हैं, जो कैडेवरिक (मृतक दाता) दान में वृद्धि को दर्शाता है।

भारत में अंग प्रत्यारोपण संबंधी फ्रेमवर्क

  • विधिक ढांचा: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (THOTA)
  • विनियामक तंत्र: THOTA, 1994 के अंतर्गत त्रिस्तरीय संरचना:
    • NOTTO: अंग/ ऊतक दान एवं प्रत्यारोपण के समन्वय, नेटवर्किंग और पंजीकरण के लिए सर्वोच्च निकाय।
    • ROTTO: क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन।
    • SOTTO: राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन।
  • राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (NOTP): यह एक केंद्रीय क्षेत्रक का कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद नागरिकों के लिए अंग प्रत्यारोपण तक पहुंच में सुधार करना है।

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ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (SFDR)

ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (Solid Fuel Ducted Ramjet - SFDR) एक उन्नत प्रोपल्शन (propulsion) तकनीक है। यह मिसाइलों को उच्च गति और लंबी दूरी तक ले जाने में सक्षम बनाती है, जहाँ रैमजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन का उपयोग करके ईंधन जलाता है।

समन्वित परीक्षण केंद्र (ITR)

समन्वित परीक्षण केंद्र (Integrated Test Range - ITR) ओडिशा के चांदीपुर में स्थित एक महत्वपूर्ण सुविधा है। यह विभिन्न मिसाइलों और रक्षा प्रौद्योगिकियों के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा प्रदान करता है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास (DRDO)

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संगठन है। इसका मुख्य कार्य भारत के लिए रक्षा प्रणालियों के डिजाइन, विकास और उत्पादन के लिए अनुसंधान एवं विकास करना है।

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